अमेरिका ने एंटीबॉडी से बनाई कोरोना वायरस की दवा, इंसानों पर शुरू किया ट्रायल
नई दिल्ली: चीन के वुहान से शुरू हुए कोरोना वायरस से पूरी दुनिया परेशान है। अब तक इस वायरस से 62 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं, जबकि 3.8 लाख लोगों की मौत हुई है। कोरोना की दवा नहीं होने के चलते ज्यादातर देशों ने लॉकडाउन का ऐलान कर रखा है। जब तक कोरोना की दवा नहीं मिल जाती है, तब तक ऐसे ही पाबंदियां लागू रहने की उम्मीद है। इस बीच अमेरिका की एली लिली कंपनी (Eli Lilly and Company) ने एक राहत भरी खबर दी है। कंपनी के मुताबिक उन्होंने ठीक हुए मरीजों की एंटीबॉडी से कोरोना की दवा तैयार कर ली है।

तीन महीने से हो रहा काम
अमेरिकी कंपनी एली लिली ने कोरोना की दवा का नाम ‘LY-CoV555' रखा है। इस दवा को ठीक हो चुके मरीजों की एंटीबॉडी से तैयार किया गया है। कंपनी के मुताबिक इस दवा के इस्तेमाल से कोरोना इंसानों की स्वस्थ कोशिकाओं में नहीं पहुंच पाएगा। जिस वजह से उनको नुकसान भी नहीं होगा। उन्होंने मार्च में एक करार के बाद कोरोना से ठीक हुए लोगों के सैंपल लेना शुरू किए थे। इस प्रोजेक्ट में सबसे पहले मरीजों का खून लिया गया, उसके बाद उसमें से एंटीबॉडी अलग की गई। फिर उसी के आधार पर ये दवा बनाई गई। इस काम में लिली कंपनी के साथ सेल्लेरा बायोलॉजी कंपनी की भी साझेदारी है।

प्रोटीन संरचना को तोड़ेगी दवा
इंसानों पर इसका परीक्षण शुरू कर दिया गया है। पहले चरण में वैज्ञानिक दवा से इंसानों की सुरक्षा और उसके सहन करने की क्षमता का पता लगाएंगे। उन्होंने उम्मीद जताई है कि इस दवा से कोरोना वायरस के स्पाइक प्रोटीन संरचना को खत्म किया जा सकता है। अगर ट्रायल सफल रहा तो जल्द ही बाजार में दवा उपलब्ध करवा दी जाएगी। अमेरिका के अलावा चीन और इजरायल ने भी कोरोना की वैक्सीन बना लेने का दावा किया है।

वुहान में चल रहा ट्रायल
चीनी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स और बीजिंग इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल ने साथ मिलकर कोरोना वैक्सीन को तैयार कर लिया है। इस बात की पुष्टि चीन सरकार के एसेट्स सुपरविजन एंड एडमिनिस्ट्रेशन कमीशन (SASAC) ने वीचैट पर की है। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों संस्थाओं ने 2000 लोगों पर इसका ट्रॉयल किया था, जोकि सफल रहा। अब इस वैक्सीन के ट्रॉयल का दूसरा चरण शुरू होने वाला है। इसके बाद इस साल के अंत या फिर अगले साल की शुरूआत में वैक्सीन बाजार में आ सकती है। बीजिंग इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स के मुताबिक वो एक साल में वैक्सीन की 10-12 करोड़ डोज तैयार कर सकते हैं।












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