अमेरिका ने शेख हसीना सरकार की मरोड़ी बांह, बांग्लादेश में भारतीय हितों का हो सकता है बड़ा नुकसान

शेख हसीना सरकार के भारत से काफी मधुर संबंध रहे हैं, जबकि अमेरिका शेख हसीना सरकार की सत्ता परिवर्तन के अलावा कुछ और से राजी नहीं है, जिसने भारत की चिंताओं को बढ़ा दिया है।

Bangladesh-India-America

Bangladesh-India-America: बांग्लादेश में संसदीय चुनावों से पहले अमेरिका ने अपना बाहुबल दिखाना शुरू कर दिया है और अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है, कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों में बाधा डालने वाले, लोकतंत्र को कमजोर करने वाले या मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों को अमेरिका का वीजा नहीं दिया जाएगा।

अमेरिका का बांग्लादेश को लेकर ये खुला ऐलान, भारत के लिए वास्तव में बुरी खबर है।

वाशिंगटन का इरादा बिल्कुल स्पष्ट है। अमेरिका ने प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग सरकार को 2014 और 2018 के पिछले धांधली वाले चुनावों की तरह आगामी आम चुनावों को जीतने के लिए अलोकतांत्रिक, अवैध और अतिरिक्त-संवैधानिक तरीकों का सहारा लेने से रोकने के लिए खुली चेतावनी दे दी है।

लेकिन नई दिल्ली चाहता है, कि बांग्लादेश के संसदीय चुनाव में शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी फिर से जीत हासिल करे और शेख हसीना, फिर से बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनें।

शेख हसीना से अमेरिका को चिढ़ क्यों?

एक तरफ तो अमेरिका को शेख हसीना सरकार के बारे में इतनी गहरी गलतफहमी है, कि वह उन्हें सत्ता से बेदखल करना चाहता है।

जबकि, दूसरी ओर, भारत की विदेश नीति-सह-सुरक्षा प्रतिष्ठान की सबसे बड़ी प्राथमिकता, शेख हसीना को जनवरी 2024 में होने वाले चुनाव में किसी भी कीमत पर लगातार चौथे कार्यकाल के लिए फिर से निर्वाचित करवाना है।

यानि, बांग्लादेश में भारत बनाम अमेरिका की एक अलग प्रतिस्पर्धा चल रही है।

अमेरिका का मानना है, कि बांग्लादेश की शेख हसीना सरकार चुनाव में धांधली और अनियमितताओं के आधार पर चुनाव जीतती है, जबकि भारत की नीति हमेशा से अवामी लीग को समर्थन देने की रही है।

लिहाजा, ये दूरी बांग्लादेश पर भारत-अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष को भी रेखांकित करती है और अमेरिका को चुनौती देने वाले अपने लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए भारत की क्षमताओं के बारे में वैध प्रश्न उठाती है, और क्या ऐसा करना बुद्धिमानी है।

वहीं, अमेरिका जो कर रहा है, वो भारत के ही पड़ोसी देश में, जिसके भारत से काफी अच्छे संबंध हैं, वहां पर अमेरिका की घोर असंवेदनशीलता को दर्शाता है, कि कैसे अमेरिका हमेशा भारत से अपेक्षा करता है, कि यदि वे टकराते हैं, तो भारत चुपचाप अमेरिका के लिए अपने हितों का बलिदान कर दे। लेकिन, भारत अपने हितों को लेकर पूरी तरह से सतर्क है।

बांग्लादेश की विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी), जिसकी प्रमुख खालिदा जिया हैं, वो हमेशा से भारत विरोधी रही हैं।

Bangladesh-India-America

बांग्लादेश में भारत के राष्ट्रीय हित क्या हैं?

भारत के राष्ट्रीय हितों की मांग है, कि अवामी लीग फिर से सरकार बनाए, ताकि बांग्लादेश में उसकी जरूरतें बिना मांगे ही पूरी की जा सकें।

भारत के लिए, नई दिल्ली की आजमाई हुई सहयोगी हसीना का बांग्लादेश में कोई विकल्प नहीं है। लेकिन अमेरिका न तो हसीना के पक्ष में है और न ही अवामी लीग के पक्ष में। अमेरिका चाहता है, कि बांग्लादेश में शासन का परिवर्तन हो।

इसमें कोई संदेह नहीं है, कि वाशिंगटन की अचानक मुखरता ने नई दिल्ली के कार्यों में बाधा डाली है। इसने विदेश मंत्रालय, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग, राष्ट्रीय सुरक्षा समन्वय सचिवालय और यहां तक कि प्रधानमंत्री कार्यालय को भी झटका दिया है।

अमेरिका ने निश्चित रूप से विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बांग्लादेश पॉलिसी को थोड़ा कठिन बना दिया है, और उन पर काम का बोझ बढ़ा दिया है।

वहीं, इस बात की पूरी आशंका है, कि जनवरी 2024 के चुनावों से पहले बांग्लादेश पर लगाम लगाने और हसीना सरकार को बांधने के लिए, अमेरिका सख्त कदम उठाए और ये संभावनाएं, भारत की चिंताओं को बढ़ा रहे हैं।

यानि, अगर अब शेख हसीना की सरकार बांग्लादेश की फ्री प्रेस, विपक्षी नेताओं, जैसे मुहम्मद यूनुस या महफूज अनम को धमकाने की कोशिश तकती है, तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

आशंका इस बात की बहुत ज्यादा है, कि प्रधानमंत्री शेख हसीना के करीबी परिवार के सदस्यों के वीजा रद्द कर दिए जा सकते हैं, ताकि यह प्रदर्शित किया जा सके, कि अमेरिका की धमकी सिर्फ जुबानी नहीं है।

भारत को क्या नुकसान हो सकता है?

बांग्लादेश की विपक्षी नेता बेहम खालिदा जिया (बीएनपी), जो साल 2001 से 2006 तक सत्ता में थीं, उनके कार्यकाल में बांग्लादेश ने भारत के दुश्मन पाकिस्तान का साथ मिलीभगत करके भारत विरोधी नीतियों को खुलेआम बढ़ाया।

वहीं, खालिदा जिया के शासनकाल में बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतों का तेजी से उभार हुआ, जिससे भारत के हितों को सीधा नुकसान पहुंचता है। वहीं, बांग्लादेश में भारत विरोधी ताकतों को भी बढ़ाने में खालिदा जिया ने अहम भूमिका निभाई।

इसके साथ ही साथ, खालिदा जिया के कार्यकाल में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसएआई ने कथित तौर पर ढाका में अपना दफ्तर तक खोल लिया था। खालिदा जिया के शासनकाल में पाकिस्तान ने भारत में आतंकवाद के निर्यात का काम ढाका को आउटसोर्स कर दिया था।

लेकिन शेख हसीना ने प्रधानमंत्री बनने के बाद खालिदा जिया की पार्टी बीएनपी को निर्दयतापूर्वक कुचल दिया और बीएनपी की शक्ति बांग्लादेश में काफी कमजोर हो गई, लेकिन अमेरिका की नई धमकी ने खालिदा जिया को नई ऊर्जा से भर दिया है और अब बीएनपी एक बार फिर से सत्ता में वापसी का सपना देखने लगी है और अगर ऐसा होता है, तो ये भारत के लिए काफी खतरनाक होगा।

Recommended Video

    Bangladesh Army Chief General SM Shafiuddin Ahmed का Guard of Honour से स्वागत | वनइंडिया हिंदी

    लिहाजा, माना जा रहा है, कि भारत अब बांग्लादेश सरकार और अमेरिका के बीच आई कड़वाहट को दूर करने के लिए अपनी भूमिका में आ सकता है। क्योंकि भारत कभी नहीं चाहेगा, कि अमेरिका कोशिश से उसके पड़ोस में एक और दुश्मन सरकार फंक्शन करे और दक्षिण एशिया में उसके लिए एक और सिरदर्द पैदा हो।

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+