Minuteman III: आधे घंटे में ईरान स्वाहा..अमेरिका ने बनाई हिरोशिमा बम से 20 गुना खतरनाक मिसाइल, क्या है खासियत?
Minuteman III: अमेरिका ने कैलिफोर्निया के तट से एक इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का परीक्षण किया। अमेरिकी स्पेस फोर्स के मुताबिक GT 255 कोड नाम वाला यह लॉन्च कई साल पहले से प्लान किया गया था। गौर करने वाली बात है कि, यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ जब इजरायल-ईरान युद्ध में अमेरिका को घुसे एक सप्ताह हो चुका है।
कैसी रही टेस्टिंग?
यह निहत्था मिनटमैन III ICBM कैलिफोर्निया के सांता बारबरा के पास स्थित वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से लॉन्च किया गया। मिसाइल में लगे दो रीएंट्री व्हीकल्स ने हजारों मील की दूरी तय की और मार्शल आईलैंड्स के क्वाजालीन एटोल में तय टारगेट तक पहुंचे। यानी कि सब कुछ पहले से तय योजना के हिसाब से सफलतापूर्वक हुआ।

दूसरे विश्व युद्ध के बाद शुरू हुई मिनटमैन सीरीज
मिनटमैन हथियार प्रणाली की परिकल्पना पहली बार दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1950 के दशक में की गई थी। इसके बाद से यह सिस्टम लगातार विकसित होता रहा है। इस कड़ी की सबसे नई मिसाइलें अमेरिकन एयरफोर्स के ग्लोबल स्ट्राइक कमांड (AFGSC) के तहत चलाई जाने वाले अमेरिकन रेजिस्टेंस फोर्स का हिस्सा हैं।
हिरोशिमा बम से 20 गुना ज्यादा ताकत
रिपोर्ट्स के मुताबिक LGM-30G मिनटमैन III ऐसे न्यूक्लियर हथियार ले जाने में सक्षम है जो हिरोशिमा पर गिराए गए न्यूक्लियर बम से लगभग 20 गुना अधिक शक्तिशाली हो सकते हैं। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक यह मिसाइल अमेरिका की Nuclear Triad का एकमात्र लैंड-बेस्ड एलिमेंट है, जो अमेरिका की न्यूक्लियर रणनीति में बेहद अहम भूमिका निभाता है।
क्या है खासियत?
मिनटमैन III मिसाइल सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसका फास्ट लॉन्च टाइम, यानी कम समय में दागी जा सकती है। साथ ही लगभग 100 प्रतिशत टेस्टिंग क्रेडिबिलिटी है, यानी दागी तो पूरी संभावना है कि टारगेट हिट होगा। इसके अलावा इसमें बैकअप एयरबोर्न लॉन्च कंट्रोलर भी होते हैं, जो जवाबी हमले की क्षमता बनाए रखने में मदद करते हैं। इसकी मारक क्षमता 5,500 किलोमीटर से अधिक है, इसलिए इसे इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल यानी ICBM के रूप में रखा गया है।
इनको रखने का अजीब है स्टाइल
यह मिसाइल मोबाइल नहीं होती बल्कि जमीन के नीचे बने विशेष साइलो में रखी जाती है। अमेरिका के पश्चिमी हिस्सों में अलग-अलग जगहों पर बने इन साइलो में इन्हें स्टोर किया जाता है। इनका मेन मकसद है न्यूक्लियर हमलों को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि अगर अमेरिका पर हमला होता है तो वह तुरंत और प्रभावी जवाब दे सके।
24,000 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा रफ्तार
मिनटमैन III मिसाइल 24,000 किलोमीटर प्रति घंटे यानी लगभग 15,000 मील प्रति घंटे से भी ज्यादा की स्पीड से दागी जा सकती है। इतनी तेज गति के कारण यह दुनिया के लगभग किसी भी हिस्से तक पहुंच सकती है, जिसमें उत्तर कोरिया और ईरान जैसे देश भी शामिल हैं। इसकी 24,000 किलोमीटर की प्रति घंटे की स्पीड इसे मात्र आधे घंटे में ईरान पहुंचा देगी।
13,000 किलोमीटर तक मार करने की क्षमता
यह मिसाइल अधिकतम 13,000 किलोमीटर यानी करीब 8,000 मील तक तीन Mk-12A न्यूक्लियर वॉरहेड ले जा सकती है। इन वॉरहेड्स को अलग-अलग टारगेट्स पर भी भेजा जा सकता है। आसान भाषा में कहें तो एक ही मिसाइल से तीन अलग-अलग ठिकानों को टारगेट किया जा सकता है।
न्यूक्लियर संधि के कारण अब सिर्फ एक वॉरहेड
हालांकि रूस के साथ हुई Arms Reduction Treaty (न्यूक्यिलर हथियारों को कम करने वाली संधि) के कारण अब वर्तमान मिनटमैन III मिसाइलों में केवल एक ही वॉरहेड लगाया जाता है। यह समझौता दोनों देशों के न्यूक्लियर हथियारों की संख्या सीमित रखने के लिए किया गया था।
मिसाइल के नाम का मतलब क्या है
अमेरिकी वायु सेना के मुताबिक मिसाइल के नाम में शामिल अक्षरों का भी खास मतलब होता है। इसमें "L" का अर्थ साइलो-लॉन्च, "G" का मतलब सतह पर हमला करने वाली मिसाइल और "M" का अर्थ गाइडेड मिसाइल होता है। वहीं "30" मिनटमैन मिसाइल श्रृंखला को दर्शाता है और उसके बाद का "G" मौजूदा मिनटमैन III मॉडल की पहचान कराता है।
अमेरिका के पास 400 मिनटमैन III मिसाइलें
वर्तमान में अमेरिकी ICBM बल में कुल 400 मिनटमैन III मिसाइलें शामिल हैं। ये मिसाइलें मोंटाना में स्थित 341वीं मिसाइल विंग, व्योमिंग में 90वीं मिसाइल विंग और नॉर्थ डकोटा में 91वीं मिसाइल विंग में तैनात हैं।
कई सरकारी एजेंसियों ने मिलकर किया ऑपरेशन
इस मिसाइल परीक्षण की तैयारी में कई सरकारी एजेंसियों और साझेदार संस्थानों ने मिलकर काम किया। नॉर्थ डकोटा के मिनोत एयर फोर्स बेस में तैनात 91वीं मिसाइल विंग के एयरमैन ने इस मिशन के दौरान सीधे हवाई समर्थन दिया, जिससे पूरा ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा हो सका।
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