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America Iran War: Khamenei की फौज ने कर दी Trump की फील्डिंग सेट, निशाने पर Los Angeles और New York?

America Iran War: अमेरिका, इजरायल और ईरान के में चल रहे युद्ध के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिससे अमेरिका के अधिकारियों के हाथ-पांव फूलने लगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान की फौज ने एक ऐसा पैंतरा शुरू किया है जिससे इस जंग की दिशा बदल सकती है और अमेरिका में बड़ा हमला हो सकता है। दरअसल Ali Khamenei की मौत के बाद ईरान के कमांडरों ने विदेशों में मौजूद गुप्त एजेंटों को एक्टिव करने के लिए एक कोड बेस्ड मैसेज भेजा हो सकता है। बताया जा रहा है कि इस मैसेज को United States की खुफिया एजेंसियों ने इंटरसेप्ट किया है। जानते हैं क्या है ये मैसेज और अमेरिका के लिए यह कितना बड़ा खतरा है।

अली खामेनेई की मौत के बाद भेजा गया मैसेज!

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, यह कोड बेस्ड मैसेज उस समय भेजा गया जब Ali Khamenei की 28 फरवरी को मौत हो गई थी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह मैसेज विदेशों में पहले से मौजूद ईरानी गुप्त एजेंटों को एक्टिव करने के लिए भेजा गया हो सकता है। इस जानकारी के सामने आने के बाद संभावित जवाबी कार्रवाई और जंग बढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं।

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अमेरिकी एजेंसियों ने इंटरसेप्ट किया मैसेज

अमेरिकी मीडिया संस्था ABC News की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने एक एन्क्रिप्टेड मैसेज को इंटरसेप्ट किया है। माना जा रहा है कि यह मैसेज विदेशों में मौजूद ईरानी स्लीपर सेल्स को एक्टिव करने के लिए भेजा गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, यह कोडेड ट्रांसमिशन खामेनेई की मौत के तुरंत बाद भेजा गया था। इसे एक तरह का ऑपरेशनल ट्रिगर माना जा रहा है, जिसका मकसद पहले से तैनात एजेंटों को सक्रिय करना हो सकता है।

स्लीपर सैल्स को ईरान ने क्या मैसेज दिया?

अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इस मैसेज में विदेशों में मौजूद स्लीपर सैल्स को निर्देश दिए गए हो सकते हैं। इस बारे में एक फेडरल सुरक्षा अलर्ट भी जारी किया गया है। इस अलर्ट में चेतावनी दी गई है कि यह मैसेज ईरान के बाहर पहले से तैनात स्लीपर एजेंटों को एक्टिव करने या उन्हें निर्देश देने के लिए हो सकता है। इस तरह के मैसेज आमतौर पर गुप्त नेटवर्क के जरिए भेजे जाते हैं ताकि उनकी पहचान करना मुश्किल हो।

एन्क्रिप्टेड मैसेज और गुप्त रिसीवर

रिपोर्ट के मुताबिक, यह मैसेज पूरी तरह एन्क्रिप्टेड था और इसे सिर्फ उन लोगों के लिए डिजाइन किया गया था जिनके पास सही एन्क्रिप्शन Key है। इस तरह के ट्रांसमिशन का इस्तेमाल अक्सर गुप्त एजेंटों या स्लीपर सेल को निर्देश देने के लिए किया जाता है। खास बात यह है कि इसमें इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क जैसे सामान्य कम्युनिकेशन का इस्तेमाल नहीं किया जाता। इससे इन मैसेजों को ट्रैक करना और भी मुश्किल हो जाता है।

कई देशों में पहुंचा रेडियो सिग्नल

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने एक ऐसे ब्रॉडकास्ट स्टेशन की भी पहचान की है जो कई देशों में बार-बार यह मैसेज भेज रहा था। एक मेमो में कहा गया कि फिलहाल इन मैसेजों की सटीक जनकारी का पता नहीं चल पाया है, लेकिन अचानक एक नए स्टेशन का सामने आना और उसका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रीब्रोडकास्ट होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है। इस वजह से एजेंसियों को हाई लेवल पर अलर्ट किया गया है।

खतरे की पुष्टि नहीं लेकिन राहत भी नहीं

हालांकि अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल किसी विशेष स्थान से जुड़े सीधे ऑपरेशनल खतरे की पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को असामान्य रेडियो-फ्रीक्वेंसी संकेतों पर नजर रखने और निगरानी बढ़ाने की सलाह दी गई है। लेकिन, अमेरिकियों के लिए राहत भी नहीं कही सकती।

FBI के पूर्व अधिकारी की चेतावनी

Federal Bureau of Investigation (FBI) के पूर्व सहायक निदेशक Chris Swecker ने Fox News से बातचीत में कहा कि मौजूदा हालात बेहद गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने कहा, अगर कभी हिजबुल्ला या Hamas का कोई सेल अमेरिका के भीतर हिंसक कार्रवाई करने वाला है, तो वह समय अभी हो सकता है।

FBI निदेशक ने बढ़ाई सुरक्षा

28 फरवरी को ईरानी ठिकानों पर अमेरिकी हमलों के बाद FBI निदेशक Kash Patel ने हाई लेवल सिक्योरिटी प्रोटोकॉल लागू कर कर दिए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि आतंकवाद-रोधी और खुफिया टीमों को हाई अलर्ट पर रहने का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही सभी जरूरी सुरक्षा संसाधनों को एक्टिव करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

ट्रंप ने भी जताई जवाबी हमलों की आशंका

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी संभावित जवाबी हमलों को लेकर चिंता जताई थी। जब उनसे अमेरिकी जमीन पर हमलों की संभावना के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि सरकार हर समय ऐसे खतरों के बारे में सोचती और तैयारी करती रहती है। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध के दौरान नुकसान और मौतों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

अमेरिका के बड़े शहरों में सिक्योरिटी टाइट

संभावित खतरे को देखते हुए अमेरिका के कई बड़े शहरों जैसे- Los Angeles, Miami और New York City में प्रशासन ने संवेदनशील स्थानों के आसपास गश्त और निगरानी बढ़ाने की घोषणा की है। इनमें पूजा स्थल, स्कूल और सांस्कृतिक केंद्र जैसे स्थान शामिल हैं, जिन्हें संभावित हमलों का टारगेट माना जाता है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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