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बांग्लादेश, म्यांमार और भारत.. तीन देशों को काटकर नया ईसाई देश बनाने की साजिश? शेख हसीना क्यों कह रहीं ऐसा?

US In Bangladesh: क्या अमेरिका, ब्रिटेन के साथ साथ कुछ और पश्चिमी देश मिलकर बांग्लादेश, म्यांमार और यहां तक की भारत के भी कुछ हिस्सों को मिलाकर एक नया ईसाई राज्य बनाने की साजिश रच रहे हैं?

क्या अपने इस कुख्यात एजेंडे के लिए उन्होंने गुप्त तरीके से कुकी-चिन नेशनल फ्रंट (KNF) और यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (ULFA) के सरगना परेश बरुआ सहित कई क्षेत्रीय उग्रवादी समूहों से हाथ मिला लिया है?

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ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कुछ इसी तरह के संकेत दिए हैं और उन्होंने इसका खुलासा उस वक्त किया है, जब उन्होंने 14-पार्टी गठबंधन के नेताओं से कहा, कि बांग्लादेश और म्यांमार से कुछ हिस्से लेकर "पूर्वी तिमोर जैसा एक ईसाई राज्य" बनाने की साजिश चल रही है। हालांकि, उन्होंने भारत का नाम लेने से परहेज किया।

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री ने यह भी कहा, कि एक श्वेत व्यक्ति ने बांग्लादेश में 7 जनवरी को हुए चुनाव में बिना किसी पश्चिमी देश की परेशानी के उन्हें जीतने में मदद करने की पेशकश की थी, और इसके लिए शर्त ये थी, कि इसके बदले उन्हें एक 'विदेशी देश को बांग्लादेश में हवाई अड्डा स्थापित करने की इजाजत देना होगा।' हालांकि, शेख हसीना ने उस 'श्वेत व्यक्ति और उसकी नागरिकता' का खुलासा नहीं किया।

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क्या ईसाई देश बनाना चाहता है अमेरिका?

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दावा किया, कि प्राचीन काल से ही खाड़ी और हिंद महासागर के रास्ते व्यापारिक गतिविधियां होती रही हैं। उन्होंने कहा, कि "कई लोगों की नजर इस जगह पर है। यहां कोई विवाद नहीं, कोई टकराव नहीं है। और मैं ऐसा होने भी नहीं दूंगी और ऐसा होने देना, मेरी नजर में एक अपराध है।"

वहीं, एयरबेस बनाने के प्रस्ताव तको लेकर बांग्लादेशी प्रधानमंत्री ने कहा, कि "यह प्रस्ताव एक श्वेत व्यक्ति की तरफ से आया था। ऐसा लग सकता है, कि इसका लक्ष्य सिर्फ एक ही देश है, लेकिन ऐसा नहीं है। मैं जानती हूं, कि वे और कहां जाने का इरादा रखते हैं। हां, आगे अभी और परेशानी हो सकती है, लेकिन चिंता करने की जरूरत नहीं है।"

उन्होंने दावा किया, कि "अगर मैं किसी देश को बांग्लादेश में एयरबेस बनाने की इजाजत देती हूं, तो फिर मुझे कोई दिक्कत नहीं होगी।"

हालांकि, बांग्लादेश की प्रधान मंत्री ने उस देश का नाम नहीं बताया, जो बांग्लादेश में एयरबेस स्थापित करना चाहता है, लेकिन यह माना जा रहा है, कि उस देश का नाम अमेरिका है।

किस द्वीप पर है अमेरिका की नजर?

कई वर्षों से वाशिंगटन की नजर सेंट मार्टिन द्वीप पर है, जो बंगाल की खाड़ी के उत्तरपूर्वी भाग में एक छोटा सा द्वीप (क्षेत्रफल केवल 3 किलोमीटर) है, जो कॉक्स बाजार-टेकनाफ प्रायद्वीप के सिरे से लगभग 9 किमी दक्षिण में स्थित है। ये इलाका बांग्लादेश का सबसे दक्षिणी भाग का हिस्सा है।

बांग्लादेश में अमेरिका पर उठते सवाल

इससे पहले जून 2023 में, ढाका में एक अफवाह फैली थी, कि वाशिंगटन सत्तारूढ़ अवामी लीग सरकार का समर्थन करने बदले में सेंट मार्टिन द्वीप की मांग कर रहा है। लेकिन, बाद में, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने जोर देकर कहा, कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने सेंट मार्टिन द्वीप पर नियंत्रण लेने के संबंध में कभी भी किसी चर्चा में भाग नहीं लिया है और ऐसा करने का उसका कोई इरादा नहीं है।

14 जून 2023 को बांग्लादेशी संसद में एक बहस के दौरान बांग्लादेश की वर्कर्स पार्टी के अध्यक्ष राशेद खान मेनन ने आरोप लगाया, कि संयुक्त राज्य अमेरिका सेंट मार्टिन द्वीप के पीछे पड़ा है और नई अमेरिकी वीज़ा नीति "शासन परिवर्तन" की रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा, कि "अमेरिका सेंट मार्टिन द्वीप चाहता है, और वे भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देशों के गठबंधन QUAD में बांग्लादेश को चाहते हैं।"

उन्होंने आरोप लगाया, कि "वे मौजूदा सरकार को अस्थिर करने के लिए सब कुछ कर रहे हैं।"

19 जून 2023 को जातीय समाजतांत्रिक दल के अध्यक्ष हसनुल हक इनु ने भी चिंता जताते हुए सवाल उठाया, कि क्या अमेरिका लोकतंत्र की खातिर या सेंट मार्टिन द्वीप पर नियंत्रण के लिए बांग्लादेश के मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है?

इनु ने कहा था, कि "यह हमें लेकर 'अमेरिका के अति-उत्साह' के पीछे की वजह के बारे में सोचने की बात है, कि क्या वो बांग्लादेशी लोकतंत्र के बारे में बार बार सवाल इसलिए उठा रहा है, कि उसे सेंट मार्टिन द्वीप मिल जाए?

उन्होंने आरोप लगाया, कि "बांग्लादेश को लेकर अमेरिका अचानक अति उत्साहित हो गया है। वे वास्तव में बांग्लादेश पर वर्चस्व बनाकर भारत को परेशान करना चाहते हैं।"

मार्टिन द्वीप को लेकर अमेरिका पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं और साल 2003 में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत मैरी एन पीटर्स ने मीडिया की उन अटकलों को खारिज कर दिया था, कि वाशिंगटन अपनी सेना को सुदूर और मध्य पूर्व के बीच कहीं तैनात करने के लिए ढाका से एक सैन्य अड्डा पट्टे पर लेने के लिए बेताब है।

बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज (बीआईआईएसएस) में एशिया: ए यूएस पर्सपेक्टिव' नाम से आयोजित एक सेमिनार में 2 जुलाई 2003 को 'दक्षिण की सुरक्षा' विषय पर एक सेमिनार को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था, कि "संयुक्त राज्य अमेरिका की सेंट मार्टिन द्वीप, चटगांव या बांग्लादेश में कहीं भी सैन्य अड्डे बनाने की कोई योजना, कोई आवश्यकता और कोई इच्छा नहीं है।"

अमेरिका की लालच के पीछे की वजह क्या है?

अमेरिका भले ही बार बार इनकार करता रहे और अमेरिका अधिकार भले ही बार बार ऐसी रिपोर्ट्स को खारिज करते रहें, लेकिन ये कोई रहस्य नहीं है, कि वाशिंगटन बांग्लादेश में एक नौसैनिक या हवाई अड्डा स्थापित करना चाहता है।

इस बीच, पिछले कई वर्षों से, ईसाई मिशनरी, साथ ही पश्चिमी गैर सरकारी संगठन, बांग्लादेश, भारत और म्यांमार के सीमावर्ती क्षेत्रों, जैसे टेकनाफ, खगराचारी, रंगमती, मिजोरम, मेघालय, अराकान प्रांत जैसे क्षेत्रों में गुप्त तरीके से काम कर रहे हैं और उनकी मानसिकता साफ है। आरोप है, कि वो इस क्षेत्र में भारी संख्या में धर्म परिवर्तन करवा रहे हैं। इसके लिए वो पैसों का सहारा ले रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारी संख्या में हिंदू, मुसलमान और बौद्ध समुदाय के लोगों ने अपने अपने धर्म को छोड़कर ईसाई धर्म अपना लिया है।

और इसी को लेकर आरोप लग रहे हैं, कि अमेरिका.. बांग्लादेश, भारत और म्यांमार की भूमि को मिलाकर एक ईसाई राज्य के निर्माण के लिए जमीन तैयार कर रहा है।

ईसाई मिशनरी प्रकाशन इन क्षेत्रों में "ईसाई उत्पीड़न" के झूठे दावों के साथ प्रोपेगेंडा फैलाते रहते हैं, जबकि असली अत्याचार दूसरे धर्म वालों पर किए जाते हैं। वे यह कहकर बांग्लादेश, भारत और म्यांमार की जनजातीय आबादी को जोड़ने की कोशिश करते हैं, कि "चिन-कुकी-मिज़ो एक मंगोल लोग हैं। ये धारणा काफी तेजी से फैलाई जा रही है।

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किन क्षेत्रों में चल रहा है धर्म परिवर्तन का खेल?

करीब 10 लाख से ज्यादा चिन जनजाति के लोग म्यांमार में रहते हैं, वहीं 10 लाख से ज्यादा मिजो लोगों की आबाजी मिजोरम में रहती है। पांच लाख कुकी मणिपुर में रहते हैं, और हजारों कुकी बांग्लादेश में रहते हैं। इसके अलावा, म्यांमार सेना और चिन लोगों के बीच चल रही लड़ाई की वजह से, कम से कम 80 हजार चिन देश छोड़कर अमेरिका भाग गये हैं।

ईसाई मिशनरियों के इस नैरेटिव का विरोध करते हुए कुछ विश्लेषकों का कहना है, कि "ऐतिहासिक रूप से, कुकी एनिमिज्म (विभिन्न देवताओं और आत्माओं की पूजा) और हेडहंटिंग (एक इंसान का शिकार करना और पीड़ितों की हत्या के बाद कटे हुए सिर को इकट्ठा करना, कभी-कभी अधिक पोर्टेबल शरीर के अंगों को इकट्ठा करना) के लिए जाने जाते हैं। आजकल वे मसीहाई यहूदी धर्म का पालन करते हैं।

जैसे बेनी मेनाशे, चिन कुकी ज़ो से बने हैं जिनके पूर्वज उत्तर-पूर्व में चले गए थे, वहीं मणिपुर में रहने वाली इनकी ज्यादातर आबादी म्यांमार से आकर बसी है।

मणिपुर में रहने वाले कई कुकी भी इजराइल लौटने की मांग कर रहे हैं।

पी.एस. हाओकिप, जो बर्मी/म्यांमार मूल के हैं और केएनए (कुकी नेशनल आर्मी) और अन्य विद्रोही समूहों के अध्यक्ष भी हैं, उनका दावा है, कि कुकी इज़राइल की खोई हुई जनजाति हैं, जबकि उन्होंने पूर्वोत्तर भारत में बेनी मेनाशे को मान्यता देने के लिए इजराइल के प्रधान मंत्री को खत भी लिखा है।

हाओकिप ने कहा, कि कुकी भारतीय नहीं हैं और वो सिर्फ भारत में आकर बसे हैं। और उनका असली स्थान इजराइल है और उन्होंने खुद को इजराइल की खोई हुई जनजाति यहूदी होने का दावा किया है।

वहीं, जुलाई 2023 में हिंदू पोस्ट ने एक रिपोर्ट में कहा है, कि "ईसाई राष्ट्रवादी एमएनएफ सरकार भारत, म्यांमार और बांग्लादेश में रहने वाले मिज़ो-कुकी-चिन-ज़ोमी आदिवासियों के एकीकरण के माध्यम से 'होमलैंड' बनाने की मांग करती रहती है।

बांग्लादेश के अधिकारियों ने कहा है, कि कुकी-चिन नेशनल फ्रंट और भारत और म्यांमार के अन्य समूहों की गतिविधियों के बीच बाहरी संबंध हैं। केएनएफ कथित तौर पर क्षेत्र में एक अलग पूर्वी राज्य स्थापित करने की लंबे समय से चली आ रही योजना में शामिल है।

इस बीच, ईसाई राज्य की स्थापना के अपने वास्तविक एजेंडे को छिपाने के लिए, केएनएफ के नेताओं ने जमात उल अंसार फिल हिंद अल शरकिया (JAFHS) नामक इस्लामी आतंकवादी संगठन से हाथ मिला लिया है, जबकि मीडिया को बताया गया कि JAFHS, केएनएफ के सैन्य समर्थन के साथ है। चटगांव हिल ट्रैक्ट क्षेत्रों के भीतर 'खिलाफत गांव' स्थापित करने की कोशिश भी की जा रही है।

इस खतरनाक समूह के सरगना जमीनें खरीदना और कृषि फार्मों की आड़ में उग्रवादी गतिविधियों को अंजाम देना चाहते हैं। इसके अलावा, वे स्थानीय निवासियों को धर्म परिवर्तन के लिए लुभाने की भी योजना बना रहे थे। इस मिशन के लिए JAFHS ने तब्लीगी जमात के कई नेताओं के साथ गुप्त संबंध स्थापित किए हैं।

बांग्लादेश के वरिष्ठ पत्रकार सलाह उद्दीन शोएब चौधरी, जो कई अंतर्राष्ट्रीय अवार्ड्स से सम्मानित हैं, उन्होंने कहा है, कि "कुकी-चिन नेशनल फ्रंट और जमात उल अंसार फिल हिंद अल शरकिया के बीच संबंध, पूरी तरह से रणनीतिक हैं, और केएनएफ.. पहाड़ी क्षेत्रों में निशाना बनाकर हमले करने के लिए और आतंकवादी वारदातों को अंजाम देने के लिए आतंकवादी संगठन JAFHS का इस्तेमाल करना चाहता है। बांग्लादेश और भारत के साथ-साथ म्यांमार में अराकान राज्य ने तीन पड़ोसी देशों की भूमि को विघटित करके एक ईसाई राज्य की स्थापना के अपने वास्तविक एजेंडे को सरल बना लिया है।

उनका कहना है, कि अगर एक बार इस तरह की घृणित साजिश साकार हो गई, तो पश्चिमी राष्ट्र, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन, इसे अपने बंदरगाह राज्य के रूप में उपयोग करके अपने नियोजित ईसाई राज्य पर सवार होकर पूरे क्षेत्र तक पहुंच प्राप्त कर लेंगे।

उन्होंने कहा, कि "निश्चित तौर पर ये बांग्लादेश, म्यांमार और भारत की नेशनल सिक्योरिटी के लिए खतरा होगा और इस साजिश को रोकने के लिए इन तीनों देशों को एक साथ काम करना होगा।

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