इराक और सीरिया में ईरान के ठिकानों पर अमेरिका ने बरसाए बम... क्या पश्चिम एशिया में छिड़ने वाली है नई जंग?
What did US bomb in Iraq Syria: जॉर्डन में ड्रोन हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने के करीब एक हफ्ते बाद, संयुक्त राज्य अमेरिका ने इराक और सीरिया में ईरान समर्थक मिलिशिया के 85 ठिकानों पर एक साथ बमबारी की है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) कुद्स फोर्स और सहयोगी मिलिशिया समूहों को निशाना बनाया गया है।
अमेरिका के बी-1 बमवर्षकों विमानों ने हमला करने के लिए शुक्रवार रात अमेरिका से उड़ान भरी थी और फिर इराक और सीरिया में सात स्थानों पर 85 ठिकानों को निशाना बनाया गया है। पूरी आशंका थी, कि अमेरिका निश्चित तौर पर हमले करने वाला है और ऐसा हुआ भी।

लेकिन, ईरान से संबंधित समूहों पर हमला करने के बाद अब सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या गाजा पट्टी का ये संघर्ष अब पश्चिम एशिया में फैलने वाला है? क्या अमेरिका और ईरान के बीच का ये संघर्ष कई और देशों को अपनी जद में लेने वाला है?
हालांकि, अमेरिका ने सीधे तौर पर ईरान पर हमले नहीं किए हैं, लेकिन ईरान ने चेतावनी दी है, कि अगर उसके खिलाफ हमले किए गये, तो अंजाम बुरे होंगे। तो फिर मिडिल ईस्ट में आगे क्या होने वाला है, आइये समझने की कोशिश करते हैं।
अमेरिका ने इराक और सीरिया में बम गिराए
यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के एक बयान के अनुसार, 30 मिनट तक चलने वाले हवाई हमले रात में किए गये हैं, जिनमें 18 लोगों की मौत हो गई है।
इराक और सीरिया की साइटें, कथित तौर पर ईरान समर्थित मिलिशिया से जुड़ी हुई थीं, जिन्हें अमेरिका ने उत्तर-पूर्वी जॉर्डन में एक अमेरिकी बेस टॉवर 22 पर ड्रोन हमले के लिए जिम्मेदार ठहराया था, जिसमें तीन अमेरिकी सेवा सदस्यों की मौत हो गई थी और 40 से ज्यादा अन्य लोग घायल हो गए थे।
अमेरिकी सेना ने 85 से अधिक लक्ष्यों पर हमला करने के लिए बी-1 "लंबी दूरी के बमवर्षक" सहित कई विमानों का इस्तेमाल किया है, जिनमें कमांड और नियंत्रण मुख्यालय, खुफिया केंद्र, रॉकेट और मिसाइल, ड्रोन और गोला-बारूद भंडारण स्थल और इससे जुड़ी अन्य सुविधाएं शामिल थीं। रिपोर्ट्स में कहा गया है, कि अमेरिकी हमले में इन समूहों के हथियार भंडार को काफी नुकसान हुआ है।
सीएनएन के अनुसार, अमेरिकी सेना ने सीरिया के साथ देश की सीमा पर अनबर प्रांत के पश्चिमी हिस्से में स्थित इराक के अल-क़ैम शहर में अल हशेद अल शबी, जिसे पॉपुलर मोबिलाइज़ेशन यूनिट्स (पीएमयू) के रूप में भी जाना जाता है, उसे निशाना बनाया है।
इराकी सेना के प्रवक्ता याह्या रसूल ने अल-क़ैम और इराक-सीरिया सीमा से लगे इलाकों में हमलों की पुष्टि की। वहीं, इराक सरकार ने अमेरिकी हमलों की निंदा करते हुए, कहा, कि वे "इराकी संप्रभुता का उल्लंघन करते हैं और इससे एक खतरा पैदा होता है, जो इराक और क्षेत्र को अवांछनीय परिणामों की ओर ले जाएगा।"
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, अल-क़ैम के मेयर तुर्की अल-महालवी के अनुसार, अमेरिका ने कथित तौर पर पीएमयू द्वारा हथियार गोदामों के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले तीन घरों पर बमबारी की है।
यूनाइटेड किंगडम स्थित सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के अनुसार, सीरिया में हमलों में 18 आतंकवादी मारे गए हैं, जहां कथित तौर पर चार सुविधाओं को निशाना बनाया गया है।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा कि ऑपरेशन "सफल" रहा, हालांकि अमेरिका को हताहतों या घायलों की संख्या का पता नहीं है।
अमेरिकी हमले पर ईरान ने क्या कहा?
ईरान ने पहले टावर 22 हमले में किसी भी भूमिका से इनकार किया था।
शुक्रवार को, ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी ने कहा, कि उनका देश युद्ध शुरू नहीं करेगा, लेकिन धमकाने वालों को "कड़ी प्रतिक्रिया" देगा।
उन्होंने कहा, कि "हमने कई बार कहा है, कि हम कोई युद्ध शुरू नहीं करेंगे। लेकिन अगर कोई दमनकारी देश या ताकत हमें धमकाना चाहती है, तो इस्लामी गणतंत्र ईरान दृढ़ता से जवाब देगा।"
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को सलाह देने वाले रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कमांडर मेजर जनरल होसैन सलामी ने अमेरिकी हमले से पहले कहा था, कि "कोई भी खतरा अनुत्तरित नहीं छोड़ा जाएगा।"
क्या इससे पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ेगा?
अमेरिका ने कई दिनों से कहा है, कि उसकी प्रतिक्रिया समय के साथ "स्तरीय प्रतिक्रिया" होगी। शुक्रवार के हमलों के बाद, राष्ट्रपति जो बाइडेन ने एक बयान में कहा, कि अमेरिकी सैन्य प्रतिक्रिया "हमारी पसंद के समय और स्थानों पर जारी रहेगी।"
उन्होंने कहा, कि "संयुक्त राज्य अमेरिका मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) या दुनिया में कहीं भी संघर्ष नहीं चाहता है। लेकिन, जो लोग हमें नुकसान पहुंचाना चाहते हैं, वे यह जान लें,यदि आप किसी अमेरिकी को नुकसान पहुंचाते हैं, तो हम जवाब देंगे।"
प्रतिक्रिया में देरी को लेकर रिपब्लिकन ने बाइडेन प्रशासन पर निशाना साधा। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने हमले में देरी होने के पीछे खराब मौसम और लगातार बादल छाए रहने का हवाला दिया था।
विशेषज्ञों का मानना है, कि अमेरिका ने करीब एक हफ्ते लेट से हमला किया है और ईरान के लिए उतने दिनों में अपने लोगों को उन जगहों से हटाने के लिए काफी ज्यादा था।
मध्य पूर्व के पूर्व उप सहायक रक्षा सचिव मिक मुलरॉय ने बीबीसी को बताया, "इससे उन्हें अमेरिकी सेना पर हमला करने के लिए इन ईरानी समर्थित मिलिशिया की क्षमता को कम करने की अनुमति मिलेगी, लेकिन आगे बढ़ने की नहीं।" उन्होंने कहा, कि "हालांकि यह संभवतः भविष्य के हमलों को रोकने में सक्षम नहीं होगा।"
मुलरॉय ने कहा, कि यह संभावना है कि अमेरिका ने ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कर्मियों को "उन सुविधाओं को छोड़ने का मौका दे दिया, जहां से हमला किया गया।"
उनके अनुसार, इसका अंतिम लाभ अमेरिका और ईरान के बीच "सीधे युद्ध से बचना" होगा।
अमेरिका पहले ही कह चुका है, कि वह ईरानी धरती पर किसी लक्ष्य पर हमला नहीं करेगा। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने इसी हफ्ते कहा है कि "हम ईरान के साथ युद्ध नहीं चाहते हैं। हम मध्य पूर्व में व्यापक संघर्ष की उम्मीद नहीं कर रहे हैं।"
लेकिन, जो बाइडेन को इस साल चुनाव में जाना है और रिपब्लिकन पार्टी आक्रामक बयानबाजी कर रही है, लेकिन अमेरिका हरगिज नहीं चाहेगा, कि यूक्रेन और इजराइल युद्ध के बाद अब एक और युद्ध शुरू हो जाए, लिहाजा फिलहाल इस बात की संभावना न्यूनतम है, कि अमेरिका और ईरान सीधी लड़ाई में उलझेंगे, लेकिन सीरिया और इराक में अमेरिका के हमले जारी रह सकते हैं।












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