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America ने दाढ़ी पर लगाया बैन, सिख-मुस्लिम सैनिकों का क्या होगा? 1917 से कर रहे हैं आर्मी का हिस्सा

America: अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ द्वारा दाढ़ी रखने पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने वाले सख्त ग्रूमिंग मानकों पर जोर देने के बाद सिख कोएलिशन ने " चिंता और गुस्सा दोनों एक साथ जताया है। संगठन ने चेतावनी दी कि यह कदम सिखों, रूढ़िवादी यहूदियों और मुसलमानों के लिए धार्मिक छूट को खतरे में डाल सकता है। ये सभी अपने धर्म के हिस्से के रूप में चेहरे पर बाल रखते हैं।

विश्वास और करियर के बीच तकरार

कोएलिशन ने कहा कि इस समय वे "हाई अलर्ट" पर हैं। संगठन का कहना है कि यह नई नीति हजारों ऐसे लोगों को उनके विश्वास और करियर के बीच चुनाव करने के लिए मजबूर कर सकती है जो धार्मिक मान्यताओं को अहमियत देते हैं। एक सिख सैनिक ने ट्वीट किया-"मेरे केश मेरी पहचान हैं। अमेरिका के लिए सालों की लड़ाई के बाद यह विश्वासघात जैसा महसूस हो रहा है।"

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हेगसेथ का भाषण और विवादित टिप्पणियां

30 सितंबर को हेगसेथ ने मरीन कॉर्प्स बेस क्वांटिको में 800 से अधिक सैन्य नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि दाढ़ी जैसी "अभिव्यक्ति" को खत्म करना जरूरी है। उन्होंने "घातकता" और अनुशासन बहाल करने जैसी बातें भी कहीं, जिससे कई लोगों की भावनाओं को धक्का लगा। भाषण के कुछ ही घंटों बाद पेंटागन ने सभी शाखाओं को आदेश दिया कि वे चेहरे के बालों के लिए "2010 से पहले के मानकों" पर लौटें और छूट को सामान्यतः अधिकृत न करें।

गाइडलाइन में क्या है?

"चेहरे के बालों के लिए ग्रूमिंग गाइडलाइन्स" नामक दस्तावेज़ में कहा गया है कि 60 दिनों में योजनाएं और 90 दिनों में उन्हें पूरी तरह से लागू हो जाना चाहिए। केवल स्पेशल ऑपरेशन्स बलों के लिए सीमित अपवाद दिए गए हैं, लेकिन उन्हें भी तैनाती से पहले दाढ़ी कटवानी होगी। हेगसेथ, जो पूर्व सेना नेशनल गार्ड अधिकारी रह चुके हैं, ने अपने भाषण में "बियर्डोस" और "मोटे जनरलों" का मजाक भी उड़ाया।

पुराने मानकों की वापसी

"2010 से पहले के मानक" स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं हैं, लेकिन ये 1990 के दशक के अंत और 2000 के दशक की शुरुआत की नीतियों पर आधारित बताए जाते हैं। उन नीतियों में आम तौर पर दाढ़ी पर प्रतिबंध था, सिवाय दुर्लभ चिकित्सा या धार्मिक छूट के। इन नियमों में गैस मास्क की सील और एकरूपता के लिए "साफ-सुथरे और व्यवस्थित" रूप पर जोर दिया गया था।

सिख ही नहीं, यहूदी और मुस्लिम भी भड़के

सिर्फ सिख ही नहीं, बल्कि रूढ़िवादी यहूदियों और मुसलमानों से भी आलोचनाएं सामने आई हैं। उनका कहना है कि नई नीति उनकी धार्मिक स्वतंत्रता का हनन कर सकती है।

अमेरिकी सेना में सिखों का लंबा इतिहास

सिखों ने प्रथम विश्व युद्ध से ही अमेरिकी सेना में सेवा की है। 1917 में भगत सिंह थिंड अमेरिकी सेना में शामिल होने वाले पहले ज्ञात सिख बने थे। उन्हें सक्रिय ड्यूटी पर पगड़ी पहनने की अनुमति मिली थी, लेकिन यह व्यक्तिगत अपवाद था, न कि औपचारिक नीति।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला और कड़े नियम

1981 में गोल्डमैन बनाम वेनबर्गर मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सेना ने सख्त ग्रूमिंग नियम लागू किए। इन नियमों ने सिखों के लिए पगड़ी और दाढ़ी जैसे धार्मिक लेखों पर प्रभावी रूप से प्रतिबंध लगा दिया। केवल कुछ खास मामलों में ही उन्हें छूट मिल पाती थी।

धार्मिक छूट और बड़ा बदलाव

2010 में एक अहम मोड़ आया, जब सेना ने दो सिख अधिकारियों-कैप्टन सिमरन प्रीत सिंह लांबा और मेजर डॉ. कमलजीत सिंह कालसी-को औपचारिक धार्मिक छूट दी। यह दो दशकों में पहली बार हुआ। इन छूटों ने उन्हें पगड़ी पहनने, दाढ़ी रखने और बाल न कटवाने की अनुमति दी, जिससे 1993 के Religious Freedom Restoration Act (RFRA) के तहत एक नई मिसाल कायम हुई।

2017 में औपचारिक मान्यता

जनवरी 2017 में सेना ने डायरेक्टिव 2017-03 के जरिए इन छूटों को औपचारिक रूप दिया। इस नीतिगत बदलाव में कहा गया कि पगड़ी, दाढ़ी और अन्य धार्मिक वस्तुओं के लिए अनुरोधों को मंजूरी देने के पक्ष में "एक मजबूत धारणा" होगी। इसने सुनिश्चित किया कि सिख सैनिक अपनी धार्मिक पहचान बनाए रखते हुए सेवा कर सकें।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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