Air India bomb threats: कनाडा से जारी विवाद के बीच विमानों को बम से उड़ाने की धमकी, ये कितना खतरनाक है?

Air India bomb threats: पिछले एक हफ्ते से भारतीय अखबारों और टीवी चैनलों पर बार बार एक ब्रेकिंग न्यूज आ रही है, और वो है, विमानों में बम धमाके की धमकी। और ऐसे ब्रेकिंग न्यूज ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है, और विमान इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारी और सुरक्षा एजेंसियां ऐसे खतरों की तह तक पहुंचने और सुरक्षा तय करने के लिए भागमभाग कर रहे हैं।

भारतीय विमानों को मिल रही धमकियों से कम से कम पांच देश परेशान हुए हैं और इन देशों के अधिकारियों को भी भारतीय एजेंसियों के साथ संघर्ष करना पड़ रहा है। भारत की प्रमुख एयरलाइन, एयर इंडिया, सोमवार से एक दर्जन से ज्यादा धमकियों को झेल चुका है और इसके अलावा, स्थानीय निजी एयरलाइनों को भी धमकियां दी गई हैं।

Air India bomb threats

अभी तक ये तमाम धमकियां झूठी साबित हुई हैं। लेकिन, विमानों को बम से उड़ाने की ये धमकियां उस वक्त आ रही हैं, जब भारत और कनाडा के बीच देश में खालिस्तानी अलगाववादियों की लंबे समय से मौजूदगी को लेकर बढ़ते तनाव काफी बढ़ गया है।

लिहाजा ये काफी घातक साबित हो सकता है, क्योंकि खालिस्तानी अलगाववादियों का भारत और कनाडा को लेकर एक घातक इतिहास है, जो अब तक दर्ज की गई सबसे खराब विमानन आपदाओं में से एक से जुड़ा है।

आइये जानने की कोशिश करते हैं, कि भारत और कनाडा के बीच झगड़े के दौरान लगातार मिल रही धमकियां कितनी खतरनाक साबित हो सकती हैं?

किस तरह की बम की धमकियां मिल रही हैं?

तीन दिनों के भीतर देश में विमानों के खिलाफ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए कम से कम 19 बम धमकियां जारी की गई हैं, जिनमें एयर इंडिया की उड़ानें और तीन निजी वाहक शामिल हैं।

बम विस्फोट की धमकियां यूं तो दुनिया में कई देशों को दी जाती हैं, लेकिन इस वक्त सिर्फ एक देश को निसाना बनाना काफी असामान्य और घातक हैं।

सोमवार को, अधिकारियों ने खुलासा किया कि बम विस्फोट की धमकियों के बाद तीन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को डायवर्ट किया गया या देरी से भेजा गया, जिसमें नई दिल्ली से शिकागो जाने वाली एयर इंडिया की उड़ान भी शामिल थी, जिसे कनाडा के एक हवाई अड्डे पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा। बुधवार को, कनाडाई अधिकारियों ने 200 से ज्यादा यात्रियों को शिकागो ले जाने के लिए वायु सेना के विमान को तैनात किया था।

मंगलवार को धमकियों की एक और श्रृंखला आई, जिसमें दक्षिण भारत के मदुरै से सिंगापुर जाने वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ान को निशाना बनाना भी शामिल था। अधिकारियों ने कहा, कि दक्षिण पूर्व एशियाई देश की वायु सेना ने विमान को चांगी हवाई अड्डे पर कम आबादी वाले खाड़ी तक ले जाने के लिए दो F-15SG लड़ाकू जेट विमानों को साथ में उड़ाया।

बुधवार को भी कई धमकियां दर्ज की गईं, जिनमें मुंबई से सिंगापुर, मुंबई से नई दिल्ली और रियाद से मुंबई जाने वाली निजी एयरलाइन कंपनी इंडिगो की फ्लाइट्स को निशाना बनाया गया। स्पाइसजेट की दो उड़ानें और एक अन्य अकासा उड़ान भी प्रभावित हुई।

एयर इंडिया ने सोमवार को कहा है, कि उसे हाल के दिनों में कई धमकियां मिली हैं। भारतीय अधिकारियों का यह भी कहना है, कि वे इन घटनाओं की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है, कि कुछ धमकियों के सिलसिले में कम से कम एक नाबालिग को गिरफ्तार किया गया है। बुधवार को भारत के उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने एक्स पर एक बयान में धमकियों की निंदा की। उन्होंने कहा, कि "मैं हाल ही में भारतीय एयरलाइनों को निशाना बनाकर की गई विध्वंसकारी गतिविधियों से बहुत चिंतित हूँ, जिससे घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय ऑपरेशंस प्रभावित हो रहे हैं। इस तरह की शरारती और गैरकानूनी हरकतें गंभीर चिंता का विषय हैं, और मैं हमारे विमानन क्षेत्र की सुरक्षा, सिक्योरिटी एंड ऑपरेशंस से समझौता करने के किसी भी प्रयास की कड़ी निंदा करता हूं।"

Air India bomb threats

धमकियों को गंभीरता से लेने की क्यों है जरूरत?

23 जून 1985 को, लंदन के रास्ते कनाडा से भारत जा रहा एयर इंडिया के एक विमान में आयरिश तट के पास धमाका हुआ था, जिससे उसमें सवार सभी 329 लोग मारे गए थे। विमान में 307 यात्री थे, जिनमें से ज्यादातर भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक थे और 22 चालक दल के सदस्य थे।

यह संयुक्त राज्य अमेरिका पर 9/11 के हमलों से पहले दुनिया की सबसे खराब विमानन आपदा थी। यह कनाडा की अब तक की सबसे खराब हवाई दुर्घटना बनी हुई है। उसी दिन, टोक्यो हवाई अड्डे पर एक और बम विस्फोट हुआ, जिसमें दो जापानी बैगेज हैंडलर मारे गए।

माना जाता है कि बम में समय से पहले विस्फोट हो गया था, अन्यथा एक और विमान में धमाका करने की साजिश रची गई थी। जांचकर्ताओं ने खालिस्तानी अलगाववादियों को दोषी ठहराया, जिनके बारे में माना जाता था, कि वे एक साल पहले पंजाब में स्वर्ण मंदिर पर भारतीय सेना के घातक हमले का बदला लेना चाहते थे।

उस वक्त खालिस्तानियों की वजह से पंजाब प्रांत काफी अशांत था। हालांकि, अब खालिस्तान आंदोलन भारत में काफी हद तक खत्म हो चुका है, लेकिन कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में सिख समुदाय के कुछ वर्गों के बीच इसे अभी भी मजबूत समर्थन हासिल है।

हालांकि 1985 के बम विस्फोटों के लिए कई लोगों पर आरोप लगाए गए थे, लेकिन सिर्फ एक को दोषी ठहराया गया, और वो था ब्रिटिश कनाडाई इलेक्ट्रीशियन इंद्रजीत सिंह रेयात, जिसने 1991 से 2016 के बीच कनाडा और यूके में सजा काटी।

अब वो रिहा हो चुका है।

तलविंदर सिंह परमार, एक और कनाडाई अलगाववादी नेता, पर रेयात के साथ मुकदमा चलाया गया था, लेकिन बाद में रिहा कर दिया गया क्योंकि अभियोजन पक्ष अपना मामला साबित नहीं कर सका।

कनाडाई पुलिस ने 2000 में वैंकूवर के व्यवसायी रिपुदमन सिंह मलिक और ब्रिटिश कोलंबिया के मिल मजदूर अजायब सिंह बागरी को भी सामूहिक हत्या और साजिश के आरोपों में गिरफ्तार किया था। लेकिन, बाद में दोनों को रिहा कर दिया गया। पीड़ितों के परिवारों ने लंबे समय से कनाडाई अधिकारियों पर अपराधियों को गिरफ्तार करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया है। 2010 में, कनाडाई जांचकर्ताओं ने चार साल की जांच में पाया, कि अधिकारियों ने जांच को गलत तरीके से संभाला था।

विमानों को उड़ाने की खालिस्तान की चेतावनियां

पिछले साल अमेरिका में रहने वाले खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नून ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में लोगों को 19 नवंबर 2023 से एयर इंडिया की उड़ानों से दूर रहने की चेतावनी दी। यह चेतावनी अमेरिकी धरती पर उसकी हत्या की नाकाम साजिश की अमेरिकी रिपोर्ट सामने आने के बाद आई थी।

पन्नून, अमेरिका स्थित सिख फॉर जस्टिस समूह (SFJ) का नेता है, जो भारत में प्रतिबंधित है। वह खालिस्तान के लिए अपनी मुखर और हिंसक अलगाववादी वकालत और सोशल मीडिया पर भारत विरोधी वीडियो के लिए जाना जाता है। उस पर भारत में आतंकवाद और साजिश का आरोप लगाया गया है। अक्टूबर 2023 में, उसने इजराइल पर हमास के घातक हमलों के मद्देनजर भारत पर 'हमास जैसा' हमला करने की धमकी दी थी।

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