भारत दौरे के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जाएंगे वियतनाम, चीन के खिलाफ मोदी-बाइडेन बना रहे कौन सा प्लान?

Biden Vietnam visit: जी20 शिखर सम्मेलन का दौरा खत्म कर अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइेडन वियतनाम के दौरे पर जाएंगे, जिसके भारत के साथ काफी अच्छे संबंध हैं और दक्षिण चीन सागर में जो चीन की आक्रामक नीति से काफी परेशान है।

राष्ट्रपति जो बाइडेन भारत में 20 शिखर सम्मेलन में और वियतनाम में एक पड़ाव के दौरान दुनिया को दिखाना चाहते हैं, कि संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके समान विचारधारा वाले सहयोगी, चीन की तुलना में बेहतर आर्थिक और सुरक्षा भागीदार हैं।

Biden Vietnam visit

बाइडेन जाएंगे वियतमान

व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने कहा है, कि बाइडेन, जो गुरुवार शाम नई दिल्ली के लिए रवाना हुए हैं, वार्षिक G20 सभा का उपयोग अमेरिका के लिए विकासशील और मध्यम आय वाले देशों के लिए एक प्रस्ताव को उजागर करने के अवसर के रूप में करेंगे, जिससे विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा की कर्ज के बोझ में दबे छोटे देशों को करीब 200 अरब डॉलर का फंड देगा।

आपको बता दें, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की जी20 की अध्यक्षता मिलने के बाद लगातार कहा है, कि छोटे देश कर्ज में दबे हुए हैं (चीन का नाम लिए बगैर) और उन देशों को कर्ज के जाल से निकालने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

चीन ने अपने विशालकाय बेल्ट और रोड इनिशिएटिव के तहत छोटे देशों को अंधाधुंध लोन बांटे हैं, लिहाजा दर्जनों देश चीन के कर्ज के डाल में बुरी तरह से फंस गये हैं, जिनका इस्तेमाल चीन अपने रणनीतिक फायदे के लिए कर रहा है।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शिखर सम्मेलन को छोड़ने की योजना बनाई है, और जी20 शिखर सम्मेलन में चीन के प्रधान मंत्री ली कियांग देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

शिखर सम्मेलन के बाद, बाइडेन और वियतनामी महासचिव गुयेन फु ट्रोंग हनोई में मिलेंगे और उम्मीद है कि वे आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की योजना की घोषणा करेंगे।

वियतनाम और चीन में कैसे हैं संबंध?

हालांकि, वियतनाम और चीन के बीच मजबूत व्यापारिक संबंध हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच काफी गहरे मतभेद हैं। मलेशिया, फिलीपींस, ताइवान और ब्रुनेई की तरह वियतनाम भी दशकों से चीन के साथ तनावपूर्ण क्षेत्रीय गतिरोध में है, जिसने चीनी समुद्र तट से सैकड़ों मील दूर दक्षिण चीन सागर में पानी पर अधिकार का दावा किया है।

वाशिंगटन थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल के ग्लोबल चाइना हब के उप निदेशक, कोलीन कॉटल ने कहा, "मुझे लगता है कि इस विशेष शिखर सम्मेलन में शी जिनपिंग की अनुपस्थिति में, चीन ने बहुत बड़ी रणनीतिक चूक कर दी है।" उन्होंने कहा, कि "और मुझे लगता है, कि यह बाइडेन प्रशासन को आगे बढ़ने और दिखाने के मामले में आक्रामक होने का और भी अधिक मौका देता है ...कि ग्लोबल साउथ के लिए उनका मूल्य प्रस्ताव क्या है।"

इसके अलावा, मामले से परिचित एक अधिकारी के मुताबिक, अमेरिका, भारत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के नेता एक संयुक्त बुनियादी ढांचा समझौते को अंतिम रूप देने के लिए काम कर रहे हैं, जिसकी घोषणा नई दिल्ली में की जा सकती है।

वार्ता से परिचित एक राजनयिक के अनुसार, यदि ऐसा होता है, तो भारत समुद्री मार्ग से सऊदी अरब होते हुए संयुक्त अरब अमीरात और खाड़ी देशों से डायरेक्ट जुड़ जाएगा और यूएई के रास्ते ट्रेन के जरिए भारतीय सामान को जॉर्डन तक पहुंचाया जा सकता है, जो चीन के बीआरआई प्रोजेक्ट के लिए बहुत बड़ा झटका होगा।

हालांकि, व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने कहा कि वह सौदे की पुष्टि नहीं कर सकते। लेकिन, उन्होंने कहा कि यह पहल कुछ ऐसी है "जिसमें हमने अपने साझेदारों के साथ मिलकर प्रयास किया है।"

उन्होंने एयर फोर्स वन में बाइडेन के साथ आए संवाददाताओं से कहा, कि "हमारा मानना है कि भारत से मध्य पूर्व तक यूरोप तक कनेक्टिविटी अविश्वसनीय रूप से महत्वपूर्ण है और इससे इसमें शामिल सभी देशों को महत्वपूर्ण आर्थिक लाभ के साथ-साथ रणनीतिक लाभ भी मिलेगा।"

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