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चीनी जासूसी जहाज के बाद तुर्की का वारशिप भी पहुंचा मालदीव, भारत के दुश्मनों को क्यों जमा कर रहे मुइज्जू?

Turkish Warship in Indian Ocean: पिछले साल नवंबर में मावदीव के राष्ट्रपति बनने वाले मोहम्मद मुइज्जू भारत के लिए सबसे बड़े सिरदर्द बन गये हैं और खुले समुद्र में गश्ती के लिए सैन्य ड्रोन खरीदने के लिए तुर्की के साथ कई मिलियन डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद अब मालदीव, तुर्की के युद्धपोत की मेजबानी कर रहा है।

तुर्की का जो युद्धपोत मालदीव की राजधानी माले पहुंचा है, उसका नाम टीसीजी किनालियाडा है और तुर्की के युद्धपोत की यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब मालदीव और तुर्की, दोनों के साथ भारत के संबंध अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं।

Turkish Warship in Indian Ocean

तुर्की से मालदीव ने किया है हथियार समझौता

कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान की भाषा बोलने की वजह से भारत और तुर्की के बीच संबंधों में लगातार गिरावट आ रही है। जम्मू-कश्मीर से साल 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से, तुर्की ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने का कोई मौका नहीं जाने दिया है।

टीसीजी किनालियाडा, जापान के साथ तुर्की के संबंधों की 100वीं वर्षगांठ मनाने के लिए यात्रा कर रहा है। दोनों देश विकास के मामलों पर करीबी साझेदार हैं। अपनी 134-दिवसीय यात्रा के दौरान, जहाज लगभग 27,000 समुद्री मील की यात्रा करेगा, और जापान, पाकिस्तान, मालदीव, बांग्लादेश और चीन सहित 20 देशों में कुल 24 बंदरगाहों का दौरा करेगा।

मालदीव में राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की नेतृत्व वाली नई सरकार 'इंडिया आउट' के अपने अभियान पर आई है। जिसके बाद द्वीप राष्ट्र में तैनात 77 भारतीय सैन्य कर्मियों को भी बाहर कर दिया गया है।

मालदीव में नई सरकार ने सैन्य ड्रोन खरीदने के लिए तुर्की के साथ 37 मिलियन अमेरिकी डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसकी मदद से अब मालदीव अपने समुद्री क्षेत्र की निगरानी करेगा। अब तक यह काम भारत ने मालदीव के रक्षा बलों के साथ साझेदारी में किया है।

मालदीव के राष्ट्रपति ने ये ड्रोन डील उस वक्त किया था, जब राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने राष्ट्रपति बनने के बाद अपने पहले विदेशी दौरे के लिए तुर्की को चुना था। इस यात्रा के साथ ही तुर्की ने भारत के दुश्मनों पाकिस्तान और चीन के साथ अच्छे संबंध बनाने के संकेत दे दिए थे। ऐसी संभावना है, कि बहुत जल्द तुर्की से खरीदे गये ड्रोन, समुद्री संचालन और निगरानी के लिए भारतीय डोर्नियर विमान की जगह लेंगे।

मालदीव सरकार का लक्ष्य अपने 900,000 वर्ग किलोमीटर वाले स्पेशल इकोनॉमिक जोन की निगरानी के लिए तुर्की की बायकर टेक्नोलॉजी द्वारा विकसित बायरकटार टीबी2 ड्रोन को तैनात करना है, जिससे इसकी समुद्री निगरानी क्षमताओं में वृद्धि होगी। इन तुर्की ड्रोन के लिए पैसा राज्य के आकस्मिक बजट से आवंटित किया गया है। पैसे का भुगतान किस्तों में किया जाएगा।

मालदीव ऐसे वक्त में तुर्की के युद्धपोत की मेजबानी कर रहा है, जब भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका ने हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के अपने हिस्से में विदेशी रिसर्च जहाजों की एंट्री पर एक साल तक के लिए रोक लगा दी है।1 जनवरी से शुरू हुई रोक को भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और रणनीतिक जीत के रूप में देखा जाता है, जिसने वैज्ञानिक परीक्षण करने के बहाने आईओआर के विशाल हिस्से का सर्वेक्षण करने वाले चीनी अनुसंधान जहाजों पर चिंता बढ़ा दी है।

हिंद महासागर में चीन का रिसर्च जहाज

इससे पहले पिछले हफ्ते ही 4,500 टन वजनी एक उच्च तकनीक वाला चीनी 'जासूस' जहाज मालदीव के जल क्षेत्र में वापस लौट आया है। दो महीने पहले भी इसने मालदीव के विभिन्न बंदरगाहों पर एक हफ्ते का समय बिताया था। समाचार पोर्टल Adhadhu.com ने 26 अप्रैल के अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि जियांग यांग होंग 03, जो चीन का रिसर्च जहाज है, उसे थिलाफुशी औद्योगिक द्वीप के बंदरगाह पर खड़ा किया गया है।

हालांकि, मालदीव की "सरकार ने जासूसी जहाज की वापसी के कारण का खुलासा नहीं किया है। लेकिन सरकार ने जहाज को उसकी पहली यात्रा से पहले डॉक करने की अनुमति की पुष्टि कर दी है।"

चीन का ये जासूसी जहाज इससे पहले 23 फरवरी को माले के पश्चिम में लगभग 7.5 किमी दूर उसी थिलाफुशी बंदरगाह पर रुका था। मालदीव के EEZ की सीमा के पास लगभग एक महीना बिताने के बाद हाई-टेक जहाज 22 फरवरी को मालदीव के जलक्षेत्र में पहुंचा था। लगभग छह दिन बाद, जहाज ईईजेड सीमा पर वापस चला गया।

मालदीव विदेश मंत्रालय ने 23 जनवरी को कहा, कि "जहाज मालदीव के जलक्षेत्र में रहते हुए कोई शोध नहीं करेगा।" लेकिन, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि मालदीव सरासर झूठ बोल रहा है।

मालदीव की भारत के लक्षद्वीप के मिनिकॉय द्वीप से महज 70 समुद्री मील की दूरी है, जबकि भारत की मुख्य भूमि से मालदीव करीब 300 समुद्री मील की दूरी पर स्थित है। लिहाजा, हिंद महासागर में इसका महत्व काफी बढ़ जाता है। हिंद महासागर में चलने वाले व्यापारिक जहाजों के लिए केन्द्र में होने की वजह से मालदीव पर चीन का प्रभुत्व, भारत के लिए सिरदर्द जैसा ही है।

वहीं, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन पाकिस्तान का पक्ष लेते रहे हैं। 2020 में अर्दोआन ने पाकिस्तान का दौरा किया और कश्मीर पर इस्लामाबाद को अपना समर्थन दिया था। जनवरी 2023 में, SADAT नामक एक तुर्की निजी सैन्य कंपनी, जिसे अर्दोआन की निजी सेना के रूप में भी जाना जाता है, उसने कथित तौर पर भारतीय सेना के खिलाफ लड़ने के लिए कश्मीर में भाड़े के सैनिकों को भेजने की घोषणा की थी।

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