अफगानिस्तान के बाद ईरान... पाकिस्तान के खिलाफ पड़ोसी देशों में क्यों बढ़ी नफरत? 9 मजदूरों की हत्या के बाद सवाल

Iran-Pakistan News: पाकिस्तान और ईरान के बीच का तनाव और भी ज्यादा बढ़ गया है, क्योंकि एक अज्ञात बंदूकधारी ने शनिवार को ईरान के अशांत दक्षिणपूर्वी सीमा क्षेत्र में नौ पाकिस्तानी श्रमिकों की हत्या कर दी। ईरान में पाकिस्तानी लोगों पर ये हमला उस वक्त हुआ है, जब कुछ दिन पहले एक दूसरे के ऊपर हमला करने के बाद दोनों देश अपने संबंधों को सुधारने की कोशिश कर रहे थे।

ईरान में पाकिस्तानी मजदूरों के खिलाफ उस जगह पर हमला किया गया है, जहां पर पाकिस्तान की सेना ने एयरस्ट्राइक किया था, लिहाजा माना जा रहा है, कि पाकिस्तान के खिलाफ ईरान में बदला लिया गया है।

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तेहरान में पाकिस्तानी राजदूत मुहम्मद मुदस्सिर टीपू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, कि "सरावन में 9 पाकिस्तानियों की भयानक हत्या से गहरा सदमा लगा है। दूतावास शोक संतप्त परिवारों को पूरा समर्थन देगा।"

बयान में आगे कहा गया है, कि "हमने ईरान से इस मामले में पूर्ण सहयोग देने का आह्वान किया है।"

लेकिन, सवाल ये उठ रहे हैं, कि आखिर पाकिस्तान के खिलाफ पड़ोसी देशों में नफरत क्यों बढ़ती जा रही है। हैरानी की बात ये है, कि ये नफरत अवाम के स्तर पर है। यानि, देश के नागरिकों में पाकिस्तान को लेकर घृणा फैल गई है।

इससे पहले अफगानिस्तान में पाकिस्तान को लेकर भारी गु्स्सा है। अफगानिस्तान के आम लोग पाकिस्तानियों से घृणा करते हैं और इसका उदाहरण कई मौकों पर देखा गया है। जब भारत में विश्वकप के दौरान अफगानिस्तान की क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान को हराया था, तो अफगानिस्तान ने कहा था, कि उनके लिए वर्ल्ड कप पूरा हो गया है।

इसके अलावा, जब यूएई में टी20 वर्ल्ड कप मैच चल रहा था, उस वक्त भी दर्शक दीर्घा में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के दर्शक आपस में भिड़ गये थे।

वहीं, पिछले दिनों तालिबान के रक्षा मंत्री मुल्ला उमर के बेटे मुल्ला याकूब ने अफगानिस्तान के लोगों से पाकिस्तान को बर्बाद कर देने का आह्वान किया था। यानि,समझा जा सकता है, कि पाकिस्तान को लेकर अफगानिस्तान में किस हद तक नफरत है।

वहीं, ईरान में भी कुछ ऐसा ही हाल है, जो एक शिया बाहुल्य देश है।

ईरान में पाकिस्तान के खिलाफ नफरत

ईरानी राज्य मीडिया ने कहा है, कि पुलिस उन तीन बंदूकधारियों की तलाश कर रही है, जो गोलीबारी के बाद भाग गए थे। बलूच अधिकार समूह हलवाश ने अपनी वेबसाइट पर कहा है, कि मारे गये पीड़ित पाकिस्तान के मजदूर थे, जो एक ऑटो की दुकान पर रहते थे जहां वे काम करते थे।

बयान में कहा गया है, कि तीन अन्य मजदूर घायल हो गये। सरकारी मीडिया ने कहा कि किसी भी व्यक्ति या समूह ने सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत के सारावन में गोलीबारी की जिम्मेदारी फिलहाल नहीं ली है।

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मुमताज ज़हरा बलूच ने कहा है, "यह एक भयावह और घृणित घटना है और हम इसकी स्पष्ट रूप से निंदा करते हैं।" उन्होंने कहा, कि "हम ईरानी अधिकारियों के संपर्क में हैं और घटना की जांच करने और इसमें शामिल लोगों पर तुरंत कार्रवाई करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।"

यह गोलीबारी ईरान के विदेश मंत्री होसैन अमीराबदोल्लाहियान की सोमवार को प्रस्तावित पाकिस्तान यात्रा से पहले की गई है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नासिर कनानी ने गोलीबारी की निंदा की है।

उन्होंने एक बयान में कहा, कि "ईरान और पाकिस्तान, दुश्मनों को दोनों देशों के बीच भाईचारे के संबंधों को नुकसान पहुंचाने की इजाजत नहीं देंगे।" राज्य मीडिया ने कहा, कि पाकिस्तानी और ईरानी राजदूत वापस बुलाए जाने के बाद अपनी पोस्टिंग पर लौट रहे थे, जब पड़ोसी देशों ने पिछले सप्ताह मिसाइल हमलों का आदान-प्रदान किया, जिसका मकसद दोनों देशों ने आतंकवादी लक्ष्य को निशाना बनाना बताया था।

ईरान की सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी ने शनिवार को राजदूत का परिचय पत्र प्राप्त करते हुए मुदस्सिर टीपू से कहा, "ईरान-पाकिस्तान सीमा आर्थिक आदान-प्रदान के लिए अवसर पैदा करती है... और इसे किसी भी असुरक्षा से बचाया जाना चाहिए।"

ईरान में जिस जगह पर पाकिस्तानी मजदूरों पर हमला हुआ है, वो इलाका सिस्तान-बलूचिस्तान का इलाका है, जो काफी गरीब क्षेत्र होने के साथ साथ अलगाववादियों और आतंकवादियों के लिए प्रमुख स्थान रहा है। वहीं, ये क्षेत्र अफीम तस्करी के लिए भी कुख्यात रहा है, जहां अकसर आतंकवादियों के बीच भी मुठभेड़ होते रहते हैं। ईरान में ईंधन की कीमतें दुनिया में सबसे कम हैं, लिहाजा इस क्षेत्र में ईंधन की तस्करी भी काफी ज्यादा की जाती है।

हालांकि, फिलहाल दोनों देश स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जिस तरह से ईरान के लोगों में आम पाकिस्तानियों को लेकर नफरत बढ़ी है, वो यकीनन पाकिस्तान के लिए अच्छा नहीं है।

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