VIDEO:107 साल बाद बर्फीले समुद्र में मिला जहाज का मलबा, 1915 में अंटार्टिक में हुआ क्या था ? जानिए

वॉशिंगटन, 9 मार्च: 100 वर्षों से भी ज्यादा तलाशते रहने के बाद आखिरकार गहरे और बर्फीले समुद्र में वैज्ञानिकों को बड़ी कामयाबी मिली है। एक जहाज जो 1915 में बर्फीले समुद्र में डूब गया था, उसके मलबे का पता चल गया है और उसका वीडियो भी रिकॉर्ड कर लिया गया है। यह जहाज एक बहुत बड़े समुद्री खोजकर्ता सर अर्नेस्ट हेनरी शेकलटन की अगुवाई में अंटार्टिका अभियान के लिए गया था। लेकिन, वह मिशन नाकाम हो गया। यह जहाज ऐसी जगह पर डूबा था, जिसका पता लगाना भी लगभग नाममुकिन था। एक खोजकर्ता तो पिछले 50 वर्षों से इस काम में लगे थे। लेकिन, अब वो सफल हो चुके हैं। उस दिन एंड्योरेंस नाम के जहाज के साथ क्या हुआ था और क्रू के 28 सदस्य कैसे जीवित बचकर इंसानों के बीच पहुंचे, यह भी अपने आप में बहुत बड़ी कहानी है।

10,000 फीट गहराई में मिला मलबा

10,000 फीट गहराई में मिला मलबा

डूबने के एक शताब्दी से भी ज्यादा समय बाद आखिरकार एंड्योरेंस जहाज का मलबा मिल गया है। हमारे पास इसका वीडियो भी है। सर अर्नेस्ट हेनरी शेकलटन के इस जहाज का मलबा अंटार्टिक महासागर में तीन किलोमीटर (10,000 फीट) गहरे समुद्र तल पर पड़ा मिला है। 1915 की बात है। यह जहाज अपने अभियान पर निकला था। लेकिन, समुद्र में बर्फ के बीच फंस गया था, जिसके चलते उसके क्रू को उसे वहीं पर उसी अवस्था में छोड़कर निकल जाना पड़ा। बर्फ के दबाव की वजह से जहाज बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके चलते शेकलटन और उनके लोगों को वहां से किसी तरह पैदल ही या फिर छोटे नावों के जरिए जान बचाकर निकलना पड़ा।

21 नवंबर, 1915 को डूब गया था एंड्योरेंस

21 नवंबर, 1915 को डूब गया था एंड्योरेंस

एंड्योरेंस के कप्तान फ्रैंक वर्सले ने शुरू में जहाज का जो स्थान रिकॉर्ड किया था, उसका मलबा उस जगह से लगभग 6.5 किलोमीटर दक्षिण की ओर मिला है। बाद में इस जहाज से जुड़ी कहानियां अंटार्टिक अभियान में जाने वाले लोगों के लिए लोककथाओं में तब्दील हो गया था। जहाज का मलबा देखने के बाद जानकार बता रहे हैं कि यह लगभग वैसा ही दिख रहा है, जब नवंबर, 1915 में यह समुद्र में समा गया था। (मलबे की तस्वीरें सौजन्य: ट्विटर वीडियो से)

50 साल बाद एक खोजकर्ता का सपना साकार हुआ

50 साल बाद एक खोजकर्ता का सपना साकार हुआ

जहाज की लकड़ियां हालांकि खराब हुई हैं, लेकिन अभी भी वह अपने स्थान पर दिख रही हैं और जहाज का नाम- एंड्योरेंस तो साफ नजर आ रहा है। बीबीसी न्यूज से आर्कियोलॉजिस्ट मेनसन बाउंड ने कहा है, 'बिना किसी अतिशयोक्ति के कहूं तो यह अबतक सबसे बेहतरीन लकड़ी का जहाज है, जो मैंने कभी देखा है - दूर-दूर तक।' उनके मुताबिक, 'यह सीधा खड़ा है, समुद्र तल पर गर्व से है, सही तरीके से है, और संरक्षण लायक शानदार स्थिति में है।' ये इसी खोजी अभियान से जुड़े थे, जिनके 50 साल लंबे करियर में यह सपना पूरा हुआ है।

एंग्लो-आयरिश अंटार्कटिक खोजकर्ता थे शेकलटन

एंग्लो-आयरिश अंटार्कटिक खोजकर्ता थे शेकलटन

सर अर्नेस्ट हेनरी शेकलटन एक एंग्लो-आयरिश अंटार्कटिक खोजकर्ता थे। वे अंटार्कटिक में तीन ब्रिटिश अभियानों का नेतृत्व कर चुके थे। उनकी एंड्यूरेंस के सहारे अंटार्कटिका को पहली बार जमीनी रास्ते से पार करने की कोशिश थी। वह अंटार्टिका को दक्षिणी ध्रुप के रास्ते वेडेल सागर से रॉस सी की ओर पार करके जाना चाहते थे। लेकिन, उनका जहाज बर्फ में बुरी तरह फंस गया। उनके दल ने बर्फ पर ही कैंप लगाकर रुकने की कोशिश की। लेकिन, आखिरकार 21 नवंबर, 1915 को उनका जहाज बर्फीले समुद्र में पूरी तरह डूब गया। उस बर्फीले जीवन-रहित स्थान पर जहाज के 28 सदस्यों ने किस तरह से अपनी जिंदगी बचाई, यह अपने आपमें एक बड़ी कहानी है।

जहाज का डूबना जिंदगी बचाने का मिशन बन गया था

जहाज का डूबना जिंदगी बचाने का मिशन बन गया था

जब शेकलटन का मुख्य मिशन नाकाम हो गया तो उनके अभियान दल के पास एक ही मिशन बचा था। जिंदा रहने का मिशन। एंड्योरेंस 22 अभियान के मुताबिक जहाज डूबने के बाद क्रू के सदस्यों ने समुद्री बर्फ पर चलना शुरू किया, डूबे हुए जहाज के लाइफबोट्स के जरिए किसी तरह एलीफैंट आइलैंड पहुंचे। वहां सील और पेंगुइन खाकर खुद को जीवित रखा। वहां से किसी तरह से दक्षिण जॉर्जिया पहुंचे। फिर पहाड़ों को पार किया, ग्लेशियर से गुजरे और तब जाकर नॉर्वे के व्हेल का शिकार करने वाली नाव तक पहुंचे। उसके बाद 100 साल से ज्यादा वक्त तक ध्रुवीय शोधकर्ताओं ने उस जहाज के मलबे को तलाशने की कोशिश की, लेकिन अब जाकर सफलता मिली है। (पहली दोनों तस्वीरों के अलावा बाकी सांकेतिक)

अविश्वसनीय मिशन हुआ पूरा

उनके खोए हुए जहाज की तलाश के प्रोजेक्ट को फॉकलैंड्स मैरीटाइम हेरिटेज ट्रस्ट ने एक दक्षिण अफ्रीकी आइसब्रेकर, अगुलहास-2 का इस्तेमाल करके अंजाम दिया है। इसमें दूर से संचालित सबमर्सिबल का उपयोग किया गया है। इस खोजी अभियान के लीडर वयोवृद्ध ध्रुवीय भूगोलवेत्ता डॉ जॉन शियर्स ने इसका पता लगने पर कहा है, 'मलबे का पता चलना एक अवश्विवसनीय सफलता है।' अभियान की चुनौती के बारे में उन्होंने कहा है, 'हमने विश्व की सबसे मुश्किल जहाज के मलबे की खोज को सफलतापूर्वक पूरा किया है, लगातार समुद्री बर्फ को हटाते, बर्फ के तूफान का सामना करते हुए और जब तापमान माइनस 18 डिग्री सेल्सियस तक नीचे चला जाता था। हमने वह हासिल किया है, जिसके बारे में कई लोग कहते थे कि नामुमकिन था। '

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