तालिबान के दहशत से नौकरी छोड़ रहे अफगानिस्तान के पायलट, अब बेबस हो गई अशरफ गनी सरकार?
पिछले दिनों तालिबान ने एक के बाद एक कई पायलटों की जान ले ली है, जिसके बाद पायलटों के लिए नौकरी करना और अपनी पहचान छिपा कर रखना काफी मुश्किल काम हो गया है।
काबुल, अगस्त 10: अफगानिस्तान में तालिबान ने पिछले एक हफ्ते से कम वक्त में कम से कम 6 प्रांतों की राजधानियों पर कब्जा जमा लिया है, जिसके बाद अफगानिस्तान को इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन से बचाए रखना अब मुश्किल साबित हो रहा है। इसी बीच खबर है कि तालिबान के डर से अफगानिस्तान एयरफोर्स के फायलट ने नौकरी से इस्तीफा देना शुरू कर दिया है, जिसके बाद अफगानिस्तान सरकार बेबस नजर आ रही है।

राजधानी ऐबक पर तालिबान का कब्जा
तालिबान ने ट्वीट कर बताया है कि समांगन प्रांत की राजधानी ऐबक पर सोमवार सुबह को उसने कब्जा कर लिया है और सभी सरकारी दफ्तरों के साथ पुलिस चौकियों पर भी तालिबान ने नियंत्रण स्थापित कर लिया है। वहीं, समांगन प्रांत के डिप्टी गवर्नर सेफतुल्लाह सामंगानी ने भी पुष्टि की है कि तालिबान अब शहर को 'पूर्ण नियंत्रण' में ले चुका है। तालिबान ने कुंदुज, सर-ए-पुल और तालोकान पर कब्जा करने के ठीक एक दिन बाद ही समांगन प्रांत की राजधानी ऐबक पर कब्जा जमा लिया है। वहीं, लश्कर गाह, कंधार और हेरात में भीषण लड़ाई अभी भी जारी है, जबकि तालिबान का दावा है कि आज अफगानिस्तान के उत्तर में सबसे बड़े शहर मजार-ए-शरीफ पर हमला किया गया है।
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नौकरी छोड़ते अफगान पायलट
इस बीच यह पता चला है कि अफगानिस्तान एयरफोर्स के पायलटों ने नौकरी से इस्तीफा देना शुरू कर दिया है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह तालिबान के द्वारा पायलटों की हत्या किया जाना है। ऐसे में कई जरूरी कार्रवाईयों को अफगान सेना अंजाम नहीं दे पा रही है और तालिबान के लिए नये इलाकों पर कब्जा करना काफी आसान होता जा रहा है। जबकि, तालिबान के खिलाफ लड़ाई जीतने में सबसे ज्यादा अहम योगदान वायुसेना ही निभाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दिनों तालिबानी आतंकियों ने एक के बाद एक...8 पायलटों की हत्या कर दी है, जिसके बाद अफगान एयरफोर्स पायलटों के दिलों में काफी खौफ भर गया है और डर की वजह से पायलटों ने नौकरी छोड़ना शुरू पर दिया है, जो तालिबान की सबसे बड़ी जीत मानी जा रही है।

पायलट हमीदुल्लाह की हत्या
डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक अफगान सेना के ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर पायलट हमीदुल्लाह अज़ीमी को शनिवार को राजधानी काबुल के पास तालिबान के आतंकियों ने उनकी हत्या कर दी। उनकी कार में तालिबान के आतंकियों ने बम लगाकर उड़ा दिया था। इस हमले में पांच और नागरिक बुरी तरह से घायल हो गये थे। द टाइम्स से बात करते हुए एक 'अज्ञात' पायलट ने कहा कि. वह उन 19 सहयोगियों के बारे में जानता है जो हाल के हफ्तों में वायु सेना छोड़ चुके हैं क्योंकि सरकार उनकी सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकती है। उन्होंने कहा कि ''मैं दस साल से अफगान एयरफोर्स के लिए काम कर रहा हूं। जिस दिन से मैंने अपनी वर्दी पहनी थी, मैंने खून की आखिरी बूंद तक अपने देश की रक्षा करने की कसम खाई थी...''

कैसे जान बचाते हैं अफगान पायलट?
टाइम्स से बात करते हुए 'गुमनाम' पायलट ने बताया कि, ''मैं अपना निजी काम करने के लिए अपने दोस्तों की कार उधार लेता हूं। मुझे कार बार बार बदलना पड़ता है और मैं अपने घर से बाहर समय नहीं बिता सकता"। पायलट ने कहा कि ''मेरी पहचान उजागर नहीं हो जाए, इसके लिए मुझे हर सेकेंड अलर्ट रहना पड़ता है, मैं अपना बाल तक कटवाने के लिए घर से बाहर नहीं जाता हूं''। एक और पायलट ने टाइम को बताया कि वो अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए नौकरी छोड़ने पर विचार कर रहे हैं। पायलट ने कहा कि ''अगर सरकार मेरे परिवार की सुरक्षा की गारंटी दे सकती है तो मैं बेस पर रहूंगा और हमेशा के लिए लड़ूंगा।'। आपको बता दें कि, तालिबान का मकसद खौफ फैलाना है और इसके लिए वो सरकार से संबंध रखने वाले किसी भी शख्स की हत्या करने से बाज नहीं आ रहा। चाहे वो मीडिया के लोग हों या फिर पायलट।

अफगान एयरफोर्स की चुनौतियां
तालिबान के खिलाफ अगर अफगानिस्तान सरकार के पास सबसे बड़ा हथियार कोई है, को वो है एयरफोर्स। और अफगान एयरफोर्स के पास अमेरिका द्वापा प्रशिक्षित बेहतरीन और अनुभवी पायलट्स हैं, लेकिन दिक्कत ये हो रही है कि ज्यादातर जमीनी इलाकों पर तालिबान के द्वारा कब्जा होने के बाद इन पायलट्स के पास विमान उतारने का ज्यादा बेस ही नहीं बचा है। इसका ताजा उदाहरण अमेरिकी एयरफोर्स का है, जिसे तालिबान पर हमला करने के लिए ओमान एयरबेस से उड़ान भरनी पड़ी। रिपोर्ट के मुताबिक, काबुल की तरफ बढ़ने वाले करीब 11 तालिबानी आतंकियों को अमेरिकी वायुसेना ने उपर से ही उड़ा दिया। टोलो न्यूज ने कहा है कि निजर्ब जिले में अमेरिकी वायुसेना ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया है। लेकिन, एक अफगानिस्तानी कमांडर ने कहा कि ''ये एयरस्ट्राइक ज्यादा दिनों तक चलने वाले नहीं हैं''। और अब तालिबान को तभी रोका जा सकता है, जब अमेरिका फिर से अपने सैनिकों को वापस अफिगानिस्तान भेजे।
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