जाने के बाद पहली बार बोले अशरफ गनीः जूते तक नहीं पहन पाया

काबुल, 19 अगस्त। काबुल से जाने के बाद राष्ट्रपति अशरफ गनी ने पहली बार फेसबुक पर एक संदेश पोस्ट किया है. इस वीडियो संदेश में गनी ने कई बातों की सफाई दी है और तालिबान की पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई से हो रही बातचीत की भी सराहना की है.

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सोशल मीडिया पर ऐसी अफवाहें थीं कि गनी चार कारों और एक हेलीकॉप्टर में धन भरकर देश से भागे हैं. गनी ने इन अफवाहों को बकवास बताते हुए कहा कि वह जूते तक नहीं बदल पाए और सैंडल में ही रविवार रात को काबुल स्थित राष्ट्रपति भवन से निकले.

गनी के जाने के बाद से ही उनके वहां होने को लेकर कयास लगाए जा रहे थे. बुधवार को यूएई ने उनके अपने यहां होने की पुष्टि की. यूएई के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "यूएई का विदेश और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंत्रालय इस बात की पुष्टि कर सकता है कि राष्ट्रपति अशरफ गनी और उनके परिवार का मानवीय आधार पर स्वागत किया गया है."

भागा नहीं, निकाला गया

गनी ने कहा, "जो कहे कि आपके राष्ट्रपति ने आपको बेच दिया है और अपने फायदे के लिए व अपनी जान बचाने के लिए भाग गया है, उसका यकीन मत कीजिएगा. ये आरोप निराधार हैं. मैं इन्हें पूरी तरह खारिज करता हूं."

गनी ने बताया कि उन्हें किन हालात में निकलना पड़ा. उन्होंने कहा, "मुझे तो इस तरह अफगानिस्तान से निकाला गया कि मुझे चप्पल निकालकर जूते पहनने तक का वक्त नहीं मिला."

गनी ने स्पष्ट किया कि उनका दुबई में निर्वासित जीवन जीने का कोई इरादा नहीं है और वह घर लौटने के लिए बातचीत कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें अफगानिस्तान से निकाला गया है और अगर काबुल ना छोड़ते तो उन्हें फांसी पर लटका दिया जाता.

गनी ने कहा, "अगर मैं वहीं रहता तो एक बार फिर अफगानिस्तान के एक चुने हुए राष्ट्रपति को अफगानों की आंखों के सामने फांसी पर लटका दिया जाता." गनी पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नजीबुल्लाह के संदर्भ में ऐसा कह रहे थे, जिनका शव 27 सितंबर 1996 को काबुल में एक खंभे से लटका मिला था.

गनी ने तालिबान पर समझौता तोड़ने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि तालिबान ने काबुल में न घुसने का समझौता किया था. उन्होंने कहा कि वह सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण चाहते थे लेकिन उन्हें निकाल दिया गया.

गनी अब अहम नहीः अमेरिका

अशरफ गनी भले ही अफगानिस्तान लौटना चाहते हैं लेकिन अमेरिका ने कहा है कि वह अब एक अहम नहीं हैं. अमेरिकी उप विदेश मंत्री वेंडी शेरमन ने पत्रकारों से कहा, "अब वह अफगानिस्तान में अहम नहीं हैं."

इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने कहा है कि तालिबान के साथ संपर्क बना हुआ है. उन्होंने कहा कि अमेरिका के लगभग 4,500 सैनिक काबुल में हैं. अमेरिका ने पहले 31 अगस्त तक अफगानिस्तान से सारे सैनिक वापस बुलाने की बात कही थी लेकिन अब राष्ट्रपति जो बाइडेन का कहना है कि यह समयसीमा बढ़ानी पड़ सकती है.

जो बाइडेन ने कहा कि अमेरिकी नागरिकों और उनके सहयोगियों को बचाकर लाने की पूरी कोशिश की जा रही है. एबीसी न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा, "अगर 31 अगस्त के बाद कोई अमेरिकी नागरिक अफगानिस्तान में हुआ तो हम तब तक वहां रहेंगे जब तक उन्हें निकाल न लें."

देखिएः तालिबान के सरगना

ऐसी खबरें हैं कि तालिबान ने काबुल में कर्फ्यू लगा रखा है और जगह जगह चेक पोस्ट जिस कारण लोग एयरपोर्ट तक नहीं पहुंच पा रहे हैं. हालांकि बाइडेन ने कहा कि तालिबान अमेरिकी नागिरकों को निकालने में सहयोग कर रहा है लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि अफगान नागरिकों को बचाकर लाने में ज्यादा मुश्किलें हैं.

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने बताया कि पिछले दो दिनों में अमेरिकी सेना ने कम से कम 2,000 लोगों को वहां से निकाला है.

वीके/एए (रॉयटर्स, एएफपी)

Source: DW

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