पृथ्वी की ओर तेजी से बढ़ रहा है 'खतरनाक' एस्टरॉयड, मार्च में बेहद नजदीक होगा, टेलीस्कोप से कैद हुई तस्वीर
रोम, 7 फरवरी: मार्च की शुरुआत में ही एक एस्टरॉयड के पृथ्वी के बहुत ही पास से गुजरने की संभावना है। इटली के एक वैज्ञानिक ने इसकी तस्वीर भी टेलीस्कोप की मदद से कैद की है। खगोल विज्ञान की भाषा में इस एस्टरॉयड को संभावित 'खतरनाक' की श्रेणी में रखा गया है। इसका आकार 1.3 किलोमीटर का बताया जा रहा है और रफ्तार 26,800 मील प्रति घंटे की है। इसकी तस्वीर तब ली गई है, जब यह हमसे करीब 3.5 करोड़ किलोमीटर दूर था। अगले महीने की शुरुआत में भी यह पृथ्वी के बहुत करीब से गुजरेगा।

1.3 किलोमीटर व्यास वाला 'खतरनाक' एस्टरॉयड
एक और विशाल एस्टरॉयड बड़ी ही तेजी से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है, जिसकी तस्वीर एक खगोल वैज्ञानिक ने 30 जनवरी को टेलीस्कोप की मदद से कैद की है। इस एस्टरॉयड का व्यास 1.3 किलोमीटर बताया जा रहा है और संभावित तौर पर यह पृथ्वी के सबसे नजदीक से गुजर सकता है। 138971 (2001 सीबी21) नाम के इस एस्टरॉयड को खगोल वैज्ञानिक संभावित तौर पर 'खतरनाक' बता रहे हैं। हालांकि, साथ ही यह भी भरोसा दे रहे हैं कि इसकी वजह से पृथ्वी वासियों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। लेकिन, इसकी जो रफ्तार है, वह बहुत ही ज्यादा है और यह 26,800 मील प्रति घंटे की गति से भी तेजी से धरती की ओर बढ़ता चला आ रहा है। वैज्ञानिकों ने इसके पृथ्वी के सबसे नजदीक से गुजरने वाले दिन का भी अनुमानित समय बता दिया है।(पहली तस्वीर-सांकेतिक)

करीब 3.5 करोड़ किलोमीटर दूर से ली गई तस्वीर
इस एस्टरॉयड का पता इटली के वर्चुअल टेलीस्कोप प्रोजेक्ट के खगोल वैज्ञानिक गियानलुका मासी ने टेलीस्कोप की मदद से तब लगाया जब यह धरती से करीब 3.5 करोड़ किलोमीटर दूर था। इस एस्टरॉयड की तस्वीर को वर्चुअल टेलीस्कोप प्रोजेक्ट की वेवसाइट पर शेयर किया गया है, जिसमें एक छोटे से सफेद बिंदु को तीर के निशान के जरिए दिखाया गया है। इसे 420 सेकंड के एक एक्सपोजर के दौरान कैद किया गया है, जिसे एक रोबोटिक टेलीस्कोप यूनिट 'एलेना' की मदद से दूर से लिया गया है। (ऊपर वाली तस्वीर सौजन्य-गियानलुका मासी-वर्चुअल टेलीस्कोप प्रोजेक्ट )

क्यों बताया जा रहा है संभावित 'खतरनाक' एस्टरॉयड ?
न्यूजवीक की एक रिपोर्ट के मुताबिक एस्टरॉयड सूर्य की कक्षा में घूमने में 384 दिनों (400 दिनों से कम) का समय लगाते हैं, जो कि पृथ्वी की तुलना में करीब 20 दिन अधिक है। हालांकि, खगोलविदों के अनुसार इसे 'संभावित खतरनाक' श्रेणी में रखने का कतई मतलब नहीं है कि यह धरती से टकराने के लिए आ रहा है। इसका अर्थ यह है कि ये हमारे बहुत ही पास से गुजरने में सक्षम है। इस श्रेणी को तय करते वक्त इसका आकार भी महत्त्व रखता है। पिछले महीने ही एक और एस्टरॉयड धरती के कुछ ज्यादा ही नजदीक आया था, जिसका नाम 7482 (1994 पीसी1)था। उसका व्यास एक किलोमीटर से ज्यादा था और 18 जनवरी को पृथ्वी के पास से गुजर गया।

4 मार्च को पृथ्वी के पास से गुजरेगा 'खतरनाक' एस्टरॉयड
138971 (2001 सीबी21) नाम का जो एस्टरॉयड इस वक्त पृथ्वी की ओर बहुत ही तेजी से चला आ रहा है, उसके 4 मार्च को धरती के बेहद पास से गुजरने का अनुमान है। भारतीय समय के अनुसार यह दोपहर बाद 1 बजकर 30 मिनट के करीब पृथ्वी के सबसे पास होगा। लेकिन, वैज्ञानिक इसलिए इसे घबराने की कोई वजह नहीं मान रहे हैं, क्योंकि हमारे ग्रह के सबसे पास होने की स्थिति में भी हमसे चांद की औसत दूरी से 13 गुना ज्यादा दूर रहेगा। यानी उस समय यह धरती से 49,11,298 किलोमीटर की दूरी पर होगा।

एस्टरॉयड को रोकने की दिशा में पहल शुरू
हालांकि, अभी तक एस्टरॉयड के टकराने का कोई खतरा नहीं दिख रहा है, लेकिन अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा भविष्य में ऐसी किसी भी संभावित आशंका को टालने के लिए उपाय पर काम कर रहा है। इसने एक डबल एस्टरॉयड रिडायरेक्शन टेस्ट (डीएआरटी) मिशन लॉन्च किया है, जिसके तहते किसी भी क्षुद्र ग्रह पर स्पेसक्राफ्ट को क्रैश करवाने की योजना है, ताकि उसकी दिशा बदली जा सके। हालांकि, इस तरह का पहलै क्रैश 2022 के सितंबर-अक्टूबर से पहले होने की उम्मीद नहीं है।

एस्टरॉयड क्या हैं ?
एस्टरॉयड लगभग 4.6 अरब वर्ष पहले सौर मंडल के निर्माण से बचे चट्टानी टुकड़े हैं। एस्टरॉयड की गतिविधियों पर नजर रखने वाले नासा के ज्वाइंट प्रॉपल्शन लैबोरेटरी (जेपीएल) के मुताबिक पृथ्वी के नजदीक के वस्तु की तब एस्टरॉयड के रूप में पहचान होती है, जब इसकी धरती से दूरी, पृथ्वी और सूर्य की दूरी से 1.3 गुना से कम होती है। पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी करीब 9.3 करोड़ मील है। (दूसरी तस्वीर के अलावा सारी तस्वीरें- सांकेतिक)












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