माहवारी पर परिवार ने घर से निकाला, 15 साल की लड़की की मौत
नेपाल में एक 15 साल की लड़की को उसके माहवारी के दिनों में घर के बाहर एक गंदी झोपड़ी में रहने के लिए मजबूर किए जाने के बाद उसकी मौत हो गई।
काठमांडू। नेपाल में एक 15 साल की लड़की की मौत का मामला सामने आया है। लड़की की मौत माहवारी के दौरान तब हुई जब परिवार ने उसे घर से निकाल दिया और एक गंदी झोपड़ी में ठंड और गंदगी के साथ रहने को मजबूर किया।

नेपाल की राजधानी काठमांडू से 450 किलोमीटर दूर अच्छम जिले के गजारा गांव में यह घटना हुई है। 15 साल की रोशनी तिरुवा का शव उस झोपड़ी में पाया गया था, जहां पर वो माहवारी के दिनों में रह रही थी।
मामले के स्थानीय मीडिया के बाद दुनियाभर में सुर्खियां मिलने के बाद नेपाल पुलिस रोशनी तिरुवा की मौत की जांच कर रही है। ये मामला बीते शनिवार का बताया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि जिस झोपड़ी में रोशनी रह रही थी वो झोपडी बहुत छोटी है और उसमें कोई खिड़की या रोशनदान नहीं है। झोपडी में सीलन की वजह से लड़की ने ठंड से बचने के लिए आग जलाई जिसमें उसका दम घुट गया और उसकी मौत हो गई।
नेपाल में माहवारी के दौरान महिलाओं को अछूत मानने और घर से दूर रखने की कुप्रथा बहुत पुरानी है। हालांकि नेपाल सरकार ने 2005 में इस पर रोक लगा दी थी लेकिन नेपाल के कई हिस्सों में खासकर पश्चिम नेपाल में आज भी ये प्रथा ज्यों की त्यों है।
माहवारी के दौरान महिलाओं के साथ होता है ये सब
नेपाल में बहुत से इलाकों में जारी एक प्रथा के मुताबिक उस समय स्त्रियों को अपवित्र माना जाता है, जब उन्हें रक्तस्त्राव होता है। माहवारी के साथ-साथ बच्चे को जन्म के बाद रक्तस्त्राव के दौरान जच्चा को भी अपवित्र माना जाता है। इस प्रथा को छौपदी कहा जाता है।
नेपाल के कई समुदायों में मान्यता है कि अगर माहवारी में गुजर रही महिला को घर पर रखा गया तो कोई कुदरत की तरफ से कोई तबाही भेज दी जाएगी क्योंकि उसके रहने से घर अपवित्र हो जाएगा।
इस प्रथा छौपदी के दौरान माहवारी से गुजर रही लड़कियों को खाना भी एक वक्त ही दिया जाता है। दूध और दूध से बने उत्पाद भी लड़कियों को नहीं दिए जाते हैं।
माहवारी के दौरान महिलाओं को घर से अलग किसी कुटिया या फिर पशुओं के बाड़े में रखा जाता है। वहीं पर उनको आधापेट खाना पहुंचाया जाता है।












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