14 वर्ष की बेटी को डायबिटीज होने की बात मां ने छिपाई, अब हत्‍या के आरोप में जेल की सजा

इलिनियॉस। अमेरिका के राज्‍य इलिनियॉस में एक 39 वर्षीय महिला अंबर हैंपशायर को गिरफ्तार किया गया है। इस महिला पर आरोप है कि उसने मधुमेह से पीड़‍ित अपनी 14 वर्षीय बेटी की हालत को पांच वर्ष तक छिपाया। इस वजह से उनकी बेटी को सही उपचार नहीं मिल सका और उसकी मौत हो गई। गुरुवार को इस महिला की गिरफ्तारी हुई है। उनकी बेटी का नाम एमिली इक्‍यू रोज हैंपशायर था और तीन नवंबर को उसकी मौत हो गई थी। मां अंबर खुद एलटॉन पुलिस डिपार्टमेंट पहुंची थी और उन्‍होंने यह बात खुद पुलिस के सामने कुबूल की। फिलहाल उन्‍हें 100,000 बॉन्‍ड पर हिरासत में रखा गया है।

हो सकती है 10 वर्ष तक की सजा

हो सकती है 10 वर्ष तक की सजा

मैडिसन कांउटी स्‍टेट के अटॉर्नी थॉमस डी गिबसन ने इस घटना पर कहा है, 'यह काफी असाधारण और दुख की बात है और किसी को मरने से बचाया जा सकता था।' उन्‍होंने कहा कि राज्‍य में बेहतर डॉक्‍टर्स हैं जो ये बता सकते हैं कि कैसे डायबिटीज को नियंत्रित किया जा सकता है और कैसे कई लोगों की जिंदगियों को बचाया जा सकता है। केटोएसिडोसिस टाइप की डायबिटीज काफी मुश्किल प्रकार की बीमारी होती है। अगर इसका समय रहते इलाज नहीं किया गया तो फिर यह खतरनाक साबित हो सकती है। इंसुलिन की कमी से ब्‍लड शुगर बढ़ जाता है और खून में एसिडिक केटोंस का निर्माण होने लगता है। अगर अंबर पर आरोप सही साबित हुए तो फिर उन्‍हें तीन से 14 वर्षों तक जेल में बिताने पड़ सकते हैं। इसके अलावा एक नाबालिग की जान खतरे में डालने के आरोप में उन्‍हें आठ से 10 वर्ष की सजा हो सकती है।

एमिली के पिता को भी नहीं थी बीमारी की जानकारी

एमिली के पिता को भी नहीं थी बीमारी की जानकारी

गिबसन ने कहा कि पुलिस की जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि हैंपशायर ने किसी को भी अपनी बेटी की बीमारी के बारे में नहीं बताया था। यहां तक कि उन्‍होंने अपने पति से भी यह बात छिपाई। एमिली के पिता को अपने काम की वजह से अक्‍सर ट्रैवल करना पड़ता था। गिबसन के मुताबिक अंबर पर जो आरोप लगे हैं उसके तहत उन्‍होंने जान-बूझकर अपनी बेटी को मारा है। बीमारी छिपाने की वजह से उनकी बेटी वे सारे काम करती रही, जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई या फिर उसके शरीर को काफी नुकसान पहुंचा। एफिडेविट्स और मेडिकल रिपोर्ट्स से भी साफ होता है कि एमिली को डायबिटीज है इसका पता नवंबर 2013 में पहली बार लगा था। सेंट लुईस चिल्‍ड्रेन्‍स हॉस्पिटल में उसकी जांच के दौरान यह बात सामने आई थी। इसके बाद उसे और उसकी मां को बीमारी के बारे बताया गया। दोनों को इस बात की भी जानकारी दी गई कि उन्‍हें इस दौरान कैसे बीमारी को नियंत्रित करना है।

रेगुलर चेक-अप के लिए भी नहीं गई अस्‍पताल

रेगुलर चेक-अप के लिए भी नहीं गई अस्‍पताल

फरवरी माह में एमिली को इसी अस्‍पताल में न्‍यूमोनिया और केटोएसिडोसिस डायबिटीज की वजह से भर्ती कराया गया था। यहां पर उसके लिए इंसुलिन को रूटीन मेडिसन के तौर पर डॉक्‍टरों ने लेने के लिए कहा था। अस्‍पताल की ओर से मां अंबर और बेटी एमिली को डाइट को लेकर सख्‍त निर्देश दिए गए थे। इसके साथ ही डॉक्‍टरों ने उन्‍हें कहा था कि तीन बार उन्‍हें अस्‍पताल आना पड़ेगा और चेक-अप कराना होगा। लेकिन एमिली और उसकी मां कभी भी अप्‍वाइंटमेंट्स पर अस्‍पताल नहीं आते। इस बात की भी कोई जानकारी नहीं है कि एमिली डॉक्‍टरों की ओर से निर्देशित इंसुलिन के पर्याप्‍त डोज दिए गए या नहीं। एक नवंबर को एमिली के माता-पिता ने उसे बेहोशी की हालत में पाया था और इससे पहले दो दिनों तक उसकी तबियत खराब थी। एमिली को जब अस्‍पताल ले जाया गया तो वह कार्डियक अरेस्‍ट की हालत में थी।

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