वर्जिनिटी टेस्ट पर स्कॉलरशिप पर शुरू हुआ विवाद
जोहांसबर्ग। खबर सुनकर आप चौंक सकते हैं लेकिन यह सच है। साउथ अफ्रीका की एक मेयर ने उन लड़कियों के लिए स्कॉलरशिप योजना शुरू की है जो वर्जिनिटी टेस्ट में पास हो जाती है।

यह स्कीम क्वाजुलु-नटाल के एमसीशीनी गांव के एक स्कूल में इस स्कीम की शुरुआत हुई है। 16 लड़कियों को इस स्कीम के तहत स्कॉलरशिप दी गई है।
इस स्कीम की शुरुआत के साथ ही एक बहस शुरू हो गई है। आलोचकों का कहना है कि यह स्कीम अलोकतांत्रिक है और भेदभाव करने वाली है।
वहीं स्कीम के कुछ समर्थकों का कहना है कि टेस्ट और वर्जिनिटी की रक्षा करना संस्कृति का हिस्सा है।
समर्थकों की मानें तो स्कीम से उन लड़कियों को काफी मदद मिल सकती है जिनके पास पैसे नहीं हैं। वे लड़कियां सिर्फ पढ़ाई पर फोकस रखकर आगे बढ़ेंगी।
साथ ही इससे अनचाहे गर्भ, एचआईवी और एड्स से भी उनकी रक्षा हो सकेगी। स्कीम की शुरुआत करने वाली मेयर डुडु माजिबुको का कहना है कि कम उम्र की लड़कियों को पैसे वाले लड़कों से प्यार हो जाता है।
वह बीमार हो जाती हैं और फिर गर्भवती होकर उनकी पूरी जिंदगी खराब हो जाती है। वह मानती हैं कि कम उम्र की लड़कियों पर खतरा ज्यादा रहता है, इसलिए यह स्कीम जरूरी है।
लड़कियां जब छुट्टी में अपने घर जाएंगी, उन्हें यह टेस्ट पास करना होगा। टेस्ट में फेल होने पर लड़कियों को कोई स्कॉलरशिप नहीं मिलेगी। अब तक 100 लड़कियों का टेस्ट किया जा चुका है।
22 वर्ष की फार्मा स्टूडेंट को यह स्कॉलरशिप हासिल हुई है। उसका कहना है कि उसे इस टेस्ट को पास करने में काफी गर्व की अनुभूति हो रही है।
इस लड़की ने बताया उसके पिता गरीब हैं और उनकी दो पत्नियां हैं। वह उसकी पढ़ाई का खर्चा नहीं उठा सकते हैं, इसलिए इस टेस्ट को देने में कोई बुराई उसे नहीं लगती है।












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