ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से भारत को होने वाले पांच फायदे

इस सवाल के जवाब तो ढेरों हैं, लेकिन कुछ जवाब ऐसे हैं, जो भारत को आगे चलकर न केवल आर्थिक रूप से और ज्यादा शिक्तिशाली बनायेगा, बल्कि आने वाले संकटों से बचने के उपाये खोजेगा।
15 और 16 जुलाई को आयोजित होने वाले इस शिखर सम्मेलन में अगर नरेंद्र मोदी का जादू चल गया, तो आने वाले समय में ब्रिक्स डेवलपमेंट बैंक का हेडक्वार्टर देश की राजधानी नई दिल्ली में होगा।
जी हां ऐसे कई और फायदे हैं, जो भारत को मिल सकते हैं। तो आइचे एक नजर डालते हैं उन फायदों पर-
- इस शिखर बैठक के टॉप एजेंडे में वर्ल्ड बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक की तर्ज पर ब्रिक्स देशों का एक नये डेवलपमेंट बैंक की स्थापना करना है। भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए भी काफी अहम है क्योंकि भारत ने ही इसकी पहल की थी। बैंक के बनने पर जब अन्य देशों को इसका लाभ मिलेगा तब ब्रिक्स देशों के बीच भारत का कद और ऊंचा हो जायेगा।
- 100 मिलियन डॉलर की पूंजी वाले इस बैंक के स्थापित होने पर भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए आसानी से धन मुहैया कराया जा सकेगा। ऐसा होने पर भारत को विश्वबैंक व आईएमएफ पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
- इस बैंक की चर्चा भारत के लिए और भी अहम है क्योंकि इसके हेडक्वार्टर की स्थापना चीन के शंघाई या भारत की नई दिल्ली में करने की बात चल रही है। हालांकि साउथ अफ्रीका के जोहांसबर्ग का नाम भी चर्चा में है। अगर दिल्ली में हेडक्वार्टर होता है, तो भारत को ज्यादा लाभ मिल सकते हैं।
- इस बार ब्रिक्स सम्मेलन ब्राजील यानी दक्षिण अमेरिकी देश में आयोजित हो रहा है। भारत के अमेरिका के इस हिस्से के साथ संबंध उतने बेहतर नहीं हैं और इसके बाद ये संबंध बेहतर हो सकेंगे।
- सूत्रों की मानें तो इस बार नरेंद्र मोदी बतौर भारत के प्रधानमंत्री हर उस संगठन को मजबूत करना चाहते हैं जो अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर भारत की अहमियत को बढ़ा सकता है।












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