रोहिंग्या मुसलमानों को फिर देश से भगा रहा म्यांमार, सेना की हिंसा के बाद गृहयुद्ध, अब कौन देगा शरण?
Rohingya flee Myanmar: म्यांमार में एक फरवरी 2021 को सैन्य शासन लागू हुआ था और उसके बाद से ही देश में युद्ध छिड़ गया। अभी तक हजारों लोग सेना के साथ युद्ध में मारे जा चुके हैं और पिछले कई महीनों से म्यांमार में गृहयुद्ध चल रहा है।
लेकिन, अब म्यांमार की सेना ने रोहिंग्या मुसलमानों को फिर से देश से भगाना शुरू कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, म्यांमार के राखीन राज्य में बढ़ती हिंसा के बीच 45,000 से ज्यादा रोहिंग्या मुसलमानों को भगा दिया गया है।

वहीं, संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है, कि म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के सिर काटे जा सकते हैं, उनकी हत्या की जा सकती है और उनकी संपत्ति को जलाया जा सकता है। वहीं, म्यांमार की घटना पर नजर रखने वाले कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है, कि रोहिंग्या मुसलमानों के बीच अफवाह फैली है, कि लोगों के सिर काटे जा रहे हैं, लिहाजा हजारों की संख्या में रोहिंग्या मुस्लिमों ने देश से भागना शुरू कर दिया है।
म्यांमार से भाग रहे रोहिंग्या मुसलमान
नवंबर में राखीन राज्य में विद्रोहियों की सेना अराकान सेना और सत्ता पर कब्जा करने वाली सैन्य सरकार के बीच भीषण युद्ध छिड़ चुका है। हालांकि, कुछ दिनों के लिए युद्धविराम जरूर किया गया था, लेकिन ये युद्ध एक बार फिर से भड़क गया है। लिहाजा, इस गृहयुद्ध के बीच रोहिंग्या मुसलमान फंस गये हैं।
म्यांमार के विद्रोही हों या सेना, उनमें से ज्यादातर बौद्ध धर्म मानने वाले लोग हैं और वो रोहिंग्या मुस्लिमों को म्यांमार के नागरिक नहीं मानते हैं। उनका कहना है, कि रोहिंग्या मुसलमान बाहरी हैं, लिहाजा उनके ऊपर दोतरफा हमले हो रहे हैं।
अराकान आर्मी का कहना है, कि वह राज्य में जातीय राखीन आबादी के लिए ज्यादा से ज्यादा स्वायत्तता के लिए लड़ रहा है। वहीं, इस राज्य में करीब 6 लाख रोहिंग्या मुस्लिम रहते हैं, जिन्होंने देश में रहने का विकल्प चुना है, लेकिन अब उन्हें भागने पर मजबूर कर दिया गया है।
इससे पहले राखीन राज्य से करीब 10 लाख रोहिंग्या मुसलमान पहले ही साल 2017 में भाग चुके हैं, जब देश की सेना ने उनके खिलाफ अभियान चलाया था। ये सभी रोहिंग्या मुस्लिमों ने अभी बांग्लादेश में शरण ले रखी है। और म्यांमार की सेना के खिलाफ यूनाइटेड नेशंस में नरसंहार का मुकदमा चल रहा है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की प्रवक्ता एलिजाबेथ थ्रोसेल ने शुक्रवार को जिनेवा में संवाददाताओं से कहा, कि हाल के दिनों में बुथिदौंग और माउंगडॉ टाउनशिप में लड़ाई के कारण हजारों नागरिक विस्थापित हुए हैं। उन्होंने कहा, "अनुमानित तौर पर 45,000 रोहिंग्या सुरक्षा की तलाश में बांग्लादेश की सीमा के पास नफ़ नदी के क्षेत्र में भाग गए हैं।" उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार नागरिकों की सुरक्षा का आग्रह किया है।
उन्होंने कहा, कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क, बांग्लादेश और अन्य देशों से आग्रह कर रहे हैं, कि वे "अंतर्राष्ट्रीय कानून के मुताबिक, सुरक्षा की मांग करने वालों को प्रभावी सुरक्षा प्रदान करें, और म्यांमार में रोहिंग्या शरणार्थियों की मेजबानी में बांग्लादेश के साथ अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता सुनिश्चित करें।"
लेकिन, बांग्लादेश की सरकार ने और ज्यादा शरणार्थियों को देश में रखने से साफ इनकार कर दिया है। बांग्लादेश सरकार का कहना है, कि देश में पहले से ही 10 लाख रोहिंग्या शरणार्थी हैं और ये आए दिन हिंसक घटनाओं में शामिल रहते हैं। शेख हसीना सरकार ने रोहिंग्या मुस्लिमों पर आतंकवादी हरकतों में भी शामिल होने के आरोप लगाए हैं।
क्या रोहिंग्या मुस्लिमों के सिर किए जा रहे कलम?
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की म्यांमार टीम के प्रमुख जेम्स रोडहेवर ने उस भयावह स्थिति के बारे में बताया है, जिससे हजारों लोग भाग रहे हैं। उन्होंने कहा, कि उनकी टीम ने सबूत हासिल किए हैं और सैटेलाइट तस्वीरों, ऑनलाइन वीडियो से पता चलता है, कि बुथिडाउंग शहर "बड़े पैमाने पर लोगों के घरों को जला दिया गया" है।
उन्होंने कहा, कि "हमें जानकारी मिली है, कि आगजनी 17 मई को शुरू हुई थी... शहर से सेना के पीछे हटने के दो दिन बाद... और अराकान सेना ने गांव पर पूरा नियंत्रण लेने का दावा किया है।"
वहीं, जिंदा बचा एक शख्स, जो बुथिडाउंग शहर से भागने में कामयाब रहा है, उसने दर्जनों शवों को देखने का दावा किया है। चश्मदीद का कहना है, कि बुथिडाउंग शहर से निकलने वाले सड़कों को ब्लॉक कर दिया गया है। वहीं, भागने वाले लोगों का कहना है, कि शहर से बाहर निकलने के लिए उनसे जबरन पैसे वसूले जा रहे हैं और उनके साथ खराब व्यवहार किया जा रहा है।
यूएन अधिकारी रोडहेवर ने कहा, कि बुथिडाउंग शहर को जलाने से पहले के राखीन में चार रोहिंग्या नागरिकों के सिर कलम किए जाने के पुख्ता सबूत मिले हैं। उन्होंने कहा, कि टीम ने "सिर काटने के कम से कम चार मामलों" का दस्तावेजीकरण किया है।
रोहिंग्या को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल किए जाने के पहले भी आरोप लग रहे हैं। और तमाम रिपोर्ट्स में कहा गया है, कि 'रोहिंग्या बीच में फंस गया है।' वहीं, अलजजीरा की एक रिपोर्ट में कहा गया है, रोहिंग्या मुस्लिमों को विद्रोही फोर्स और देश की सेना, दोनों अपने अपने तरफ से लड़ने के लिए सेना में शामिल करने की कोशिस की है। रोहिंग्या मुस्लिमों को दोनों तरफ से धमकी दी जाती है, कि उन्होंने युद्ध में साथ नहीं दिया, तो उनके घर जला दिए जाएं।
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