अमेरिका में हर साल 3500 बच्चों की मौत, नींद से संबंधित समस्याएं हैं कारण
नींद से संबंधित समस्याओं के कारण अमेरिका में हर साल लगभग 3,500 बच्चे मर जाते हैं। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार हर साल इतने बच्चे नींद से संबंधित समस्याओं, सडन इन्फैंट डेथ सिंड्रोम और आकस्मिक घुटन के कारण अपनी जान गंवा देते हैं।
नई दिल्ली। नींद से संबंधित समस्याओं के कारण अमेरिका में हर साल लगभग 3,500 बच्चों की जान चली जाती है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार हर साल इतने बच्चे नींद से संबंधित समस्याओं, सडन इन्फैंट डेथ सिंड्रोम और आकस्मिक घुटन के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार 1990 के वक्त 'बैक टू स्लीप' कैंपेन के तहत डेथ रेट में सुधार आया था लेकिन उसके बाद से मौतें बढ़ती ही गईं।

सेंटर के डायरेक्टर ने इसपर कहा, 'दुर्भाग्य से, इस देश में बहुत से बच्चों की जान नींद से संबंधित समस्याओं के चलते चली गई, जिन्हें रोका जा सकता है।' सेंटर में शोधकर्ताओं ने 2015 के प्रेगनेंसी रिस्क असैसमेंट मॉनिटियरिंग सिस्टम डाटा की भी जांच की। इसमें मांओं ने असुरक्षित सोने की मुद्रा, बिस्तर का शेयर करना और सॉफ्ट बिस्तर का इस्तेमाल करना था।
असुरक्षित सोने की मुद्रा में बच्चे को बाप या मां की तरफ पेट के बल सुलाया जाता है। वहीं सॉफ्ट बेडिंग में तकिया, कंबल और खिलौने के साथ बच्चों को सुलाते हैं। पांच में एक मां ने कबूला की वो अपनी तरफ या पेट के बल सुलाती हैं। वहीं आधी मांओं ने माना की वो बच्चों को अपने साथ बिस्तर पर सुलाती हैं। 38.5 प्रतिशत मांओं ने माना की सोते वक्त बच्चों के आसपास खिलौने होते हैं।
सेंटर के डायरेक्टर ने कहा कि सभी को अमेरिकन अकेडमी ऑफ पीडियाट्रिशीयन की सिफारिशें पता होनी चाहिए। इसके अनुसार बच्चों को हमेशा पीठ के बल बिना खिलौने के पालने में सुलाना चाहिए। उनके अनुसार माता-पिता अपने बच्चे के साथ कमरा शेयर करें लेकिन बिस्तर नहीं। ये तरीका जोखिम को कम करने और बच्चों को नुकसान से बचाने में मदद करेगा।
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