'पुतिन ने शी जिनपिंग से बोला था झूठ', विश्वमंच पर फिर लौटे चीनी राष्ट्रपति, करीबी अधिकारी का दावा
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस हफ्ते वैश्विक मंच पर लौच आए हैं और उन्होंने करीब 3 सालों के बाद जाकर किसी वैश्विक कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
G-20 Summit: इंडोनेशिया के बाली में चल रहे जी20 शिखर सम्मेलन में कल अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई है और इस मुलाकात के बाद पूरी दुनिया को जो एक संदेश गया है, वो यही, कि अमेरिका और चीन के बीच जारी तनाव में थोड़ी कमी आई है। वहीं, बैठक के दौरान दोनों ही नेताओं ने 'आमने-सामने की मुलाकात की आवश्यकता' पर जोर दिया। लेकिन, इस बैठक को लेकर चीन के एक अधिकारी ने कहा है, कि यूक्रेन युद्ध शुरू करने को लेकन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शी जिनपिंग से झूठ बोला था।

वैश्विक मंच पर लौटे शी जिनपिंग
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस हफ्ते वैश्विक मंच पर लौच आए हैं और उन्होंने करीब 3 सालों के बाद जाकर किसी वैश्विक कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। इससे पहले शी जिनपिंग ने भारत, रूस और पाकिस्तान के साथ शंघाई सहयोग संगठन में शिरकत की थी, लेकिन जी20 शिखर सम्मेलन में शी जिनपिंग का आना और जो बाइडेन से मुलाकात में वैश्विक शांति की बात करना, संकेत दे रहा है, कि चीन वैश्विक मंच पर फिर लौट रहा है। हालांकि, जी20 के मंच पर ही यूक्रेन युद्ध को लेकर बीजिंग के तटस्थ होने के दावों की विश्वसनीयता का परीक्षण किया जाएगा। कोविड-19 महामारी के फैलने के बाद से शी जिनपिंग ने अपनी सारी यात्राएं स्थगित कर दीं थीं, हालांकि, वर्चुअल बैठकों में वो शामिल जरूर हो रहे थे, लेकिन बाइडेन से मुलाकात के दौरान उन्होंने आमने-सामने की मुलाकात पर जोर दिया।

क्या शी जिनपिंग हो रहे हैं नरम?
पिछले महीने सत्ता में तीसरा कार्यकाल हासिल करने के बाद से शी जिनपिंग की ये पहली डिप्लोमेटिक कोशिश है। हालांकि, पुतिन ने जब जी20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेने की बात कही, तो शी जिनपिंग के लिए रास्ते और आसान हो गये और यही भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ भी हुआ है, क्योंकि अब उन्हें वहां पुतिन से मुलाकात संबंधित किसी तरह की डिप्लोमेटिक परेशानी में फंसना नहीं पड़ेगा। लेकिन, सवाल ये है, कि क्या यूक्रेन पर पश्चिमी देशों की स्थिति शी जिनपिंग के लिए स्थिति को असहज करने वाली होगी? क्योकि जी20 के एजेंडे में यूक्रेन सबसे अहम है और शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन की "दोस्ती की सीमा नहीं" वाली शपथ क्या कमजोर होगी? ये जी20 शिखर सम्मेलन के खत्म होने के बाद ही पता चल पाएगा। शी जिनपिंग और पुतिन के बीच यूक्रेन युद्ध शुरू होने से 20 दिन पहले बीजिंग में मुलाकात हुई थी और फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, चीनी अधिकारियों ने कहा है, कि पुतिन ने शी जिनपिंग से झूठ बोला था।

पुतिन ने जिनपिंग से सच छिपाया?
फरवरी महीने में शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई बैठक में शामिल चार अधिकारियों के हवाले से फाइनेंशियल टाइम्स ने कहा है, कि पुतिन ने शी जिनपिंग को यूक्रेन पर आक्रमण को लेकर कोई चेतावनी नहीं दी थी और इसीलिए यूक्रेन में रहने वाले हजारों चीनी नागरिकों की जान खतरे में पड़ गई। एक चीनी अधिकारी ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि, "पुतिन ने शी जिनपिंग को सच नहीं बताया।" अधिकारी ने कहा कि, "अगर उन्होंने हमें बताया होता, तो हम इतनी अजीब स्थिति में नहीं होते।" अधिकारी ने कहा कि, "यूक्रेन में 6 हजार से ज्यादा चीनी नागरिक थे और उनमें से कई नागरिकों की मौत उन्हें युद्ध के दौरान यूक्रेन से निकालने में हो गई, (हालांकि) हम इसे सार्वजनिक नहीं कर सकते।" पिछले महीने एक भाषण में पुतिन ने कहा था कि, उन्होंने अपने "करीबी दोस्त" शी जिनपिंग को फरवरी में आक्रमण के बारे में नहीं बताया। रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि देशों के संबंधों की ताकत "अभूतपूर्व" थी।

लेकिन, क्या बदल पाएगा चीन?
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का वरिष्ठ नेतृत्व अब शी जिनपिंग के वफादारों से भरा पड़ा है, जो रूस के साथ घनिष्ठ संबंधों को सबसे ज्यादा महत्व देता है और उनका मानना है, कि रूस पर लगाए गये व्यापारिक प्रतिबंधों को असफल करने के लिए चीन की कोशिशें जरूरी हैं। वहीं, ये अधिकारी चीन के खिलाफ लगाए गये अमेरिका के टेक्नोलॉजी प्रतिबंध पर भी गुस्से में हैं। इसके साथ ही ताइवान के मुद्दे पर भी चीन में भारी गु्स्सा है और चीन सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है, कि ताइवान को चीन में मिलाने के रास्ते में सबसे बड़ा बाधा अमेरिका है और ताइवान पर अमेरिका का बोलना उसके संप्रभुता का उल्लंघन है। शंघाई में फुडन विश्वविद्यालय के एक अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञ नी शिशिओंग ने कहा कि, चीनी सरकार ने यूक्रेन में परमाणु हथियारों के संभावित उपयोग के संबंध में पुतिन की धमकियों के प्रति अपनी नाराजगी का संकेत देने के लिए जितना हो सके, उतना किया है। उन्होंने कहा कि, चीन और रूस एक दूसरे पर भरोसा करते हैं और शी जिनपिंग ने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का सार्वजनिक विरोध कर अमेरिका और उसके सहयोगियों का ही साथ दिया है। ऐसे में कहना काफी मुश्किल है, कि चीन अपनी विदेश नीति को बदल पाएगा और शी जिनपिंग और बाइडेन की मुलाकात के दूरगामी परिमाण निकल पाएंगे।
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