15,000 और आतंकी अफगानिस्तान में घुसने को तैयार, कैसे तालिबान की मदद कर रहा है पाकिस्तान, जानिए
काबुल, 30 जुलाई: तालिबान से पाकिस्तान की साठगांठ को लेकर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान लगातार विरोधाभासी बयान दे रहे हैं। कभी कहते हैं कि तालिबान तो आम नागरिक हैं और कभी कहते हैं कि वह उसके प्रवक्ता नहीं हैं। यही नहीं कभी वह तालिबान के नाम पर अफगानिस्तान को भी धमकाने लगते हैं तो कभी उसी के नाम पर भारत के सामने भी उछलने-कूदने की कोशिश करते नजर आते हैं। खासकर, जब से तालिबान, चीन और पाकिस्तान की तिकड़ी बनी है, अफगानिस्तान के मसले पर पाकिस्तान के हौसले और ज्यादा बुलंद हो गए हैं। अब पाकिस्तानी पीएम की झूठ का अफगानिस्तान सरकार ने एकबार फिर से पर्दाफाश किया है। वह तो कह रहे थे कि पाकिस्तानी कैंपों में सिर्फ तालिबान के नाम पर वहां के आम नागरिकों को रखा जा रहा है। लेकिन, अफगान सरकार ने दावा किया है कि असल में वहां तालिबान के आतंकियों को ट्रेनिंग देकर अफगानिस्तान में घुसाया जा रहा है। 10 हजार से ज्यादा पाकिस्तानी आतंकी घुस चुके हैं और 15 हजार अलग से दाखिल होने के लिए तैयार हैं।

15,000 और आतंकी अफगानिस्तान में घुसने को तैयार
अफगान सरकार ने कहा है कि 10,000 से ज्यादा पाकिस्तानी आतंकवादी अफगानिस्तान घुस चुके हैं। इतना ही नहीं अफगानिस्तान सरकार ने यहां तक कहा है कि तालिबान के आतंकवादियों को पाकिस्तानी संस्थाओं में ट्रेनिंग दी गई है और इसका पूरा खर्चा इमरान खान की सरकार उठा रही है। अफगानिस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक मीडिया को भेजे एक वीडियो संदेश में अफगानी राष्ट्रपति अशरफ गनी के प्रवक्ता ने कहा है कि अफगानिस्तान में छद्म युद्ध जारी रखने के लिए हजारों आतंकी पाकिस्तान से दाखिल हो चुके हैं। इस संदेश में कहा गया है, 'हमारे पास पुख्ता खुफिया रिपोर्ट हैं कि पाकिस्तान से 10,000 से ज्यादा पाकिस्तानी अफगानिस्तान में घुस चुके हैं, जबकि 15,000 और को इसके लिए प्रोत्साहित किया जा चुका है। इससे जाहिर होता है कि वहां तालिबान को संस्थागत रूप से लगातार ट्रेनिंग दी जा रही है और उसपर खर्च किया जा रहा है।'

अफगानी राष्ट्रपति लगा चुके हैं इमरान को लताड़
इससे पहले अफगानी राष्ट्रपति ने इसी महीने एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तानी पीएम इमरान खान खान की मौजूदगी में कहा था कि सिर्फ एक महीने में ही 10,000 विदेशी आतंकवादी पाकिस्तान से अफगानिस्तान में घुसे हैं। उन्होंने इसके लिए इमरान को खूब लताड़ा था कि पाकिस्तान जिहादी आतंकियों पर लगाम लगाने के लिए आतंकी संगठनों के साथ अपनी साठगांठ नहीं खत्म कर रहा है। यही नहीं, उन्होंने यह भी कहा था कि इमरान सरकार तालिबान के साथ जारी शांति बातचीत में भी 'गंभीरता से वार्ता' के लिए तालिबान को मनाने में नाकाम रही है। अफगान सरकार लंबे समय से कहती रही है कि तालिबान की लड़ाई दरअसल अफगानिस्तान में पाकिस्तान का छद्म युद्ध है। हाल ही में अफगानिस्तान के पूर्व इंटेलिजेंस चीफ रहमतुल्ला नबिल ने भी कहा था कि कम से कम 1,000 पाकिस्तानी आतंकवादी स्पिन बोल्डक बोर्डर के जरिए रोजाना अफगानिस्तान में दाखिल हो रहे हैं। इस सीमावर्ती जिले को पिछले हफ्ते ही तालिबान ने अपने कब्जे में ले लिया है।

यूएन की रिपोर्ट ने भी की अफगानिस्तान के दावों की पुष्टि
अफगानिस्तान से अमेरिकी और नाटो सैनिकों के पूरी तरह से निकलने में कुछ ही हफ्ते बच गए हैं। इसके चलते अफगानिस्तान में हिंसा बहुत ज्यादा बढ़ गई है, क्योंकि तालिबान ने आम नागरिकों के साथ-साथ अफगान सैनिकों के खिलाफ भी आक्रामकता काफी बढ़ा दी है। उधर यूनाइटेड नेशन की रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान में कई देशों के आतंकवादी और आतंकवादी संगठन सक्रिय हैं। यूएन एनालिटिकल सपोर्ट एंड सैंक्शंस मॉनिटरिंग टीम की 28वीं रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तानी आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान (टीटीपी) का तालिबान से साठगांठ कायम है और इसके करीब 6,000 आतंकवादी अफगानिस्तान सीमा के अंदर हैं।












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