India's First Service Center : इंदौर के यंत्रिका गैराज में महिला मैकेनिक करती हैं वाहनों की रिपेयरिंग-सर्विस
इंदौर, 4 जनवरी। आधी आबादी का ये पूरा सच है कि यह कोमल पर कमजोर नहीं। पुरुषों से किसी मामले में कमतर नहीं। बात चाहे तकनीकी ज्ञान की ही क्यों ना हो? महिलाओं को मौका मिलने पर ये भी अपना हूनर दिखा सकती हैं। इस बात का उदाहरण है मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित महिला मैकेनिक गैराज 'यंत्रिका'।

इंजन तक खोल देती हैं महिलाएं
आपको यह जानकर ताज्जुब होगा कि मैकेनिक गैराज यंत्रिका पर दो पहिया वाहनों की रिपेयरिंग से लेकर सर्विस तक का सारा काम महिलाएं खुद करती हैं। टू व्हीलर के इंजन का तो पुर्जा-पुर्जा खोलकर उसे ठीक करने में तो इन्हें महारत हासिल है।

देश का पहला गैराज 'यंत्रिका'
मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में महिला मैकेनिक गैराज यंत्रिका के बाहर लगे बैनर पर यह दावा किया जा रहा है कि अपने आप में इस तरह का देश का पहला गैराज है। इस गैराज के शुरू होने और महिलाओं को आत्मनिर्भन बनाने की यह पूरी कहानी प्रेरित करने वाली है।

समान सोसायटी के राजेंद्र बंधु का इंटरव्यू
वन इंडिया हिंदी से बातचीत में राजेंद्र बंधु यंत्रिका गैराज शुरू करने से लेकर महिलाओं के आमदनी होने तक सफर बयां किया। राजेंद्र बंधु इंदौर में संचालित एनजीओ समान सोसायटी से जुड़े हैं। इन्हीं के प्रयासों से यंत्रिका सर्विस सेंटर कंपनी बनी, जिसके ये डायरेक्टर हैं।

पहले बनाया चालक, अब मैकेनिक
राजेंद्र बंधु बताते हैं कि हम पिछले कई सालों से महिलाओं को रोजगार मुहैया करवाने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं और सफल भी हो रहे हैं। पहले तीन सौ महिलाओं को चालक का प्रशिक्षण दिया, जिनमें से 200 महिलाएं बतौर ड्राइवर इंदौर में वाहन दौड़ाकर अपना परिवार पाल रही हैं।

इंदौर में जल्द खुलेगा तीसरा महिला मैकेनिक गैराज यंत्रिका
फिलहाल इंदौर में दो महिला मैकेनिक गैराज यंत्रिका संचालित हैं। एक पिपलियाहाना क्षेत्र और दूसरा पालदा में। महीनेभर में तीसरा गैराज खोले जाने की उम्मीद है। उसकी योजना पर काम चल रहा है। इंदौर के बाद यंत्रिका गैराज देश के अन्य हिस्सों में भी नजर आ सकता है।

कौन हैं यंत्रिका गैराज वाली महिलाएं?
इंदौर के यंत्रिका गैराज वाली महिलाएं कोरोना काल से पहले तक गृहिणियां थीं, मगर अब ये मैकेनिक हैं। इन्हें समान सोसायट के माध्यम से इंदौर स्थित संस्था के सेंटर पर तीन माह की ट्रेनिंग दी गई और फिर एक माह तक गैराज में इंटर्नशिप करवाई गई। काम में निपुण होने के बाद इन्हें गैराज पर नौकरी पर रख लिया गया।

30 महिलाओं को दूसरी कंपनियों में नौकरी
राजेंद्र बधु के अनुसार साल 2019 और 2020 में इंदौर की करीब 200 महिलाओं को मैकेनिक का प्रशिक्षण दिया गया था। इनमें तीस महिलाओं को सात से 11 हजार रुपए में दूसरी वाहन कंपनियों के गैराज में प्लेसमेंट करवाया गया। आठ महिलाएं पालदा व पिपलियाहाना स्थित यंत्रिका गैराज में काम कर रही हैं।

ये महिलाएं संभालती हैं यंत्रिका गैराज
इंदौर के दोनों यंत्रिका गैराज पर आठ महिलाएं काम कर रही हैं। इनमें शिवानी रघुवंशी, दुर्गा मीणा, सरोज रावत, सपना जादव, बंटी जयसवाल, भगवती वर्मा, रूचि सोलंकी व आशा शामिल है।

महिलाओं के बच्चों को कौन संभालता है?
एमपी के इंदौर का महिला मैकेनिक यंत्रिका के बारे में जानकर आपके भी मन में सवाल उठ रहा होगा कि सुबह दस से शाम छह बजे तक महिलाएं गैराज पर काम करती हैं तो इनके बच्चों को कौन संभालता है? दरअसल गैराज में उन महिलाओं को फुल टाइम काम दिया जा रहा है, जिनके बच्चे बड़े हो चुके हैं। छोटे बच्चों वाली महिलाओं को पार्ट टाइम जॉब का विकल्प दे रखा है।

महिला मैकेनिकों की कमाई
राजेंद्र बंधु की मानें तो महिला मैकेनिक यंत्रिका पर काम करने वाली प्रत्येक महिला हर माह सात से 11 हजार रुपए तक कमा लेती है। गैराज में रोजाना जो भी कमाई होती है वो यंत्रिका सर्विस सेंटर के बैंक खाते में जमा करवा दी जाती है। फिर माह के अंत में प्रत्येक महिला मैकेनिक द्वारा किए गए काम के हिसाब से तनख्वाह का भुगतान कर दिया जाता है।












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