Indore News: परदेशीपुरा में डॉक्टर के सामने मरीज मौत, हार्ट अटैक आने से पहले करा रहा था चेकअप
Indore News: इंदौर के परदेसीपुरा क्षेत्र में शनिवार रात को एक व्यक्ति की कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई, जब वह डॉक्टर के पास चेकअप कराने पहुंचा। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें व्यक्ति डॉक्टर के सामने गिरते हुए दिख रहा है।
घटना की जानकारी
मृतक सोनू पिता देवीदास मतकर, जो शिवाजी नगर का निवासी और ऑटो चालक था, ने रात करीब सवा 8 बजे भाग्यश्री अस्पताल पहुंचा। उसे घबराहट और बैचेनी महसूस हो रही थी।

सोनू ने डॉक्टर को अपनी समस्या बताई और डॉक्टर ने उसकी जांच की। अचानक, सोनू गिर पड़ा और स्थिति गंभीर हो गई। उसे तत्काल सीएचएल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने पुष्टि की कि सोनू की मौत कार्डियक अरेस्ट के कारण हुई है।
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पुलिस और डॉक्टर के बीच विवाद
घटना की सूचना देने के बाद, डॉक्टर ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी ने विवाद किया। सोनू के पास मिले आधार कार्ड से डॉक्टर ने उसके घर का पता निकाला और परिवार को सूचना दी। हालांकि, जब अस्पताल से पुलिस को कॉल किया गया, तो टीआई पंकज द्विवेदी ने फोन नहीं उठाया। इसके बाद, थाने पर कॉल करने पर एएसआई शोभाराम अटेरिया ने फोन उठाया। डॉक्टर ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी ने उनके साथ बहस की।
सोनू जब अस्पताल पहुंचा था, तब उसके साथ कोई परिजन नहीं था। डॉक्टर ने खुद पुलिस को सूचित किया और परिवार को जानकारी दी, जिससे वे अस्पताल पहुंच सके।
घटना का वीडियो भी आया सामने
घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें सोनू को डॉक्टर के सामने गिरते हुए देखा जा सकता है। इस वीडियो ने घटना की गंभीरता को और स्पष्ट कर दिया है।
इस घटना से न केवल चिकित्सकीय व्यवस्था बल्कि पुलिस और डॉक्टर के बीच के विवाद भी उजागर हुए हैं। अब तक मामले की जांच जारी है और पुलिस द्वारा उचित कार्रवाई की जा रही है।
घटना की विस्तृत जानकारी
मृतक सोनू पिता देवीदास मतकर, जो शिवाजी नगर का निवासी और ऑटो चालक था, ने शनिवार रात करीब सवा 8 बजे भाग्यश्री अस्पताल पहुंचा। उसे घबराहट महसूस हो रही थी और डॉक्टर सुयश ठाकुर ने उसकी जांच की। अचानक सोनू गिर पड़ा, जिसे देखकर डॉक्टर ने उसे संभालने का प्रयास किया। उन्होंने पानी छींटा और सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) दिया, लेकिन सोनू के परिजन उपस्थित नहीं थे और अस्पताल में इलाज के पर्याप्त साधन नहीं थे। इस वजह से उन्होंने इलाज शुरू नहीं किया और पुलिस को सूचना दी।
पुलिस की देरी और विवाद
डॉ. ठाकुर के अनुसार, पुलिस को सूचना देने के बावजूद वे देर से पहुंची। पुलिसकर्मी आने में करीब एक घंटे का समय लगा। इस दौरान डॉक्टर ने खुद सोनू के परिजनों को ढूंढा और उन्हें जानकारी दी। पुलिस पहुंचने पर डॉक्टर ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें डांटा, जबकि उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी थी कि वे जल्द से जल्द मौके पर पहुंचें।
डॉक्टर ठाकुर ने बताया कि अगर पुलिस समय पर पहुंच जाती, तो सोनू की जान बचाई जा सकती थी। मरीज की पल्स तब तक चल रही थी जब तक उसे नर्सिंग होम से सीएचएल अस्पताल ले जाया गया।
मर्ग कायम
पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम किया है और घटना की जांच की जा रही है। इस घटना ने चिकित्सा सुविधा और आपातकालीन सेवाओं में सुधार की आवश्यकता को और स्पष्ट कर दिया है।












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