Indore Temple Accident: बावड़ी में डूबे लोगों की जान बचाते-बचाते हुए खुद डूब गए साइकिलिस्ट सुनील सोलंकी

इंदौर के बावड़ी हादसे में शहर के प्रतिष्ठित साइकिलिस्ट सुनील सोलंकी की भी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि सुनील ने खुद को बचा लिया था, लेकिन दूसरों की जान बचाने के चक्कर में वे खुद डूब गए।

Indore Temple Accident: Cyclist Solanki himself drowned while saving lives of drowned people

इंदौर बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर हादसे में 36 लोगों की जान चली गई, लेकिन इस हादसे में एक ऐसे जिंदादिल इंसान की जान चली गई, जो विश्व स्तर पर साइकिलिंग के लिए जाने जाते थे। बीती रात बावड़ी में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस प्रशासन की टीम लगातार सुनील सोलंकी को खोजते रही, लेकिन सुबह उनकी डेड बॉडी ही बावड़ी ही बाहर आई। स्थानीय लोग सुनील के शव को देखकर भावुक हो गए। दरअसल सुनील के बारे में बताया जा रहा है कि वह हर पल लोगों को जिंदगी बांटने का काम करते थे। कल हुए हादसे में भी सुनील लोगों को बावड़ी के भीतर से निकलने में मदद कर रहे थे, लेकिन किसी ने बचने के लिए उन्हें पकड़ लिया जिससे वो पानी में डूब गए।

इंदौर के प्रतिष्ठित साइकिलिस्ट

सुनील सोलंकी इंदौर के प्रतिष्ठित साइकिलिस्ट में प्रतिदिन औसतन 60 से 65 किलोमीटर साइकिल चलाते थे। प्रातः 4:30 बजे से साईकिल लेकर निकलते थे और सुबह 10 बजे लौटे थे। बताया जा रहा है कि सुनील सोलंकी बहुत अच्छे तैराक भी थे, इसलिए बावड़ी में फंसे लोगों को बचाने का उनमें आत्मविश्वास रहा होगा, लेकिन यही आत्मविश्वास उनके लिए काल बन गया।

हादसे के पहले क्लाइंट से की थी बात

सुनील सोलंकी बहुत शानदार डिजाइनर भी थे। हाथ से वाले दिन मंदिर जाने से ठीक पहले उन्होंने अमृत महोत्सव की किताब का डिजाइन करने के लिए अपने एक क्लाइंट से आखरी बार फोन पर बात भी की थी। उनके आखिरी शब्द इस प्रकार थे "सर आज रामनवमी है। भगवान राम का नाम लेकर आज किताब फाइनल कर देंगे"। उसके बाद वे बेलेश्वर महादेव मंदिर दर्शन करने चले गए और यह हादसा हो गया।

इंदौर में पटेल नगर स्थित बालेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर पर बावड़ी धंसने से 36 लोगों की मौत

क्या है पूरा मामला

बता दे इंदौर में पटेल नगर स्थित बालेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर पर बावड़ी धंसने से 36 लोगों की मौत हो गई। वहीं कई लोग गंभीर घायल हो गए। उधर, अब हादसे के बाद अलग-अलग तरह की जानकारियां निकल कर सामने आ रही है, जिसमें यह बताया जा रहा है कि जिस मंदिर में यह हादसा हुआ है उस मंदिर के ट्रस्ट को रहवासियों की शिकायत के आधार पर नगर निगम ने अवैध निर्माण का नोटिस दिया था। इस नोटिस का जवाब देते हुए ट्रस्ट ने मंदिर में किसी तरह का कोई अवैध निर्माण नहीं होने की बात कही थी, साथ ही बावड़ी खोल देने का भरोसा भी दिलाया था, लेकिन लगातार नोटिस मिलने के बाद भी ट्रस्ट ने इस और ध्यान नहीं दिया, और श्रद्धालु अनहोनी का शिकार हो गए।

कैसे हुआ था हादसा

स्थानीय लोगों द्वारा बताया जा रहा है कि जिस मंदिर में यह हादसा हुआ है। वह लगभग 60 साल पुराना है। शहर के सपना संगीता रोड स्थित स्नेह नगर में स्थित इस मंदिर में राम नवमी के अवसर पर 50 से ज्यादा लोग बावड़ी की छत पर बैठकर हवन कर रहे थे, तभी अचानक वजन ज्यादा होने से बावड़ी पर डली छत धंस गई, जिसके चलते बावड़ी पर बैठे 50 से ज्यादा लोग बावड़ी में समा गए। हादसे के बाद घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने राहत और बचाव कार्य शुरू किया, जिसमें लगभग 50 से ज्यादा लोगों को बाहर निकाला गया है, जिनमें से 35 लोगों की मौत हो गई, तो वहीं 18 लोग घायल बताए जा रहे हैं।

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