Indore News: पुजारी को आया सपना, खुदाई में निकली प्रतिमा, कुछ ऐसे हुआ खजराना गणेश का प्राकट्य
मश्यप्रदेश के इंदौर में भगवान खजराना गणेश मंदिर विराजमान है, जहां इस मंदिर में देश-दुनिया के लोग दर्शन और पूजन के लिए पहुंचते हैं। भगवान खजराना गणेश की प्रतिमा स्वयंभू है, जो भक्तों के मन की मुराद पूरी करती है।
गणेश उत्सव और अलग-अलग तीज त्योहार पर मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा नजर आता है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के दर्शन और पूजन के लिए मंदिर पहुंचते हैं। खजाना गणेश मंदिर में भगवान गणेश सिद्धि विनायक स्वरूप में विराजमान हैं।

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खजराना गणेश मंदिर के पुजारी धर्मेद्र भट्ट बताते हैं कि, भगवान गणेश जी का यह स्थान परमार कालीन है। कालांतर में जब मूर्तियों की तोड़फोड़ हो रही थी, उस वक्त जो यहां के पुजारी रहे होंगे उन्होंने प्रतिमा खंडित नहीं हो उस हिसाब से प्रतिमा को यहीं कहीं छुपा दिया था। एक दिन हमारी आठवीं पीढ़ी के मंगल भट्ट को भगवान ने स्वप्न दिया, और कहा कि, जहां तुम गाय चराते हो वहीं पर मैं विराजमान हूं। मेरी स्थापना करो, मैं गरीब ब्राह्मण हूं, आपकी पूजा अर्चना करने में असमर्थ हूं, आप यहां की महारानी अहिल्याबाई को यह स्वप्न दीजिए। उसी रात को देवी अहिल्याबाई को भी यह सपना आया, और भगवान ने मंगल भट्ट से स्थान पूछने और उस स्थान पर खुदाई करने की बात कही। अहिल्याबाई ने खुदाई करवाई तो थोड़ी ही खुदाई पर काले रंग की पाषाण की लगभग ढाई फीट ऊंची प्रतिमा यहां से निकली।
पुजारी धर्मेद्र भट्ट बताते हैं कि, अहिल्याबाई होल्कर की इच्छा थी की यह प्रतिमा राजवाड़ा के गोपाल मंदिर पर स्थापित की जाए, लेकिन उस वक्त जब इस प्रतिमा को उठाया गया, तो यह प्रतिमा नहीं हिली, जिसके बाद जब इस प्रतिमा को उसे स्थान पर विराजमान कर मंदिर बनाने का संकल्प लिया गया, तो प्रतिमा केवल दो लोगों ने उठकर स्थापित कर दी। यह स्वयंभू प्रतिमा है, जो अपनी इच्छा से यहां दर्शन भक्तों को देती है।
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