इंदौर: श्रद्धालुओं को नहीं था पता वो मौत की बावड़ी पर बैठे हैं, हादसे के एक दिन बाद की आंखों-देखी
इंदौर के बालेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर में हुए हादसे के बाद सभी 36 शवों को बावड़ी से निकाल लिया गया. वहीं हादसे के एक दिन बाद की आखों-देखी हादसे वाले दिन से भी दर्दनाक थी.

इंदौर में हुए दर्दनाक हादसे के बाद सभी शवों को बावड़ी से निकाल लिया गया है, जहां सभी शवों का एक-एक कर अंतिम संस्कार भी कर दिया गया है। पटेल नगर स्थित जिस बालेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर पर यह हादसा घटित हुआ, उस मंदिर में पिछले कई सालों से राम नवमी पर इसी तरह का धार्मिक अनुष्ठान हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया जाता था, लेकिन अबकी बार किसे पता था कि, यह धार्मिक अनुष्ठान किसी हादसे में परिवर्तित हो जाएगा, और 36 लोग इस हादसे में अपनी जान गवा बैठेंगे, जिस बावड़ी में यह हादसा हुआ, उस बावड़ी के ठीक ऊपर की तरफ भगवान की मूर्तियां लगी हुई थी, जिस पर विधि विधान के साथ चढ़ाई गई पूजन सामग्री इस बात की गवाह थी कि, हादसे से पहले लोगों ने यहां भगवान का विधि विधान के साथ पूजन अर्चन किया है। इतना ही नहीं, रोजाना मंदिर जाने वाले, और यहां पूजन अर्चन करने वालों की आंख भी नम है, जहां वे इस बात पर भी भरोसा नहीं कर पा रहे कि, जिस मंदिर में वे रोजाना भगवान के पूजा अर्चना के लिए पहुंचते थे। उस मंदिर की बावड़ी में 36 लोगों ने अपनी जान गंवा दी।

नए लोगों को नहीं थी जानकारी
वन इंडिया हिंदी से एक्सक्लूसिव बातचीत करते हुए, रोजाना मंदिर जाने वाले अशोक डालूका ने बताया की, मैं रोजाना मंदिर जाता था, हादसे के दिन भी सुबह साढ़े 7 बजे होने वाली आरती में शामिल हुआ था। राम नवमी पर हमेशा हवन होता था, साल 1982 में बावड़ी पर स्लैब डला था, ये पुराने लोगों को पता था, नए लोगों को इसकी जानकारी नहीं थी। हादसे के वक्त लगभग 100 लोग मौजूद थे। डालुका बताते हैं की, विकास मंडल की ओर से कई बार शिकायत भी हुई, और ट्रस्ट मंडल को नोटिस भी मिला था।

कुछ इस तरह हुआ था मंदिर निर्माण
वन इंडिया हिंदी से एक्सक्लूसिव बातचीत में स्थानीय रहवासी गोविंद अग्रवाल ने बताया कि, हम जब छोटे थे तब मैदान में से पानी निकालकर इसे क्रिकेट का मैदान बनाया था। उसी समय 45 साल पहले यहां वृक्ष लगाए गए थे, कंपाउंड वॉल भी हमारे लोगों की सहायता से बनवाई गई थी। उसी समय यहां पर एक टपरी बनी, और बताया गया कि भगवान की मूर्ति यहां प्रकट हुई है, उसके बाद लगातार मंदिर बढ़ता गया जब चरस, गांजे का नशा यहां होने लगा तो रहवासी क्षेत्र होने के चलते हमने शिकायत की फिर राजनीतिक सपोर्ट के चलते बावड़ी को कवर करना शुरू हुआ। इतना ही नहीं बावड़ी को किसी की स्पेशल इंजीनियर की मदद से कवर ना करते हुए 8 एमएम का सरिया डालकर बावड़ी को कवर कर दिया, और इतना बड़ा शेड बना दिया। अग्रवाल बताते हैं की, यदि इस पर ज्यादा वजन आ जाएगा तो 8 टन का सरिया इसे वहन नहीं कर सकता। वैसे भी 25 साल में पानी से निकलने वाली भाप के चलते सरिया खत्म हो जाता है, और आज हमारे घर परिवार के लगभग 45 लोग इस हादसे का शिकार हो गए।

मंदिर के बाहर लगी सूचना बन गई आखिरी सूचना
पटेल नगर स्थित जिस बालेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर में यह हादसा हुआ, उस मंदिर के बाहर लगे ब्लैक बोर्ड पर सूचना लिखी गई थी, जिसमें लिखा गया था कि, 30/03/2023 दिन गुरुवार सुबह 9 बजे नवरात्रि माता जी का हवन सभी भक्तों प्रेमी हवन में आहुति देवें, हवन के बाद भंडारा। बताया जाता है कि, रामनवमी पर आयोजित इसी हवन के वक्त बावड़ी पर डला स्लैब धंस गया, और हवन में मौजूद सभी लोग बावड़ी में समा गए। हवन में शामिल हुए लोगों को नहीं पता था कि, यह हवन उनकी जिंदगी का आखरी हवन होगा, और इसके बाद वे इस दुनिया से अलविदा हो जाएंगे।

एक साथ उठी सभी अर्थियाँ
पटेल नगर के बालेश्वर महादेव मंदिर में हुए हादसे का शिकार हुए पटेल नगर के रहवासियों की अर्थियां एक साथ उठी, जिनमें लगभग 11 अर्थियों को पटेल नगर धर्मशाला से अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। अंतिम संस्कार के वक्त परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल था। वहीं बड़ी संख्या में लोग दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे थे। अंतिम संस्कार से पहले अधिकारियों ने श्मशान घाट पहुंचकर व्यवस्था का जायजा लिया था, तो वहीं शुक्रवार की दोपहर सभी दिवंगत आत्माओं का अंतिम संस्कार कर दिया गया, जिस पटेल नगर में यह हादसा घटित हुआ है, उस पटेल नगर में शोक का माहौल व्याप्त है।
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