MP में COVID-19 को लेकर अलर्ट, इन सावधानियों से हो सकेगा बचाव
देश के अलग-अलग हिस्सों में कोविड बढ़ने के साथ ही एमपी में भी कोविड ने अपनी दस्तक दी है, देश के कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फरवरी माह के मध्य से COVID-19 के मामलों में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है।

Recommended Video

देश के कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फरवरी माह के मध्य से COVID-19 के मामलों में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है। इस क्रमिक वृद्धि को रोकने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को फिर से प्रारम्भ करने की आवश्यकता है। देश में कुछ राज्यों द्वारा कोविड-19 के सक्रिय प्रकरण अधिकांशत रिपोर्ट किए जा रहे हैं जैसे केरल (26-4%) महाराष्ट्र (21-7%) गुजरात (13-9%), कर्नाटक (8-69%) और तमिलनाडु (6-3%)। उक्त को दृष्टिगत रखते हुए ILI SARI केसेस की निरंतर मोनिटरिंग किये जाने के संबंध में भारत सरकार द्वारा निर्देश जारी किये गये हैं। इन्फ्लुएंजा और गंभीर तीव्र श्वसन बीमारी (ILI / SARI) के प्रकरणों के कारणों पर सतत् निगरानी की आवश्यकता है। भारत में आमतौर पर इन्फ्लुएंजा के मामलों में जनवरी से मार्च और फिर अगस्त से अक्टूबर तक मौसमी वृद्धि देखी जाती है। वर्तमान में देश में इन्फ्लुएंजा का सबसे प्रमुख उपप्रकार इन्फ्लुएंजा (HINI) और इन्फ्लुएंजा (H3N2) हैं।
रखनी होंगी ये सावधानियां
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी.एस. सैत्या ने बताया कि, COVID-19 और इन्फ्लुएंजा में कई समानताएँ हैं। COVID-19 और इन्फ्लुएंजा के संचरण के तरीके उच्च जोखिम वाली आबादी नैदानिक संकेतों और लक्षणों के संदर्भ में कई समानताएँ हैं, जबकि निदान के मामले में यह डॉक्टरों के लिए एक नैदानिक दुविधा पेश कर सकता है। इन दोनों बीमारियों को सरल सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों का पालन करके आसानी से रोका जा सकता है। जैसे- भीड़ भरे एवं बंद जगह से बचना, भीड़ भरे और बंद जगहों पर छींकते या खांसते समय रूमाल या टिशू का उपयोग करना, मास्क पहनना हाथ की स्वच्छता रखना सार्वजनिक स्थानों पर थूकने से बचना आदि। इन रोगों के संचरण को सीमित करने के लिए विशेष रूप से श्वसन और हाथ की स्वच्छता के अनुपालन के बारे में सामुदायिक जागरूकता बढ़ाना महत्वपूर्ण है।
मास्क पहनना है जरूरी
सलाह दी गई है कि, विशेष रूप से Co-morbid व्यक्तियों और बुजुर्गों द्वारा भी भीड़ भरे और बंद स्थानों पर जाने से बचा जाये। स्वास्थ्य की देखभाल करने वाले चिकित्सकों, पैरामेडिक्स एवं अन्य स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों के साथ-साथ रोगियों और उनके परिचारकों द्वारा मास्क पहना जाये। भीड़ वाले और बंद जगहों पर मास्क पहनना, छींकते या खांसते समय नाक और मुंह ढंकने के लिए रुमाल या टिश्यू का इस्तेमाल किया जाये। मुंह और हाथों की स्वच्छता बनाई रखी जाये। हाथों को बार-बार धोया जाये। सार्वजनिक स्थानों पर नहीं थूकें। लक्षण दिखायी देने पर तुरंत ही चिकित्सक को दिखायें और उपचार लेवें।
ये भी पढ़े- Indore temple accident: निर्माणाधीन मंदिर और बावड़ी पर हुआ अतिक्रमण ध्वस्त, कई स्थानों पर चला बुलडोजर












Click it and Unblock the Notifications