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MP: फलों की खेती से चमक उठी किसानों की किस्मत, कुछ इस तरह हो रहा बंपर फायदा

मध्यप्रदेश के किसान, नर्मदा किनारे संतरा, आम, अमरूद, नींबू, सीताफल और मौसम्बी की खेती करते नजर आ रहे हैं। किसान फलों की अलग-अलग उपज से बंपर फायदा भी प्राप्त कर रहे हैं।

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मध्यप्रदेश के निमाड़ अंचल में इन दिनों किसान फलों की खेती कर अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं, जहां किसान नर्मदा किनारे संतरा, आम, अमरूद, नींबू, सीताफल और मौसम्बी की खेती करते नजर आ रहे हैं। किसान फलों की अलग-अलग उपज से बंपर फायदा भी प्राप्त कर रहे हैं। उधर, सरकार ने भी किसानों को फायदा पहुंचाने के अलग- अलग योजनाएं चलाई हैं, जिनके जरिए किसान बंपर फसल उत्पादन के साथ ही बंपर फायदा भी प्राप्त कर रहे हैं। कुलमिलाकर, देखा जाए तो इन दिनों निमाड़ में इन दिनों फलों की फसल खेतों में लहरा रही है, जहां किसानों को भी बंपर फायदा फसल के जरिए मिल रहा है।

कुछ इस तरह हुआ फायदा

निमाड़ की उर्वरा भूमि और नर्मदा का जल हर मौसम की फसलों के लिए अनोखा वरदान है। नर्मदा नदी के जल को कल-कल और निर्मल रखने के लिए मप्र शासन ने वर्ष 2017 में नमामि देवी नर्मदे योजना प्रारम्भ की। इस योजना में नदी के दोनों किनारों पर 2-2 किमी. के दायरे में हरियाली की चादर बिछाने का निर्णय लिया गया था। 2017-18 और 218-19 में बड़वाह, महेश्वर और कसरावद के 809.01 है। रकबे में 586 किसानों ने संतरा, आम, अमरूद, नींबू, सीताफल और मौसम्बी की खेती से हरियाली की चादर बिछाई है। इन किसानों को योजना के तहत 438.23 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। ये बागीचे किसानों को भरपूर फल प्रदान कर अच्छा मुनाफा भी देने योग्य हुए हैं।

दादा के बाद पौते ने बसाया जैविक बगीचा

करीब 50 साल पहले 1970 में बहेगांव के नवलसिंह मांगीलाल सोलंकी ने निमाड़ के गर्म मौसम में मौसम्बी की खेती का आगाज़ किया था। लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ यह बात पौते (राजेन्द्र सोलंकी) के मन में बस गई। जब पौते के हाथों में खेती की बागडोर आयी तो मौसम्बी का बगीचा लगाने का सपना जागा। इस बीच मप्र द्वारा नमामि देवी नर्मदे योजना के तहत हरियाली बिछाने का निर्णय लिया गया। तो सबसे पहले राजेन्द्र ने अपने पिता भगवान मांगीलाल सोलंकी के साथ मिलकर बगीचा बसाने की फिर शुरुआत की। पहली बार मौसम्बी के बगीचे में एक पौधे पर करीब 1-1 क्विंटल तक के फल आये।

जैविकता से फलों में बिखरी शक्कर सी मिठास

राजेन्द्र के बागीचे की मौसम्बी की एक खासियत यह भी है कि 6 वर्षों से खेत में कोई भी रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक का उपयोग नहीं किया। इस कारण फलों की ताजगी और शक्कर सी मिठास आई है। 2017 में राजेंद्र के खेत में रकबे में करीब 1700 पौधे और पिता भगवान सोलंकी के खेत में 1110 लगाए थे। पहली ही फसल से उन्हें अच्छा मुनाफा हुआ है। कुलमिलाकर, देखा जाए तो मध्यप्रदेश के निमाड़ अंचल में इन दिनों किसान फलों की खेती कर अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं, जहां किसान नर्मदा किनारे संतरा, आम, अमरूद, नींबू, सीताफल और मौसम्बी की खेती करते नजर आ रहे हैं।

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