Dewas news: खेत में पराली जलाने वाले हो जाएं सावधान, किसानों को लगा इतना जुर्माना
देवास में खेत में नरवाई जलाने वाले 2 किसानों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दोनों को ही 2500 रूपए का अर्थदंड लगाया गया है।

मध्यप्रदेश में इन दिनों पराली यानी नरवाई जलाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जहां ऐसे में प्रशासन की ओर से भी पराली यानी नरवाई जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। ऐसा ही मामला देवास जिले से सामने आया है, जहां खेत में नरवाई जलाने वाले 2 किसानों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दोनों को ही 2500 रूपए का अर्थदंड लगाया गया है। वहीं आगे भी इस तरह के मामले सामने आने पर प्रशासन कार्रवाई करेगा, जहां पराली जलाने वाले किसानों को जुर्माना लगाया जाएगा। इससे पहले प्रशासन ने लगातार किसानों से खेतों में नरवाई नहीं जलाने का निवेदन किया था, लेकिन बावजूद इसके नरवाई जलाने वाले किसान नहीं माने जिन पर कार्रवाई की जा रही है।
इन पर हुई कार्रवाई
देवास जिले में पर्यावरण संरक्षण एवं आग लगने की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी ऋषव गुप्ता द्वारा जिले में पराली (नरवाई) जलाना प्रतिबंधित किया गया है। नायब तहसीलदार कन्नौद ने दो किसानों द्वारा बिना सूचना एवं बिना अनुमति के पराली (नरवाई) जलाने पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में 2500-2500 रूपये का अर्थदण्ड अधिरोपित किया गया है। नायब तहसीलदार कन्नौद ने बताया कि, ग्राम बावड़ीखेडा के कृषक सत्यनारायण पिता घीसालाल धाकड़ एवं कन्नौद के कृषक भूपेन्द्रसिंह पिता परमसिंह राजपूत द्वारा अपनी कृषि भूमि पर आग लगाकर पराली (नरवाई) जलाई गई। पराली (नरवाई) जलाने पर उक्त दोनों कृषकों पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में शासन द्वारा निर्धारित क्षतिपूर्ति राशि 2500-2500 का अर्थदण्ड अधिरोपित किया गया है।
नरवाई जलाना खेती के लिये आत्मघाती कदम
कृषि विशेयज्ञों के अनुसार गेहूं की फसल की कटाई के बाद बचे हुए फसल अवशेष (नरवाई) जलाना खेती के लिये आत्मघाती कदम है। वर्तमान में जिले में लगभग गेहूं फसल की कटाई का कार्य पूर्ण हो चुका है। गेहूं फसल की कटाई के पश्चात् सामान्य तौर पर किसान भाईयों द्वारा नरवाई में आग लगा देते है, जिससे पर्यावरण में प्रदूषण के साथ-साथ मिट्टी की संरचना भी प्रभावित होती है। अभी वर्तमान में अपने खेतों की गहरी जुताई करने का यही उत्तम समय है।
नरवाई का उपयोग इस प्रकार करें
नरवाई जलाने की अपेक्षा अवशेषों और डंठलों को एकत्र कर जैविक खाद जैसे- भू-नाडेप, वर्मी कम्पोस्ट आदि बनाने में उपयोग किया जाए तो वे बहुत जल्दी सड़कर पोषक तत्वों से भरपूर कृषक स्वयं का जैविक खाद बना सकते है। खेत में कल्टीवेटर, रोटावेटर या डिस्क हेरो आदि कि सहायता से फसल अवशेषों को भूमि में मिलाने से आने वाली फसलों में जीवांश खाद कि बचत की जा सकती है तो पशुओ के लिए भूसा और खेत के लिए बहुमूल्य पोषक तत्वों कि उपलब्धता बढने के साथ मिट्टी की संरचना को बिगडने से बचाया जा सकता है।
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