इंदौर : 'दबंगों' ने नहीं होने दिया दलित महिला के शव का दाह संस्कार
इंदौर। मध्य प्रदेश इंदौर जिले की देपालपुर तहसील के ग्राम चटवाड़ा में दलित महिला के शव के अंतिम संस्कार को लेकर विवाद हो गया। श्मशान घाट में शव के दाह संस्कान को रोकने पर बलाई समाज ने लोग बड़ी संख्या में एकत्रित होकर दलित नेता आचार्य मनोज परमार के साथ ग्राम चटवाड़ा पहुंचे। दरअसल, ग्राम चटवाड़ा के रसूखदार लोगों ने अलग से श्मशान घाट बना लिया था, जिसमें दलितों का अंतिम संस्कार पर पाबंदी लगा दी।

वर्तमान में बारिश का दौर है। इस कारण बलाई समाज की मांग है कि दलित महिला का भी अंतिम संस्कार इसी श्मशान घाट में हो, जिस पर गांव के कुछ लोगों ने आपत्ति जाहिर करते हुए अंतिम संस्कार की इजाजत नहीं दी। इस पर दलित नेता आचार्य मनोज परमार धरने पर बैठ गए। इसके बाद स्थानीय प्रशासन भी मौके पर पहुंचा।
बता दें कि ग्राम चटवाड़ा में हर वर्ग के लिए चार अलग-अलग शमशान बने हुए हैं। दलितों का जहां शमशान है। वहां, उसके पास बड़ा नाला है। यह भी सरकारी बिल्ड को फाड़कर शमशान बनाया गया है। दलित नेता मनोज परमार ने कहा कि चार-चार बार प्रथम आ चुके इंदौर जिले आजादी के 72 साल के बाद भी यह हाल हैं। दलितों के बुजुर्गों के शवों को जलाने नहीं दिया जा रहा है। परमार ने आरोप लगाया कि महिला का दाह संस्कार इसलिए नहीं करने दिया जा रहा क्योंकि हम छोटी जाति के हैं। जब दंगे होते तो हमें कहते हैं 'गर्व से कहो हम हिंदू हैं' और अब हमारे लोग लड़ने जाते हैं।
सभी भगवान को मानते हैं। हमारे लोग गांव के लोग हमें कह रहे हैं कि यहां आपकी जगह जलाने की नहीं है। आप दूसरी जगह ले जाओ। इस श्मशान में नहीं जला सकते हो। यहां पर सिर्फ ऊंची जाति के जला सकते हैं। हम छोटी जाति के हैं इसलिए हमें जलाने के लिए मना किया जा रहा है और हमें मंदिरों में भी जाने के लिए मना बोलते हैं। हमें कुएं का पानी पीने का अधिकार नहीं है। बता दें कि दलित नेता आचार्य मनोज परमार के साथ धरने पर बैठने वालों में बनेसिंह सोलंकी, जमुनालाल परमार, नितेश भवानी, शुभम बनारसी आदि शामिल रहे।












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