Indore: अब अभियान चलाकर आसानी से बनाए जाएंगे जाति प्रमाण-पत्र, ऐसी है प्रक्रिया
प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में स्कूली विद्यार्थियों के जाति प्रमाण-पत्र बनाने के लिये विशेष अभियान शुरू किया गया है। साथ ही बैंक खातों को भी आधार से लिंक करने का कार्य तुरंत ही प्रारंभ कर दिया जाए।

इंदौर जिले में स्कूली विद्यार्थियों के जाति प्रमाण-पत्र बनाने के लिये विशेष अभियान शुरू किया गया है। कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी ने निर्देश दिए हैं कि इस अभियान के अंतर्गत सभी पात्र विद्यार्थियों से आवेदन पत्र भरवाकर जाति प्रमाण पत्र बनाकर दिए जाए। साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि लाड़ली बहना योजना के क्रियान्वयन के मद्देनजर सभी पंचायतों तथा नगर परिषदों में समग्र आईडी को आधार से जोड़ने के लिए शिविर लगाए जाए। साथ ही बैंक खातों को भी आधार से लिंक करने का कार्य तुरंत ही प्रारंभ कर दिया जाए। इस कार्य को अभियान के रूप में प्रारंभ किया जाए।
कार्य निशुल्क करने के लिए निर्देश दिए जाए
कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी की अध्यक्षता में यहां समय-सीमा के पत्रों के निराकरण (टी.एल.) बैठक संपन्न हुयी। बैठक में अपर कलेक्टर अभय बेड़ेकर, अजयदेव शर्मा, राजेश राठौर, सपना लोवंशी, जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी वंदना शर्मा सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। बैठक में कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी ने निर्देश दिए कि समग्र आईडी को आधार से जोड़ने के लिए किसी भी तरह की राशि हितग्राही से नहीं ली जाए। इस कार्य में एमपी ऑनलाइन तथा सीएससी को भी जोड़ा जाए। उन्हें भी यह कार्य निशुल्क करने के लिए निर्देश दिए जाए।
प्रकरणों का सकारात्मक निराकरण किया जाए
बैठक में कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी ने निर्देश दिए कि जाति प्रमाण पत्र के आवेदन किसी भी बगैर उचित कारण के अस्वीकृत नहीं किये जाए। अगर अस्वीकृत किया जाता है तो कारणों का स्पष्ट उल्लेख करें। बेवजह किसी को भी परेशान नहीं किया जाए। कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी ने छात्रवृत्ति वितरण कार्य की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति के आवेदनों को तुरंत ही सत्यापित किया जाए एवं छात्रवृत्ति स्वीकृत की जाए। इस कार्य में बेवजह देरी करने तथा लापरवाही करने वाले कालेजों के विरूद्ध कार्यवाही की जाए। बैठक में कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी ने सीएम हेल्पलाईन के तहत दर्ज प्रकरणों के निराकरण की विभागवार समीक्षा की गयी। समीक्षा के दौरान निर्देश दिए गए कि प्रकरणों का सकारात्मक निराकरण किया जाए। आवेदकों को उनकी मंशा के अनुरूप उचित लाभ मिले। लाभ से वंचित नहीं करें।
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