Barwani news: भगोरिया मेले में लगी आकर्षक प्रदर्शनी, देखने मिला आदिवासी संस्कृति का अनूठा नजारा
आदिवासी अंचलों में इन दिनों भगोरिया मेले की धूम है, जहां भगोरिया हाट में प्रदर्शनी लगाई गई. मेला देखने दूर-दूर से लोग आदिवासी अंचल पहुंच रहे हैं.

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बड़वानी जिले में 28 फरवरी से भगोरिया हाट लगना शुरु हो चुके है। फागुन माह में यह हाट होलिका दहन के एक सप्ताह पहले से धुलंडी के एक दिन पहले तक यह हाट बाजार लगते हैं, जिसमें आदिवासी समुदाय के लोग मुख्य रूप से इन भागोरिया बाजारों का लुफ्त उठाते हैं, जिसमें वे अपने पारंपरिक तौर तरीके से सज धजकर हॉट में आते है, और आनंद लेते हैं। इसी कड़ी में पहल जन सहयोग विकास संस्थान द्वारा ग्राम मेणीमाता के भगोरिया हाट में प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें हाट में आने वाले व्यक्तियो को लैंगिक समानता, बाल विवाह, बाल श्रम, बाल अधिकार, घरेलू हिंसा,पोषण आदि के बारे में बताया गया।
लोकसभा और राज्यसभा सांसद हुए शामिल
मेणीमाता भगोरिया बाजार में लोकसभा सांसद गजेन्द्र सिंह पटेल ने भी हिस्सा लिया और भगोरिया हाट का आनंद लिया, उन्होंने पहल जन सहयोग विकास संस्थान द्वारा किए गए कार्यो की जानकारी ली और उन्हें सराहा साथ ही शुभकामनाए दी। पहल संस्था बड़वानी जिले में लैंगिक समानता, बाल विवाह, बाल श्रम, बाल अधिकार, बाल सुरक्षा समिति, शाला प्रबंधन समिति, स्वास्थ तदर्ध समिति, किसान बैठक, शिक्षा, पोषण आदि मुद्दों पर कार्य कर रही है। होली से सप्ताहभर पूर्व आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में भगोरिया हॉट मेला बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। शुक्रवार को राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ग्राम बोकराटा भगोरिया हॉट में शामिल होकर ढोल-मांदल की थाप पर समाज जनों के साथ नृत्य कर उन्हें भगोरिया व होली की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। सांसद डॉ. सोलंकी ने बताया कि, भोंगर्या हॉट हमारी जनजाति संस्कृति को सँजोता है, और मुझे गर्व है कि मेरा आदिवासी समाज में जन्म हुआ और में हमेशा मेरे स्वजातीय जनों के बीच रहककर उनका सम्मान बढ़ाते रहूँगा।
ग्रामीण अपने पारंपरिक परिधान में नजर आए
मध्यप्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में इन दिनों में भगोरिया का पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है जहां भगोरिया पर्व पर अलग-अलग जिलों में मेलों का आयोजन भी किया जा रहा है। बड़वानी में आदिवासी संस्कृति का प्रतीक भगोरिया हाट गुरुवार को पाटी में आयोजित हुआ, जिसमें क्षेत्र के कई गाँवों के आदिवासी महिला-पुरुष व बच्चे अलग-अलग टोली में शामिल हुए। अधिकांश ग्रामीण अपने पारंपरिक परिधान में नजर आए तो कई युवा आधुनिक पोशाक पहनकर भगोरिया हाट में शामिल हुए।
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