जिन्हुआ डेटा लीक मामले में एक्शन में आई मोदी सरकार, कमेटी गठन कर 30 दिन में मांगी रिपोर्ट
नई दिल्ली। चीन की शेनजेन स्थित सूचना तकनीक की कंपनी 'जिन्हुआ' पर लगभग 10 हजार भारतीय नागरिकों पर 'डिजिटल निगरानी' का गंभीर आरोप लगा है। ऐसा दावा किया गया है कि कंपनी के निशाने पर भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा कई केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री, विपक्ष के नेता- जैसे सोनिया गांधी और बड़े अधिकारी तो हैं ही, साथ ही चीफ ऑफ डिफेन्स स्टाफ, तीनों सेनाओं के प्रमुख और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, जज और कई जाने माने उद्योगपति भी शामिल हैं।
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सूत्रों से जो जानकारी मिल रही है उसके मुताबिकि डेटा लीक मामले में सरकार ने एक एक्सपर्ट कमिटी का गठन किया है। यह कमिटी सभी रिपोर्ट्स का अध्ययन करेगी और 30 दिन के भीतर अपनी सिफारिशें सौपेगी।
सूत्रों ने आगे बताया कि सरकार ने उस रिपोर्ट पर गहरी चिंता व्यक्त की है, जिसमें बताया गया कि विदेशी सोर्स सहमति के बिना देश के नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा तक पहुंच रही है या फिर प्राप्त करने की मांग कर रही है। विदेश मंत्रालय ने चीन द्वारा भारत की प्रमुख हस्तियों की जासूसी करने को लेकर चीनी राजपूत के सामने मुद्दा उठाया। चीन ने इसके जवाब में कहा कि जेनहुआ एक निजी कंपनी है और अपनी स्थिति को सार्वजनिक रूप से बता चुकी है।
किन लोगों की हो रही जासूसी?
'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, जिन लोगों की जासूसी की जा रही है, उनमें राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उनके परिवार के सदस्य, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, अशोक गहलोत, अमरिंदर सिंह, उद्धव ठाकरे, नवीन पटनायक, शिवराज सिंह चौहान, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी, रेलमंत्री पीयूष गोयल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत, सेना के कम से कम 15 पूर्व प्रमुखों, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबडे, सीएजी जीसी मूर्मू, स्टार्टअप टेक उद्यमी जैसे भारत पे के संस्थापक निपुण मेहरा, ऑथब्रिज के अजय तेहरान, देश के बड़े उद्यमी रतन टाटा और गौतम अडाणी जैसे लोग शामिल हैं।












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