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66% मुस्लिम वोटर वाले बहरामपुर में यूसुफ पठान को टिकट, कैसे ममता ने अधीर रंजन चौधरी से ले लिया बदला?

Lok Sabha Election News: टीएमसी ने बंगाल की सभी 42 लोकसभा सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा करके कांग्रेस पार्टी को जितना बड़ा झटका दिया है, उससे ज्यादा यह लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी को घेरने की कोशिश लग रही है।

कांग्रेस पार्टी के पास यूं ही बंगाल में दो ही सीटें थीं, बहरामपुर और मालदा दक्षिण। ममता बनर्जी कई बार कह चुकी थीं कि वह बंगाल में अकेले बीजेपी को हराने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा था कि विपक्षी दलों का गठबंधन इंडिया बंगाल से बाहर मिलकर चुनाव लड़ने के लिए है।

yusuf pathan baharampur

बहरामपुर है अधीर रंजन की जीती हुई सीट
कांग्रेस पार्टी ने अभी तक वैसे बंगाल की बहरामपुर लोकसभा सीट के लिए उम्मीदवार तय नहीं किए हैं। लेकिन, बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर रंजन जिस तरह से यहां पर 1999 से ही लगातार जीतते आ रहे हैं, उससे उनके टिकट कटने की कोई आशंका नहीं लग रही है।

यूसुफ पठान रोकेंगे अधीर की जीत का सिलसिला?
लेकिन, ममता बनर्जी ने यहां पर जिस तरह से क्रिकेटर यूसुफ पठान को गुजरात के वडोदरा से लाकर चुनाव लड़वाने का फैसला किया है, उससे लगता है कि इस बार वह चौधरी को लोकसभा पहुंचने से रोकने के लिए पूरी चुनावी ताकत झोंकना चाहती हैं।

ममता के खिलाफ खुलकर बोलने वाले कांग्रेसी हैं अधीर
अधीर रंजन चौधरी कांग्रेस के एकमात्र बड़े नेता हैं, जो टीएमसी सुप्रीमो के खिलाफ बयानबाजी का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं। हाल में संदेशखाली में टीएमसी नेताओं की ओर से कथित रूप से अनेकों महिलाओं के यौन उत्पीड़न के मामले में वे राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने तक की मांग कर चुके हैं।

मुस्लिम वोटर ही रोकेंगे कांग्रेस उम्मीदवार का रास्ता?
अब टीएमसी ने जिस तरह से करीब 66% मुस्लिम आबादी वाले लोकसभा सीट से एक मुस्लिम स्टार क्रिकेटर को टिकट दिया है, उससे चौधरी की चुनावी राह में कांटे जरूर बिछ सकते हैं।

चौधरी को ममता की कथित नाराजगी की भनक पहले सी थी। उन्होंने कुछ समय पहले कहा था कि 'मुझे परवाह नहीं है....मैं यहां तक लड़कर और जीतकर पहुंचा हूं....मुझे पता है कि लड़ना कैसे है और जीतना कैसे है....'

2019 में ममता ने बहरामपुर में नहीं उतारे थे मुस्लिम उम्मीदवार
लेकिन, 2019 के लोकसभा चुनावों और फिर 2021 के विधानसभा चुनावों के नतीजे देखें तो इस बार अधीर की चुनौती बढ़ सकती है। 2019 में ममता ने यहां मुस्लिम उम्मीदवार नहीं दिया था।

तब कांग्रेस को 45.43%, तृणमूल कांग्रेस को 39.23%, बीजेपी को 10.99% और आरएसपी को 1.03% वोट मिले थे। लेकिन, 2021 में बहरामपुर का चुनावी समीकरण पूरी तरह से बदला नजर आया।

2021 में बहरामपुर की सभी 7 सीटें हार गई कांग्रेस
2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी बहरामपुर लोकसभा सीट की 7 विधानसभा सीटों में से 6 जीत गई थी और 1 पर भाजपा का कब्जा हो गया था। कांग्रेस हाथ डोलाते रह गई थी।

हर हाल में बहरामपुर जीतना चाहती हैं ममता!
जनवरी में ही मीडिया में एक खबर आई थी, जिसमें ममता ने बंद कमरे की एक बैठक में टीएमसी कार्यकर्ताओं से कह दिया था कि इस बार वह हर हाल में बहरामपुर जीतना चाहती हैं।

भाजपा भी बदल चुकी है उम्मीदवार
बीजेपी ने भी इस बार बहरामपुर से अपना उम्मीदवार बदल दिया है। पार्टी डॉ निर्मल कुमार साहा को यहां से पहले ही उतार चुकी है। अपने नाम की घोषणा के बाद साहा ने कहा था, 'मैं जीतने के लिए अपनी ओर से पूरी कोशिश करूंगा, लेकिन आखिरी फैसला मतदाताओं के द्वारा लिया जाएगा।'

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