आपका मेकअप करोड़ो की जान ले रहा है
बेंगलुरू। जब आप शॉपिंग मॉल या महंगी दुकानों से सौंदर्य उत्पाद खरीदते हैं तो कभी ये सोचा है कि इसकी कीमत जानवर अपनी जानदेकर चुकाते हैं। शायद आपको नहीं पता है लेकिन सुंदरता निखारने वाले क्रीम, पाउडर और लिपस्टिक जैसी कई चीजों को हम तक पहुंचने से पहले जानवरों पर टेस्ट किया जाता है। यही नहीं टेस्टिंग के दौरान जानवरों को कई बार इन उत्पादों की नुकसानदायक प्रतिक्रियाएं भी झेलनी पड़ती हैं। जिससे कई बेजुबान जीव अपनी जान गंवा देते हैं।

जानवरों के हित में काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन पेटा के शोध की माने तो हर साल केवल अमेरिका में ही करीब 10 करोड़ जानवर कई प्रयोगों में दवाओं और कॉस्मेटिक उत्पादों की टेस्टिंग के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। इन उत्पादों का सबसे ज्यादा प्रयोग खरगोश, बिल्ली, चूहे, चिड़िया आदि पर किया जाता है। बिल्ली पर ज्यादातर न्यूरोलॉजिकल टेस्ट होते हैं। ये वो उत्पाद होते हैं जो आपके तनाव को कम करने का काम करते हैं।
वहीं क्रीम, शैंपू, परफ्यूम, नेलपॉलिश जैसे कई सौंदर्य उत्पादों का परीक्षण चूहों पर किया जाता है। स्तनधारी होने के कारण उत्पादों की इन पर प्रतिक्रिया इंसानों के जैसी ही होती है। जिससे इन उत्पाद के प्रभाव को आसानी से जाना जा सकता है।
वहीं आप अपनी आंखों में जो मस्कारा लगाती हैं उसका परीक्षण हैम्सटर, खरगोश, चूहे और ऐसे दूसरे जानवरों पर होता हैं। टूथपेस्ट का भी प्रयोग इन्ही जीवों पर किया जाता है। शैम्पू की टेस्टिंग के लिए खरगोशों को एक मशीन में बंद करके उसकी आंखों की पलकों को हटाकर उनमें शैम्पू का रसायन डालते हैं। अगर वह आंशिक या पूर्ण रूप से अंधे हो जाए तो इसे इंसानों के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता है।
वहीं लिपस्टिक का परीक्षण के लिए चूहों का मुँह खोलकर उनके मसूढ़ों पर उसे मला जाता है. परीक्षण में देखा जाता है कि चूहे के मसूड़े पर उससे छाले तो नहीं पड़ रहे। इन सभी परीक्षणों के सफल होने के बाद ही इन्हें बिक्री के लिए मार्केट में बेचे जाने के लिए भेजा जाता है।












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