'आप 'फ्रीडम ऑफ स्पीच' का मजा लेते हैं क्योंकि बॉर्डर पर सैनिक तैनात हैं'
नई दिल्ली। बुधवार को जेएनयू के स्टूडेंट लीडर कन्हैया कुमार को दिल्ली हाई कोर्ट से जमानत मिल गई। कन्हैया को छह माह के लिए जमानत पर रिहा किया गया है। जमानत के समय हाई कोर्ट ने कुछ सख्त टिप्पणियां कीं और कन्हैया कुमार को बताया कि कैसे सेना की वजह से वह या दूसरे लोग फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन का मजा उठा रहे हैं।

'ध्यान रहे कि सेना आपके लिए क्या कर रही है'
दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस प्रतिभा रानी ने जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, 'सभी को इस बात को दिमाग में रखना होगा कि वे सभी फ्रीडम ऑफ स्पीच या ऐसी आजादी का मजा इसलिए ही उठा पा रहे हैं क्योंकि हमारे सैनिक हमारी सेना और पैरामिलिट्री फोर्सेज सीमा पर तैनात हैं।'
कोर्ट ने बताया,'हमारी सेनाएं दुनिया की खतरनाक जगहों पर बॉर्डर की सुरक्षा के लिए तैनात हैं चाहे सियाचिन ग्लेशियर हो या फिर कच्छ का रण, यहां पर सेना आपकी सुरक्षा के लिए हर पल तैनात है।'
'जहां ऑक्सीजन नहीं वहां आपकी सेना'
कोर्ट ने आगे कहा, 'ऐसे लोग यूनिवर्सिटी कैंपस में बिना इस बात का अहसास किए हुए आजादी का मजा उठाते हैं और नारे लगाते हैं कि हमारी सेनाएं वहां पर मौजूद हैं जहां पर ऑक्सीजन नहीं मिलता।'
कोर्ट ने आगे कहा, 'सेनाएं उन लोगों की सुरक्षा में तैनात हैं जो अफजल गुरु या फिर मकबूल भट्ट जैसे लोगों के पोस्टर लेकर देश विरोधी नारे लगाते हैं। ये लोग ऐसे लोगों की आजादी की बात करते हैं बिना उन परिस्थितियों का अहसास किए जिनमें हमारे सैनिक उनकी सुरक्षा करते हैं।'
कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह के नारे उन शहीद के परिवार वालों पर बुरा असर डालते हैं और उन्हें दुखी करते हैं जिनके शव तिरंगे में लिपटे हुए घर पहुंचते हैं।
और क्या कहा कोर्ट ने
- 23 पेज के ऑर्डर में कहा कि कन्हैया देश के बाहर नहीं जा सकते हैं।
- जमानत के लिए राशि जमा करने में कोर्ट ने कन्हैया को वित्तीय छूट दी है।
- जेएनयू में नौ फरवरी को हुए कार्यक्रम में लगे पोस्टर्स और नारों को इंफेक्शन करार दिया।
- यह इंफेक्शन जेएनयू के स्टूडेंट्स में फैल गया है।
- यह महामारी का रूप ले इससे पहले इस पर कंट्रोल जरूरी है।
- जिस तरह का विरोध हुआ उससे स्टूडेंट कम्यूनिटी को आत्मनिरीक्षण करने की जरूरत।
- जेएनयू के टीचर्स को रास्ते से भटके छात्रों को सही रास्ते पर लाने में भूमिका निभानी होगी।
- स्टूडेंट्स देश के विकास में योगदान दे और उस लक्ष्य को प्राप्त करें जिनके लिए जेएनयू बनाया गया।
- जेएनयू में कार्यक्रम में जो भी नारे या पोस्टर लगाए गए थे, वह फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन नहीं कहा जा सकता।
- अपनी बात कहने का अधिकार संविधान के दायरे में होना चाहिए जिसके बारे में अनुच्छेद 51ए में कहा है।












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