यूपी चुनाव में मोदी नहीं योगी होंगे बीजेपी का चेहरा? पार्टी ऐसे बदलेगी सीएम की छवि!

नई दिल्ली- उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी करीब तीन साल बाकी हैं, लेकिन बीजेपी ने उसके लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। 2017 के चुनाव के बाद जब भाजपा ने योगी आदित्यनाथ को सीएम के तौर पर चुना था, तो उसके पीछे उनकी हिंदुत्व के पोस्टर ब्वॉय वाली छवि ने बहुत बड़ा रोल निभाया था। लेकिन, दो साल से कुछ ही ज्यादा समय बाद प्रदेश की बीजेपी सरकार उनकी इस छवि को बदलना चाहती है। अब उनकी छवि प्रधानमंत्री मोदी की तरह विकासपुरुष वाली बनाए जाने कोशिश की जाने लगी है। आइए समझने की कोशिश करते हैं कि अगर पार्टी ने अपनी रणनीति में बदलाव का विचार किया है, तो उसके कारण क्या हैं?

छवि बदलने के लिए पीआर एजेंसी को जिम्मा

छवि बदलने के लिए पीआर एजेंसी को जिम्मा

दि प्रिंट में छपी एक खबर के मुताबिक योगी सरकार ने दिल्ली की एक पीआर एजेंसी को सीएम योगी आदित्यनाथ की छवि बदलने का जिम्मा दिया है। जानकारी के मुताबिक यह एजेंसी पहले गुजरात और मध्य प्रदेश सरकारों के लिए काम कर चुकी है। अभी इस एजेंसी को लखनऊ में सूचना विभाग के साथ अटैच किया गया है। हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि योगी सरकार हिंदुत्व के एजेंडे से पूरी तरह से किनारा करने जा रही है, लेकिन मुख्य मुद्दा ये है कि अब विकास को प्राथमिकता दी जाएगी और विकास के उन कार्यों पर फोकस किया जाएगा, जो योगी सरकार के कार्यकाल में किए जा रहे हैं। बीजेपी के एक सूत्र के मुताबिक, "अगले चुनाव तक 80 फीसदी विकास और 20 फीसदी हिंदुत्व पर जोर रहेगा।" बीजेपी प्रवक्ता चंद्र मोहन के अनुसार उपचुनाव और विधानसभा चुनावों में योगी सरकार के फ्लैगशिप डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के बारे में बात की जाएगी। इसके अलावा कानून-व्यवस्था और शिक्षा के मुद्दे पर जो वादे पूरे किए गई हैं, उसकी चर्चा तो की ही जाएगी। हालांकि, उन्होंने योगी-सेंट्रिक चुनाव प्रचार की अटकलों को ये कहकर टाल दिया कि इतनी जल्दी इसपर कुछ नहीं कहा जा सकता, पार्टी इसपर बाद में फैसला करेगी।

रणनीति बदलने की क्या है मजबूरी?

रणनीति बदलने की क्या है मजबूरी?

जानकारी के मुताबिक पार्टी के लोगों का मानना है कि लोकसभा जैसे चुनाव अभियान से विधानसभा चुनाव में मदद मिलने की उम्मीद नहीं है। लोकसभा चुनाव में तो मोदी फैक्टर और मोदी सरकार की शौचालय, बिजली, गैस और घर जैसी योजनाओं ने काम किया था। लेकिन, विधानसभा में जीत के लिए नरेटिव बदलने की आवश्यकता पड़ेगी। बीजेपी के एक नेता ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा कि, "उदाहरण के लिए आवारा पशुओं के चलते राज्य के कई हिस्सों में किसानों को चौबिसों घंटे अपने खेतों की रखवाली करनी पड़ती है। यह और गन्ना के बकाए के भुगतान में देरी भी यूपी के किसानों का मुद्दा है।" उन्होंने साफ किया कि, "हालांकि, 2019 में ये चुनाव के मुद्दे नहीं बन पाए। मोदी फैक्टर और केंद्रीय योजनाओं के चलते शायद ये परेशानियां दरकिनार हो गईं, लेकिन राज्य के चुनाव में ये मुद्दे वोटिंग को प्रभावित करेंगे।"

इस तरह के मुद्दों पर हो सकता है फोकस

इस तरह के मुद्दों पर हो सकता है फोकस

जानकारी के मुताबिक अब राज्य सरकार प्रदेश की बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पूरा करने पर जोर देगी। इसमें गौतम बुद्ध नगर जिले के जेवर ग्रीनफिल्ड एयरपोर्ट, राम सर्किट के आसपास टूरिज्म के प्रोजेक्ट और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे अगले साल तक पूरा होने की उम्मीद है। जानकारी के मुताबिक पार्टी चाहती है कि विधानसभा चुनावों के मद्देजर ऐसे प्रोजेक्ट और स्कीम को आगे लाने की जरूरत है, जिसे पूरा करने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार का योगदान हो। पार्टी के एक सूत्र की मानें तो, "अब मोदी की योजनाओं को लागू करके उसे योगी का नाम और काम के रूप में दिखाने से आगे बढ़ने की जरूरत है। आगे अब इसी रणनीति पर काम किया जाएगा।"

बदले-बदले अंदाज में योगी

बदले-बदले अंदाज में योगी

लगता है कि योगी आदित्यनाथ खुद भी अपनी छवि को बदले हुए अंदाज में सामने लाने की कोशिशों में जुट गए हैं। अभी हाल ही में उन्होंने अपने मन की बात जाहिर करने के लिए निजी ब्लॉग का सहारा लिया है। पांच साल के गैप के बाद शुरू किए गए अपने ब्लॉग में उन्होंने लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर मिले विशाल मैनडेट के बारे में अपनी राय रखी है। उनके मुताबिक पीएम मोदी ने 'जातिवाद-मुक्त भारत की नींव' रख दी है। पार्टी के अंदरूनी लोग बताते हैं कि मुख्यमंत्री को केंद्र में रखकर 100-दिवसीय एक कार्य योजना का ड्राफ्ट प्लान भी तैयार है, जिसे मंजूरी मिलने भर की देरी है। गौरतलब है कि 2018 के लोकसभा उपचुनाव में जिस तरह से यूपी में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था और योगी की लीडरशिप पर सवाल उठाए गए थे, लोकसभा चुनाव ने परिस्थितियां बिल्कुल उनके पक्ष में लाकर खड़ी कर दी हैं। महागठबंधन के बावजूद यूपी में बीजेपी न केवल 80 में से 62 सीटें जीत ली, बल्कि पार्टी का वोट शेयर भी 8% बढ़ गया है। यही नहीं गोरखपुर लोकसभा सीट पर फिर से कब्जा कराकर उन्होंने अपना आत्मविश्वास भी फिर से पा लिया है। माना जा रहा है कि योगी की छवि बदलने की इस कड़ी में राज्य में ओबीसी और दलित वर्ग के कल्याण पर फोकस रखकर भी काम करने की योजना पर काम किया जाना है, ताकि योगी की छवि भी चमके और पार्टी का जनाधार भी मजबूत बने।

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