80 की उम्र में नौकरी के 'जेटली वार' पर यशवंत सिन्हा का सख्त जवाब
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नई दिल्ली। देश की अर्थव्यवस्था पर पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा के एक लेख के बाद हंगामा खड़ा हो गया है। लेख के बाद से ही वित्त मंत्री अरुण जेटली और सिन्हा के बीच दरार बढ़ती जा रही है। इस पूरे मामले में बड़ा मोड़ उस वक्त आया जब यशवंत के बेटे जयंत ने एक लेख के जरिए जवाब दिया। इसके बाद फिर यशवंत ने एक प्रेस वार्ता के जरिए सरकार को जवाब दिया। यशवंत ने कहा था कि बहुत दिनों से हम जानते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था में गिरावट आ रही है थी। साल 2014 के पहले जब मैं पार्टी प्रवक्ता था तो जब आर्थिक मामलों की बात आती थी, तो हम यूपीए सरकार की स्थिति को पॉलिसी पैरालिसिस का नाम देते थे। हम इससे पहले की सरकार को दोष नहीं दे सकते क्योंकि हमें पूरा मौका मिला है।

अरुण जेटली ने कहा था...
बता दें कि गुरुवार को एक पुस्तक विमोचन के दौरान अरुण जेटली ने कहा था कि किताब का शीर्षक होता की 70 साल का भारत, साढ़े तीन साल की मोदी सरकार और 80 की उम्र में रोजगार की तलाश।' अप्रत्यक्ष रूप से खुद पर लगाए गए इस आरोप का यशवंत ने भी पलटवार किया।

यशवंत को बेटे के करियर की चिंता नहीं!
यशवंत ने कहा कि यशवंत सिन्हा ने कहा है कि अगर मैं नौकरी चाहता तो अरुण जेटली वहां ना होते। बेटे जयंत सिन्हा के लेख पर उन्होंने कहा कि यह मुद्दे को भटकाने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि अगर देश की अर्थव्यवस्था खराब है को इसका जिम्मेदार वित्त मंत्री ही होगा ना कि गृह मंत्री। व्यक्तिगत आरोप मैं भी लगा सकता हूं लेकिन मैं इस में नहीं फसूंगा। सिन्हा ने कहा कि 'राष्ट्रहित से बड़ा कोई हित नहीं है। अगर मेरे सवालों से बेटे का करियर खराब होता हो तो हो जाए।'

रोजगार है ही नहीं, तो नौकरी कहां से!
उन्होंने कहा था कि बिना नोटबंदी के परिणामों को जाने सरकार GST ले आई। आज जब नौकरी है ही नहीं, तो नौकरी देंगे कहा से? सिन्हा ने कहा कि आज लोगों में रोजगार को लेकर चिंता है। यशवंत ने कहा कि लंबे समय के फायदें की दलील बेकार है। सिन्हा ने कहा कि नोटबंदी पहला झटका था, और GST दूसरा। आज देश की जनता चाहती है कि रोजगार मिले, पर जिससे पूछो वो कहता है कि रोजगार है ही नहीं।

विकास दर गिरने की चिंता
अपने लेख पर डटे हुए सिन्हा ने कहा कि विकास दर गिरने से गहरी चिंता है। उन्होंने कहा कि बैंको के NPA को नीचे लाने होगा ताकि सुधार हो सके। उन्होंने कहा यदि कांग्रेस के वित्त मंत्रियों को छोड़ दें तो केवल मैं हूं जिसे 7 बजट पेश किया है। अगर आप एक के बाद एक झटका देते रहेंगे तो अर्थव्यव्सथा संभलेगी क्या? लगातार 6 महीने से विकास दर घट रही है। उन्होने कहा कि नोटबंदी के चलते अर्थव्यवस्था की रफ्तार और सुस्त हुई।












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