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गोलियों से बच गये होते तो क्या नाथू राम गोडसे को माफ कर देते गांधी?

नई दिल्ली। अगर महात्मा गांधी गोलियों से बच जाते तो क्या नाथू राम गोडसे को माफ कर देते ? अपनी हत्या से पहले महात्मा गांधी ने दो मौकों पर जो कहा और किया था उससे यह पता चलता है कि उदारमना बापू, नाथू राम गोडसे को माफ कर देते। गांधी जी जब अफ्रीका में थे तब उन्होंने अपने परम मित्र हरमन कॉलेनबॉक को कहा था कि भले ही कोई मुझे मारना चाहता हो पर मेरे कारण अगर किसी को मारा गया तो यह मुझे स्वीकार नहीं होगा। इसी तरह जब मदन लाल पाहवा ने उनकी प्रार्थना सभा में हमला किया था तब उन्होंने कहा था, मेरी तरफ से इस शख्स को माफ कर दिया जाए। गांधी यूं ही महात्मा नहीं थे। वे आधुनिक विश्व इतिहास के अनुकरणीय राजनीतिक संत थे। काश ! आज गांधी जी होते तो हम कितने खुशनसीब होते।

गांधी जी की रक्षा के लिए पिस्तौल

गांधी जी की रक्षा के लिए पिस्तौल

महात्मा गांधी जब अफ्रीका में थे तब 1904 में उनकी मुलाकात हरमन कॉलेनबॉक से हुई थी। यहूदी समुदाय के हरमन आर्किटेक्ट थे। दोनों में गहरी दोस्ती हो गयी। वे गांधी जी की सादगी और सदगुणों से बहुत प्रभावित थे। ये मित्रता इतनी प्रगाढ़ हो गयी कि दोनों एक साथ ही रहने लगे। गांधी जी अफ्रीका में अंग्रेजों की रंगभेदी नीति के खिलाफ लड़ रहे थे। इस बीच हरमन कॉलेनबॉक को कहीं से मालूम हुआ कि कुछ लोग गांधी जी की हत्या करना चाहते हैं। वे गांधी जी की सुरक्षा को लेकर सतर्क हो गये। हरमन ने एक पिस्तौल का इंतजाम किया और हमेशा अपने पास रखने लगे। एक दिन गांधी जी और हरमन सुबह की सैर कर रहे थे। गांधी जी ने देखा कि हरमन की जेब कुछ उभरी हुई है। उन्हें आभास हुआ कि हरमन की जेब में कोई हथियार है। गांधी जी ने जब हरमन की जेब में हाथ डाल कर देखा तो पिस्तौल थी।

मेरे लिए किसी की जान लेना अनुचित - गांधी

मेरे लिए किसी की जान लेना अनुचित - गांधी

गांधी जी ने हरमन की जेब से पिस्तौल निकाल कर पूछा, टॉल्सटॉय का शिष्य कब से हथियार रखने लगा ? तब हरमन ने गांधी जी को बताया कि ये पिस्तौल उनकी सुरक्षा के लिए है। आपकी जान पर खतरा है। हरमन ने कहा, रक्षा के लिए हथियार रखने में हर्ज क्या है ? इस गांधी जी ने कहा, मित्र क्या आप मेरी रक्षा कर सकते हैं ? शरीर तो एक दिन नष्ट होना ही है। हम अहिंसा को मानने वाले हैं और इस पर अटल रहेंगे। मैं अपने नश्वर शरीर के लिए किसी का खून बर्दाश्त नहीं कर सकता। भले ही कोई मुझे मारना चाहता है, लेकिन मेरे कारण अगर आपने किसी को मारा, तो मैं आपको माफ नहीं करूंगा। ये पिस्तौल तुरंत फेंक दीजिए। हरमन गांधी गांधी जी की बातों के सुन अचरज में पड़ गये। वे सोचने लगे कि क्या कोई इंसान अहिंसा का ऐसा पुजारी भी हो सकता है ? वे अपने किये पर शर्मिंदा हो गये और पिस्तौल फेंक दी।

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    जब हमलावर को माफ किया गांधी जी ने

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    महात्मा गांधी की हत्या 30 जनवरी 1948 को दिल्ली के बिड़ला हाउस में हुई थी। इसके 10 दिन पहले भी गांधीजी को नुकसान पहुंचाने के लिए बिड़ला हाउस में हमला हुआ था। गांधी जी की प्रार्थना सभा में मदन लाल पाहवा नाम के एक शख्स ने धमाका किया था। गांधी जी को नुकसान पहुंचाने के लिए यह हमला हुआ था। इसके बाद अफरा-तफरी मच गयी थी। इस घटना के बाद गांधी जी ने कहा था कि जिसने भी ये कोशिश की, उसको मेरी तरफ से माफ कर दिया जाए। उन्होंने हिदायत दे रखी थी कोई पुलिसवाला उनकी सुरक्षा के लिए बिड़ला भवन में तैनात नहीं रहेगा। उन्हें अपनी जान की बिल्कुल फिक्र नहीं थी। अपनी जान लेने की कोशिश करने वाले को सिर्फ महात्मा गांधी ही माफ कर सकते थे।

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