Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

World Sleep Day: लंबी उम्र और स्वस्थ जीवन के लिए रात की नींद बेहद जरूरी, जानिए कुछ दिलचस्प बातें

भागदौड़ भरी जिंदगी में रात की अच्छी नींद लेना बेहद अहम है। वर्ल्ड स्लीप डे के मौके पर नींद की अहमियत समझें। नींद की समस्या से पीड़ित लोग अपर्याप्त नींद और इससे उपजने वाले गुस्से, चिंता और उदासी से कैसे निपटें। जानिए,

World Sleep Day

World Sleep Day: दुनिया की वयस्क आबादी नींद की समस्या से पीड़ित है। कई लोग पुरानी अनिद्रा से पीड़ित हैं। कई मेडिकल स्टडी इस बात की पुष्टि करते हैं कि अपर्याप्त नींद के कारण क्रोध, चिंता और उदासी जैसी परेशानियां होती हैं। Heartfulness Meditation अनिद्रा की परेशानी से निपटने में काफी मददगार होता है। 'विश्व नींद दिवस' की बधाई देने के लिए लोग देर रात तक जागते भी देखे जा सकते हैं। इस खास मौके पर रात की नींद की अहमियत जानिए।

नींद मेमोरी को भी प्रभावित करती है

हार्टफुलनेस के बारे में लोगों को गाइड करने वाले कमलेश पटेल के अनुसार, अच्छी नींद मूड और मेमोरी ठीक रखने के लिए जरूरी है। नींद की कमी से दिन के समय अलर्ट रहने की क्षमता और अच्छी मेमोरी पावर प्रभावित होती है। अमेरिका के वेलस्पैन यॉर्क अस्पताल शोध के दौरान नींद की कमी से निपटने में Heartfulness Meditation के आशाजनक परिणाम मिले हैं।

World Sleep Day

25 फीसद लोगों को नींद की कमी

अपोलो अस्पताल, चेन्नई के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. राजा अमरनाथ के अनुसार "अलग-अलग अध्ययनों में, लगभग 25% वयस्कों ने माना है कि उनकी नींद संतोषजनक नहीं थी। कम से कम 10-15% में नींद की कमी के लक्षण हैं। नींद की कमी से उनका दिन नकारात्मक रूप से प्रभावित होता है। केवल 6-10% लोगों में अनिद्रा क्लिनिकल टेस्ट से प्रमाणित हुई है, जो स्थिति काफी खतरनाक है।

मेडिटेशन का नींद पर पॉजिटिव प्रभाव

कई मेडिकल एक्सपर्ट्स ने मेडिटेशन को बेहद कारगर माना है। कई अध्ययनों में ये बात साबित हुई है कि अनिद्रा से लड़ने में ध्यान यानी मेडिटेशन की अहम भूमिका है। इससे नींद की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है। अमेरिका के वर्जीनिया में नेशनल साइंस फाउंडेशन के अनुसार, हमारा दिमाग प्रतिदिन 50,000 विचार पैदा करता है। इनमें से 95 प्रतिशत विचार रिपीट होते हैं। अतीत और भविष्य की अधिक चिंताओं वाले विचार घूमते रहते हैं।

World Sleep Day

नींद की गड़बड़ी तनाव का मूल कारण

डॉ. राजा अमरनाथ के अनुसार, भले ही शरीर आराम कर रहा है, मन को आराम नहीं मिलता। तनाव का मूल कारण है नींद की गड़बड़ी। मेडिटेशन का प्रशिक्षण हमें जागरूक बनाता है और शरीर के भीतर संतुलित अवस्था बनती है, जिससे तनाव दूर होता है।

आराम शरीर पर कैसे असर करता है

नींद के दौरान, हृदय गति, रक्तचाप, श्वसन दर और मिनट वेंटिलेशन में कमी होती है। अच्छी नींद ऑक्सीजन की खपत में कमी और कार्बन डाइऑक्साइड को खत्म करने में मदद मिलती है। मेडिटेशन से इसी तरह के शारीरिक परिवर्तन होते हैं। भले ही भौतिक शरीर गहन विश्राम की स्थिति में हो, ध्यान के प्रभाव से व्यक्ति अलर्ट रहता है।

World Sleep Day

मेलाटोनिन हार्मोन, नींद और कैंसर का कनेक्शन

मेडिटेशन पीनियल ग्रंथि में मेलाटोनिन (melatonin) की मात्रा बढ़ाता है। इस हार्मोन से प्राकृतिक की साइकल नियंत्रित करने में मदद मिलती है। तनाव के कारण शरीर में मेलाटोनिन बनने की गति धीमी हो जाती है। नींद की कमी के कारण मेलाटोनिन का घटता स्तर स्तन कैंसर के खतरे को भी बढ़ाता है। मेलाटोनिन के स्तर को बढ़ाकर कैंसर का जोखिम कम किया जा सकता है। मेडिटेशन का अभ्यास करने वाले बहुत से लोगों ने नींद की बेहतर क्वालिटी की बात कही। साथ-साथ इनका मानना है कि मेडिटेशन के प्रभाव से नींद की कम जरूरत महसूस होती है।

चिंता और अवसाद में कमी

ध्यान मन को नियंत्रित करता है। चिंता और अवसाद कम होता है। गहरी नींद, अल्फा, थीटा और डेल्टा तरंगों को बढ़ावा देने और तनाव से जुड़ी बीटा तरंगों को कम करने सहित ध्यान, विश्राम और नींद की अलग-अलग अवस्थाओं के दौरान मस्तिष्क तरंगों को उसी तरह से stimulate किया जाता है।

World Sleep Day

नींद को प्रभावित करने वाली बीमारियां

उच्च रक्तचाप, इस्केमिक हृदय रोग (ischemic heart disease), ब्रोन्कियल अस्थमा (bronchial asthma), Chronic obstructive pulmonary disease (सीओपीडी), चिंता न्यूरोसिस (anxiety neurosis), अवसाद, कैंसर, degenerative diseases समेत कई पुरानी बीमारियों की रोकथाम, उपचार में मेडिटेशन बेहद प्रभावी साबित हुआ है। अधिकांश बीमारियों में नींद की गड़बड़ी बहुत आम है। ध्यान के अभ्यास से इन परेशानियों से निजात मिल जाती है।

Recommended Video

    Office जाकर बस करनी होगी नींद, ये कंपनी दे रही शानदार Job और Salary | वनइंडिया हिंदी | *News

    मेडिटेशन का पॉजिटिव असर

    Heartfulness Meditation एक सरल अभ्यास है जिससे तनाव, जलन कम करने और भावनात्मक कल्याण में मदद मिलती है। जब हम तनावग्रस्त होते हैं, तो नींद आने में अधिक समय लगता है और अक्सर इससे नींद में खलल पड़ता है। हृदय पर गहरा ध्यान और मेडिटेशन करते समय हम विचारों, भावनाओं और तनाव से कम प्रभावित होते हैं। नियमित ध्यान से नींद तात्कालिक, गहरी और अबाधित हो सकती है।

    World Sleep Day

    पर्याप्त नींद नहीं आना दिल के लिए खतरनाक

    दक्षिणी डेनमार्क विश्वविद्यालय और सिडनी विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने हाल ही में अध्ययन किया। इसके मुताबिक, अपर्याप्त नींद दिल की बीमारी का खतरा बढ़ा सकती है। घातक बीमारी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नींद की कमी से होने वाली बीमारी दो से सात साल के दौरान प्रारंभिक मृत्यु दर का कारण बन सकती है।

    खर्राटों की परेशानी भी नींद से जुड़ी

    सामान्य रूप से खराब नींद, अपर्याप्त नींद, अनिद्रा की शिकायत, खर्राटे, देर से बिस्तर पर जाना और दिन में नींद आने की बातों पर ध्यान नहीं दिया जाता, लेकिन इससे पुरुषों और महिलाओं की हृदय संबंधी सेहत को काफी नुकसान हुआ।

    नींद की कमी से मूड खराब, फिर हार्ट डिजिज

    चार्ल्स पर्किन्स सेंटर और फैकल्टी ऑफ मेडिसिन एंड हेल्थ में प्रोफेसर इमैनुएल स्टैमाटाकिस के अनुसार जिस किसी ने भी रात की कठिन या खराब नींद ली है, वह जानता है कि नींद की कमी खराब मूड का कारण बन सकता है। शोध से पता चलता है कि समय के साथ और नियमित रूप से खराब नींद मिडिल एज और वृद्धावस्था में हार्ट डिजिज का कारण बन सकती है।

    World Sleep Day

    ब्रिटेन में कितनी लंबी है औसत आयु

    Sleep apnoea के कारण हृदय रोग और कुछ पुरानी सेहत से जुड़ी परेशानी बढ़ सकती है। इसे वेक-अप कॉल मानना चाहिए क्योंकि सामान्य रूप से खराब नींद हृदय की सेहत के लिए बहुत खतरनाक हो सकते हैं। खराब नींद की परेशानी के बारे में रिसर्च करने वाली डॉ. बो-हुई हुआंग ने कहा, ब्रिटेन में औसत जीवन प्रत्याशा लगभग 80 वर्ष है। नींद संबंधी और श्वास संबंधी विकार जैसे स्लीप एपनिया के कारण लोगों को हृदय रोग हुआ इनकी लाइफ एवरेज सात साल कम हो गई।

    क्या बच्चे फोन का इस्तेमाल नींद के लिए करते हैं?

    सोने से पहले फोन के इस्तेमाल पर ऑस्ट्रेलिया की एक यूनिवर्सिटी में हुए रिसर्च के अनुसार, मोबाइल से किशोरों की सोने की क्षमता में सुधार हो सकता है। जून और सितंबर 2019 के बीच दक्षिण ऑस्ट्रेलियाई स्कूलों में 12 से 18 वर्ष की आयु के 600 से अधिक किशोरों पर रिसर्च हुआ। इसमें बच्चों ने सोने से पहले YouTube, संगीत ऐप, Instagram और Snapchat जैसी चीजों के इस्तेमाल की बात मानी।

    World Sleep Day

    नींद के लिए मोबाइल जैसी टेक्नोलॉजी का उपयोग!

    ऑरेब्रो यूनिवर्सिटी, स्वीडन की रिसर्चर डॉ. सेरेना बॉडुको के अनुसार "नींद आसानी से नहीं आने पर कई किशोर अच्छी नींद के लिए संघर्ष करते हैं।" इनके दिमाग में विचार उमड़ते रहते हैं। इस संबंध में हुए अध्ययन के अनुसार कई किशोर नकारात्मक विचारों से खुद को दूर करने के लिए मोबाइल जैसी टेक्नोलॉजी का उपयोग करते हैं। उन्हें नींद की शुरुआत की प्रक्रिया को प्रोसेस करने में मदद मिल सकती है। इसका एक अर्थ ये भी है कि नींद न आने पर दिमाग को डायवर्ट करना प्रभावी है, भले ही तकनीक का सहारा लेना पड़े।

    More From
    Prev
    Next
    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+