World Population Day: गोवा और सिक्किम में कम आबादी अधिक खुशहाली
World Population Day: परिवार जितना छोटा हो उसका औसत खर्चा उतना ही कम होगा। खर्चा कम होगा तो सामान्य आमदनी से भी बचत संभव है। जो राज्य जितना छोटा होगा वह उतना ही अपने संसाधनों का बेहतर प्रबंध कर सकता है। बड़े राज्यों की तुलना में छोटे राज्यों की आर्थिक और सामाजिक प्रगति तेज होती है। इस संबंध में गोवा और सिक्किम की प्रगति काबिलेगौर है। प्रगति का संबंध जनसंख्या से जुड़ा है। बढ़ती जनसंख्या प्रगति की राह में प्रमुख अड़चन है। यह भारत के राज्यों की स्थिति से समझा जा सकता है। सिक्किम विश्व का पहला राज्य है जहां सौ फीसदी ऑर्गेनिक खेती होती है। यह कामयाबी उसने 2016 में ही हासिल कर ली थी। यहां रसायानिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल पूरी तरह से प्रतिबंधित है।
गोवा- आमदनी अधिक तो तरक्की भी ज्यादा
गोवा की आबादी लगभग 15 लाख 70 हजार है लेकिन प्रतिव्यक्ति आय में वह भारत के 28 राज्यों में पहले पायदान पर है। गोवा में प्रति व्यक्ति आय करीब 5 लाख 27 हजार रुपये सालाना है। गोवा में शहरीकरण की गति बहुत तेज है। करीब 75 फीसदी आबादी शहरों में रहती है। शहरों में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और लोकसेवा की बेहतर स्थिति है जिससे मानव जीवनस्तर ऊपर उठ रहा है। गोवा की प्रति व्यक्ति आय भारत के प्रति व्यक्ति आय से तीन गुणा अधिक है। इतना ही नहीं गोवा सामाजिक प्रगति के मामले में भी देश में तीसरे स्थान पर है। सामाजिक प्रगति के मामले में केन्द्रशासित प्रदेश पुद्दुचेरी पहले और लक्षद्वीप दूसरे स्थान पर है। अगर पूर्ण राज्य की बात की जाय तो गोवा सामाजित प्रगति के मामले में पहले पायदान पर है क्यों कि उससे आगे सिर्फ केन्द्रशासित प्रदेश ही हैं।

सामाजिक प्रगति में भी गोवा आगे
अगर किसी राज्य की आबादी करीब 16 लाख हो तो उसके निवासियों के कल्याण के लिए बेहतर प्रबंध किया जा सकता है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने सामाजिक प्रगति सूचकांक से संबंधित एक रिपोर्ट तैयार करायी थी जो दिसम्बर 2022 में जारी हुई थी। राज्यों और जिले के लिए अगल-अलग सामाजिक प्रगति सूचकांक तैयार किये गये। इसका आंकलन तीन आधारों पर किया गया। संबंधित राज्य या जिले में बुनियादी मानवीय जरुरतों की कितनी पूर्ति हो रही है, वहां जीवनशैली का स्तर क्या है और अवसरों के लिहाज से उसका प्रदर्शन कैसा है। यहां मानवीय जरूरतों का मतलब है कि उस राज्य में पोषण, स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता, व्यक्तिगत सुरक्षा और निवास का स्तर कैसा है। जीवनस्तर का अर्थ है- उस राज्य में रहन-सहन, ज्ञान, सूचना, संचार और पर्यावरण की गुणवत्ता कैसी है। यहां अवसर का अभिप्राय है- उस राज्य में व्यक्तिगत अधिकार, निजी आजादी और चयन, शिक्षा की पहुंच किस स्थिति में है। भारत में सामाजिक प्रगति सूचकांक के मुताबित गोवा तीसरे स्थान पर है।
सिक्किम दुनिया का पहला सम्पूर्ण जैविक खेती वाला प्रदेश
अब बात करते हैं पूर्वोत्तर के राज्य सिक्किम की। सिक्किम की जनसंख्या करीब 6 लाख 50 हजार है। एक राज्य के हिसाब से यह बहुत छोटी आबादी है। इसकी वजह से यहां आर्थिक और सामाजिक तरक्की भी खूब हुई है। सिक्किम में प्रति व्यक्ति आय करीब 4 लाख 72 हजार रुपये सालाना है जो गोवा के बाद दूसरा है। पर्वतीय प्रदेश होने के बावजूद इस राज्य ने खेती को अपनी अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार बनाया है। इस राज्य ने सौ फीसदी ऑर्गेनिक खेती का लक्ष्य हासिल कर दुनिया भर में नाम कमाया है। खेती के विकास के कारण यहां कृषि आधारित उद्योग को बढ़ावा मिला है। एग्रीकल्चर सेक्टर में यहां के लोगों को सबसे अधिक रोजगार मिला है। सौ फीसदी जैविक खेती के लिए संयुक्त राष्ट्र के फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेंनाइजेशन ने सिक्किम को फ्यूचर पॉलिसि गोल्ड अवार्ड से सम्मानित किया था।
सामाजिक विकास सूचकांक में दूसरा पूर्ण राज्य
सिक्किम का सबसे बड़ा कृषि उत्पाद काली (बड़ी) इलायची है। काली इलायची एक बहुत महंगा मसाला है। काली इलायची का 88 फीसदी हिस्सा अकेले सिक्किम उत्पादित करता है। इसके अलावा यहां धान, कुट्टू( Buck wheat), मकई, आलू और टेमी चाय का उत्पादन होता है। कुट्टू फल का एक बीज होता है जो गेहूं से मिलता जुलता है। इसकी गिनती अनाज में नहीं बल्कि फल में होती है। पूजा में फलाहार करने वाले लोग कूट्टू का चावल या खीर बना कर खाते हैं। चूंकि सिक्किम के कृषि उत्पाद जैविक होते हैं इसलिए देशभर में इनकी जबर्दस्त मांग रहती है और ये महंगे बिकते हैं। खेती के अलावा पर्यटन सिक्किम की आय का दूसरा सबसे स्रोत है। सामाजिक विकास सूचकांक के मुताबिक सिक्किम- पुद्दुचेरी, लक्षद्वीप और गोवा के बाद चौथे स्थान पर हैं। यानी जीवनस्तर और मूलभूत सुविधाओं के लिहाज से सिक्किम भारत का दूसरा पूर्ण राज्य है। इसलिए बड़े राज्यों को जनसंख्या विस्फोट के बार में सोचना चाहिए।












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