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World Poetry Day 2025: विश्व कविता दिवस 21 मार्च को क्यों मनाया जाता है? पढ़िए हिंदी की 3 बेहतरीन कविताएं

World Poetry Day 2025: विश्व कविता दिवस हर साल 21 मार्च को मनाया जाता है। कविताएं अपने शब्दों को कहने का वो माध्यम है जो कम शब्दों में आपके दिल की बात को जाहिर कर देती है। कविता में या काव्य में कुल नौ रस होते हैं। ये रस जीवन के प्रेम, सौंदर्य, हंसी , विनोद उत्साह और पराक्रम जैसे रस को आपके सामने प्रकट करते हैं। आज हम आपको बताएंगे विश्व कविता दिवस क्यों मनाया जाता है? इसके साथ ही पढ़िए प्रेम और वीर रस की कुछ शानदार कविताएं।

विश्व कविता दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य कविता के प्रति लोगों की रुचि को बढ़ावा देना और विश्व भर के कवियों को सम्मान देना है। कविता सांस्कृतिक विरासत,परंपरा और भावनाओं को संरक्षित करने का कार्य करती है। इस दिवस के माध्यम से साहित्य और कला को आगे बढ़ाने पर बल दिया जाता है। यूनेस्को (UNESCO) ने वर्ष 1999 में पेरिस में हुए अपने 30वें अधिवेशन में 21 मार्च को "विश्व कविता दिवस" की शुरुआत की थी।

World Poetry Day

पेश हैं हिंदी साहित्य की 3 बेहतरीन कविताएं

कविता दिवस पर विभिन्न देशों में कविता पाठ, लेखन प्रतियोगिताएं, और कवि सम्मेलनों का आयोजन किया जाता है। कवियों की रचनाओं का पाठ और उनकी कविताओं पर चर्चा की जाती है। स्कूल, कॉलेज, और पुस्तकालयों में कविता लेखन प्रतियोगिताएं होती हैं। सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से कविताओं को साझा किया जाता है। कविता को संजोना हम सबकी जिम्मेदारी है। आइए विश्व कविता दिवस पर कुछ रोचक कविताएं पढ़ते है जो आपके दिल को छू जाएगी। पेश हैं हिंदी साहित्य की 3 बेहतरीन कविताएं।

'राष्ट्रकवि' रामधारी सिंह दिनकर की कविता उर्वशी का एक अंश

मर्त्य मानव की विजय का तूर्य हूँ मैं,
उर्वशी! अपने समय का सूर्य हूँ मैं
अंध तम के भाल पर पावक जलाता हूँ,
बादलों के सीस पर स्यंदन चलाता हूँ
पर, न जानें, बात क्या है !

इन्द्र का आयुध पुरुष जो झेल सकता है,
सिंह से बाँहें मिलाकर खेल सकता है,
फूल के आगे वही असहाय हो जाता ,
शक्ति के रहते हुए निरुपाय हो जाता

विद्ध हो जाता सहज बंकिम नयन के बाण से
जीत लेती रूपसी नारी उसे मुस्कान से

मैं तुम्हारे बाण का बींधा हुआ खग
वक्ष पर धर शीश मरना चाहता हूँ.
मैं तुम्हारे हाथ का लीला कमल हूँ
प्राण के सर में उतरना चाहता हूँ।


आधुनिक कवि कुमार विश्वास की प्रेम रस की कविता

कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है !
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !!
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ, तू मुझसे दूर कैसी है !
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है !!
मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है !
कभी कबिरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है !!

यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं !
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है !!
समंदर पीर का अन्दर है, लेकिन रो नहीं सकता !
यह आँसू प्यार का मोती है, इसको खो नहीं सकता !!
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना, मगर सुन ले !
जो मेरा हो नहीं पाया, वो तेरा हो नहीं सकता !!

वीर रस की कविता की बेहतरीन कविता

बदल,बदल ,बदल ... बदल तुझे बदलना होगा
महलों का कबूतर नहीं है तू , तुझे बाज जैसा उड़ना होगा
बुझती ज्वाला को देख आज, स्वयं तुझे कुंड में कूदना होगा
तेरे पथ पर फूल नहीं , तुझे कांटो पर ही चलना होगा
बदल, बदल ... बदल तुझे बदलना होगा

मोम सा किरदार नहीं तेरा, तुझे सोना जैसा तपना होगा
खत्म हो जाएं तेरे ईमान की स्याही , तो तुझे रक्त से भी लिखना होगा
क्योंकि, सत्य की अवाज है तू,मानवता की शान है तू
कर्तव्य पथ पर अडिग रह ,लोकतंत्र का पहरेदार है तू
बदल, बदल...बदल तुझे बदलना होगा

टूट जाएं शमशीर तेरी , फिर भी विश्व विजेता बनना होगा
परिवर्तन नहीं क्रांति का, नया इतिहास रचना होगा
क्योंकि, हिमालय जैसा स्वाभिमान है तेरा
गंगा जैसा प्रवाह है तेरा
चमक उठे जो सूरज जैसा ,वैसा ही प्रकाश है तेरा
सजेगा तेरे,सरताज बंदे
क्योंकि शेर सा दहाड़ है तेरा

बदल , बदल ...बदल तुझे बदलना होगा
संकट भले विकट होगा लेकिन जीत तेरा निकट होगा
हार कर तू बैठ मत
कुछ कर गुजर ...कुछ कर गुजर
युगों ,युगों तक युग पढे़गा
ऐसा तू इतिहास गढ़
बदल , बदल ... बदल तुझे बदलना होगा ।

कवि- अंकित तिवारी

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