Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

दुनिया वैक्सीन के भरोसे बैठी हैं और WHO कह रही है वैक्सीन के भरोसे न बैठे, जानिए क्या है इसके मायने?

बेंगलुरू। कोरोना वायरस महामारी संकट से उबरने और निपटने का एकमात्र रास्ता, पगडंडी और द्वार वैक्सीन को माना जा रहा है, लेकिन वैक्सीन के बाजार में उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता ने अवसाद और लापरवाही दोनों को बढ़ा दिया है। यही कारण है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन को बयान जारी करके पूरी दुनिया का आगाह किया है। डब्ल्युएचओ ने कहा है कि वैक्सीन के भरोसे में सुरक्षा उपायों की अनदेखी पूरी दुनिया पर भारी पड़ सकती है।

vaccine

विश्व स्वास्थ्य संगठन को यह चेतावनी इसलिए जारी करनी पड़ी है

विश्व स्वास्थ्य संगठन को यह चेतावनी इसलिए जारी करनी पड़ी है

विश्व स्वास्थ्य संगठन को यह चेतावनी इसलिए जारी करनी पड़ी है, क्योंकि अधिकांश देशों में कोरोना महामारी से जुड़े सुरक्षा उपायों में जरूरत से अधिक ढुलमुल रवैया अपनाना शुरू कर दिया है।

हर्ड इम्यूनिटी के विकसित करने के पक्ष में सुरक्षा उपायों को ताख पर रखा

हर्ड इम्यूनिटी के विकसित करने के पक्ष में सुरक्षा उपायों को ताख पर रखा

कुछ देशों ने ब्रिटेन और स्वीडन की नकल करते हुए हर्ड इम्यूनिटी के विकसित करने के पक्ष में सुरक्षा उपायों को ताख पर रखकर गैर जरूरी लॉकडाउन छूट के जरिए पांव को कुल्हाड़ी पर मार रहे हैं।

लॉकडाउन में ढील से संक्रमण के और तेज़ी से फैलने का डर है

लॉकडाउन में ढील से संक्रमण के और तेज़ी से फैलने का डर है

WHO के आपातकालीन निदेशक माइक रायन ने कहा कि अमरीका में लॉकडाउन में ढील और कुछ इलाक़ों को खोलने से संक्रमण के और तेज़ी से फैलने का डर है।

संभावित वैक्सीन के बाजार तक पहुंचने की निकट संभावनाओं पर आशंका

संभावित वैक्सीन के बाजार तक पहुंचने की निकट संभावनाओं पर आशंका

संभावित वैक्सीन के बाजार तक पहुंचने की निकट संभावनाएं और पूरी दुनिया में प्रभावित सभी लोगों तक पहुंचने की आशंका के चलते WHO ने पूरी दुनिया के देशों को वैक्सीन के भरोसे में सुरक्षा उपायों से खिलवाड़ नहीं करने की हिदायत दी है, क्योंकि अभी तक ऐसी कोई प्रभावी कोरोना वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हुई है, क्योंकि रूस द्वारा घोषित स्पूतिन वी वैक्सीन की प्रभावकारिता पर WHO ने सवाल उठा दिए हैं।

 कई सारे देश कोरोना से निपटने के मामले में ग़लत दिशा में जा रहे हैं

कई सारे देश कोरोना से निपटने के मामले में ग़लत दिशा में जा रहे हैं

WHO प्रमुख डॉ टेड्रोस एडनॉम गेब्रियेसस का कहना है कि दुनिया के कई सारे देश कोरोना से निपटने के मामले में ग़लत दिशा में जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस से संक्रमण के नए मामले बढ़ रहे हैं, जिससे साबित होता है कि जिन एहतियात और उपाय की बात की जा रही है, उनका पालन नहीं किया जा रहा है। उत्तरी और दक्षिणी अमरीका इस महामारी की चपेट में अभी सबसे बुरी तरह से ग्रस्त हैं।

जून में कोरोना मामलों में गिरावट के बाद भारत में जुलाई में नए केस बढ़े

जून में कोरोना मामलों में गिरावट के बाद भारत में जुलाई में नए केस बढ़े

भारत परिपेच्छ में देखे तो जून महीने में कोरोना मामलों में गिरावट के बाद जुलाई महीने अचानक आए नए मामलों के तूफान ने एक बार फिर भारत के कई राज्यों को दोबारा लॉकडाउन के लिए मजबूर होना पड़ा है, जिससे रोजगार के साथ-साथ उद्योग-धंधों पर असर पड़ा है। इसकी पुष्टि एक सर्वे रिपोर्ट करती है। उसे मुताबिक जुलाई महीने में अकेले भारत में दोबारा लॉकडान लगाने से 50 लाख वेतनभोगी कर्मचारियों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है, जबकि जून महीने में स्थिति में सुधार आया था और 39 लोख रोजगार मिला था।

भारत में 3 घरेलू कोरोना वैक्सीन की संभावनाओं पर सकारात्मक ऊर्जा बढ़ी

भारत में 3 घरेलू कोरोना वैक्सीन की संभावनाओं पर सकारात्मक ऊर्जा बढ़ी

भारतीय स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन घरेलू कोरोना वैक्सीन की संभावनाओं पर देश को एक सकारात्मक ऊर्जा देने की कोशिश थी। हालांकि तीनों कोरोना वायरस वैक्सीनों के इंसानों पर शुरुआती ट्रायल के नतीजे सकारात्मक ही मिले हैं, लेकिन वैक्सीन कब तक बाजार में उपलब्ध होगा, इसको लेकर अभी भी संशय बरकरार है।

संभावित वैक्सीन को 2021 से पहले इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा

संभावित वैक्सीन को 2021 से पहले इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा

विशेषज्ञों की मानें तो अभी कई महीनों तक आम लोगों को वैक्सीन नहीं मिल सकेगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एक भी एक्सपर्ट का यही कहना है कि संभावित वैक्सीन को 2021 से पहले इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। उनके मुताबिक अभी आखिरी चरण के ट्रायल में बड़ी संख्या में लोगों पर टेस्ट किए जाने के बाद ही पता चल सकेगा कि उक्त वैक्सींश वाकई में असरदार हैं या नहीं?

2020 में किसी वैक्सीन की बाजार में उपलब्धता को लेकर निश्चिंत नहीं: WHO

2020 में किसी वैक्सीन की बाजार में उपलब्धता को लेकर निश्चिंत नहीं: WHO

WHO के हेल्थ इर्जेंसी प्रोग्राम के हेड डॉ. माइक रायन एक बयान में कहते हैं, 'हम अच्छी प्रगति कर रहे हैं' लेकिन उन्होंने 2020 में किसी वैक्सीन की बाजार में उपलब्धता को लेकर निश्चिंत नहीं है। उनके मुताबिक अगले साल यानी 2021 के पहले हिस्से में लोगों को वैक्सीन मिलना शुरू हो सकता है। उन्होंने कहा कि वैक्सीन गरीब या अमीर नहीं, सबके लिए होती हैं। यह जरूरी है कि वैक्सीन सभी लोगों के लिए एक साथ उपलब्ध हो।

नतीजे उम्मीद जगाने वाले, लेकिन साबित नहीं हुआ कि वैक्सीन असरदार है

नतीजे उम्मीद जगाने वाले, लेकिन साबित नहीं हुआ कि वैक्सीन असरदार है

यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के एपिडिमियॉलजी में एसोसिएट प्रोफेसर ऑब्री गोर्डन कहते हैं कि पहले और दूसरे चरण के ट्रायल के नतीजे उम्मीद जगाने वाले हैं, लेकिन यह भी याद रखना चाहिए कि इनसे अभी यह साबित नहीं हुआ है कि वैक्सीन असरदार है। उन्होंने आगे कहा कि शुरुआती चरणों के ट्रायल सुरक्षा देखने और यह पता करने के लिए होते हैं कि वैक्सीन से इम्यून रिस्पॉन्स पैदा हो रहा है या नहीं।

वैक्सीन बनाने की रेस में ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी, मोडरेना इंक आगे हैं

वैक्सीन बनाने की रेस में ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी, मोडरेना इंक आगे हैं

फिलहाल, वैक्सीन बनाने की रेस में ब्रिटेन की ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी, अमेरिका की मोडरेना इंक और चीन की कैनसिनो की वैक्सीन इंसानों पर ट्रायल के शुरुआती चरण पार कर चुकी हैं। ऑक्सफर्ड की वैक्सीन को इस रेस में सबसे आगे माना जा रहा है, क्योंकि यह ज्यादा असरदार पाई गई है। इसे दिए जाने पर ट्रायल में एंटीबॉडी और T-cell पाए गए। भारत में Serum Institute of India इसका उत्पादन करेगा। सीरम ने इसके लिए AstraZeneca के साथ समझौता किया है।

कोरोना वायरस अब भी लोगों का नंबर वन दुश्मन हैः डब्ल्यूएचओ

कोरोना वायरस अब भी लोगों का नंबर वन दुश्मन हैः डब्ल्यूएचओ

हाल में जिनेवा में आयोजित प्रेस वार्ता WHO प्रमुख डॉ टेड्रोस ने उन देशों को चेतावनी देते हुए कहा कि कोरोना वायरस अब भी लोगों का नंबर वन दुश्मन है और अभी तक वैक्सीन की उपलब्धता सभी के लिए सुनिश्चित हो सकी है और अगर इसकी पहुंच कुछ देशों तक सीमित रहता है, तो पूरी दुनिया के लिए खतरा बना रहेगा। उन्होंने दुनिया भर की कई सरकारों द्वारा उठाए जा रहे क़दम को रेखांकित करते हुए कहा कि आभास नहीं होता है कि कोरोना को ऐसे देश गंभीर ख़तरे की तरह नहीं ले रही हैं।

सोशल डिस्टेंसिंग, हाथ धोना और मास्क को बचाव का है कारगर तरीक़ा

सोशल डिस्टेंसिंग, हाथ धोना और मास्क को बचाव का है कारगर तरीक़ा

डा. ट्रेडोस ने कोरोना महामारी से लड़ाई के खिलाफ जरूरी सोशल डिस्टेंसिंग, हाथ धोना और मास्क को बचाव का कारगर तरीक़ा बतलाते हुए कहा कि वैक्सीन के सभी लोगों के लिए उपलब्धता तक सोशल डिस्टेंसिंग, हाथों का सैनिटाइजेशन और चेहरे पर मास्क पहने को गंभीरता से लिए जाने की ज़रूरत है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि निकट भविष्य में ऐसा लगता नहीं है कि पहले की तरह सब कुछ सामान्य हो जाएगा।

बुनियादी चीज़ों का पालन नहीं किया गया तो कोरोना थमेगा नहीं

बुनियादी चीज़ों का पालन नहीं किया गया तो कोरोना थमेगा नहीं

बकौल ट्रेडोस, अगर बुनियादी चीज़ों का पालन नहीं किया गया तो एक ही रास्ता है कि कोरोना थमेगा नहीं और वो बढ़ता ही जाएगा। यह बद से बदतर होता जाएगा।

कोरोना वैक्‍सीन के नाम पर राष्‍ट्रवाद का डंका बजाने वालों को WHO ने चेताया

कोरोना वैक्‍सीन के नाम पर राष्‍ट्रवाद का डंका बजाने वालों को WHO ने चेताया

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया को कोरोना वैक्‍सीन के नाम पर राष्‍ट्रवाद का डंका बजाने के प्रति चेताया है। उन्होंने कहा टीके विकसित कर रहे अमीर देशों को 'वैक्सीन राष्ट्रवाद' से बचना होगा, क्योंकि यदि दुनिया के गरीब देशों से कोरोना संक्रमण खत्म नहीं हुआ तो अमीर देश भी दोबारा इसकी चपेट में आने से बच नहीं पाएंगे। समृद्ध देशों के हित में होगा कि वे विकसित होने वाली किसी भी कोरोना वैक्सीन को पूरी दुनिया में उपलब्ध करवाएं, जिससे इस बीमारी का दुनिया भर में अंत किया जा सके।

दुनिया भर में कोरोना से निजात पाने के लिए प्लान B पर चर्चा होने लगी है

दुनिया भर में कोरोना से निजात पाने के लिए प्लान B पर चर्चा होने लगी है

वहीं, वैक्सीन की बाजार में उपलब्धता को लेकर अनिश्चिचता के बादल को देखते हुए अब दुनिया भर में कोरोना से निजात पाने के लिए प्लान B पर चर्चा होने लगी है। हर्ड इम्युनिटी को प्लान बी कहा जा रहा है। यानी ज्यादा से ज्यादा लोगों में कोरोना का संक्रमण फैलाना, जिससे कोरोना के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोधकता पैदा की जा सके। इसके लिए किसी भी कम्युनिटी में कम से कम 60 फीसदी लोग संक्रमित होने चाहिए। हालांकि 'साइंस' जर्नल में छपी एक नई रिपोर्ट में 48 फीसदी को हर्ड इम्यूनिटी के लिए सही करार दिया गया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने प्लान-B यानी हर्ड इम्यूनिटी को खरतनाक बताया है

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने प्लान-B यानी हर्ड इम्यूनिटी को खरतनाक बताया है

हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हर्ड इम्यूनिटी को खरतनाक बताया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के हेल्थ इमरजेंसी डायरेक्टर डॉ माइकल रेयान ने साफ करते हुए कहा कि यह सोचना गलत है कि कोई भी देश कोविड 19 के लिए अपनी आबादी पर कोई जादू चला कर उसमें इम्युनिटी भर देगा। उन्होंने आगे कहा कि हर्ड इम्युनिटी की बात तब की जाती है जब देखना होता है कि किसी आबादी में कितने लोगों को वैक्सीन की जरूरत है।

दुनिया में सर्वाधिक प्रभावितों में नंबर-1 पर है उत्तरी अमेरिकी देश अमेरिका

दुनिया में सर्वाधिक प्रभावितों में नंबर-1 पर है उत्तरी अमेरिकी देश अमेरिका

दुनिया में सर्वाधिक कोरोना प्रभावित में पहले नंबर पर उत्तरी अमेरिकी देश अमेरिका का नाम शुमार है और दूसरे नंबर दक्षिण अमरीकी (लातिन अमेरिका) देश ब्राजील शुमार हैं, जहां एक लाख 45 हज़ार से ज़्यादा लोगों की जान कोरोना से जा चुकी है। अमेरिका में 1 लाख 70 हजार की जान कोरोना लील चुका है। ब्राजीली राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो सख़्त लॉकडाउन के ख़िलाफ़ रहे थे। यहां तक कि लॉकडाउन का मज़ाक उड़ाते थे।

ट्रंप ने जल्द बाजार और स्कूलों को खोलने के लिए दवाब बनाना शुरू किया

ट्रंप ने जल्द बाजार और स्कूलों को खोलने के लिए दवाब बनाना शुरू किया

कमोबेश यही हाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रहा है, जिन्होंने जल्द से जल्द बाजार और स्कूलों को खोलने के लिए दवाब बनाना शुरू कर दिया था। डॉ रायन के मुताबिक लॉकडाउन से भारी आर्थिक नुक़सान हो रहा है, लेकिन कुछ ख़ास जगहों पर लॉकडाउन संक्रमण रोकने के लिए बहुत ज़रूरी है। उन्होंने दुनिया भर की सरकारों से आग्रह किया कि वे स्पष्ट और मज़बूत रणनीति अपनाएं और नगारिकों से कहा कि वो गंभीरता को समझेऔर गाइडलाइन्स का पालन करें।

कोरोना से ठीक हुए मरीज़ों में बनी इम्युनिटी छोटी अवधि की लिए हो सकती है

कोरोना से ठीक हुए मरीज़ों में बनी इम्युनिटी छोटी अवधि की लिए हो सकती है

लंदन के किंग्स कॉलेज के वैज्ञानिकों द्वारा जारी एक रिपोर्ट में बताया गया कि कोरोना से ठीक हुए मरीज़ों में बनी इम्युनिटी छोटी अवधि की लिए हो सकती है। वैज्ञानिकों द्वारा बताया कि उन्होंने 96 लोगों पर अध्ययन किया कि कैसे शरीर एंटीबॉडीज के ज़रिए स्वाभाविक रूप से कोरोना का सामना करता है और यह कितने दिनों तक टिकता है। स्टडी में शामिल सभी लोगों में मिले एंटीबॉडीज कोरोना वायरस को रोक सकते थे, लेकिन तीन महीने की अवधि में इनका स्तर कम होने लगा था।

कोरोना वायरस लोगों के सांस लेने या बोलने से भी फैल सकता है: फाउसी

कोरोना वायरस लोगों के सांस लेने या बोलने से भी फैल सकता है: फाउसी

अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) में संक्रमण बीमारियों के विभाग के प्रमुख एंथनी फाउसी ने चौंकाते हुए बताया कि कोरोना वायरस लोगों के सांस लेने या बोलने से भी फैल सकता है। हालांकि अभी तक केवल खांसने या छींकने से वायरस के फैलने की जानकारी थी। इस जानकारी के आधार पर केवल संक्रमित मरीज और उनकी देखरेख में लगे लोगों को ही मास्क पहनने की सलाह दी जाती थी। उन्होंने ताजा रिसर्च की जानकारी व्हाइट हाउस को भेजी थी।

 कोरोना वायरस महामारी के

कोरोना वायरस महामारी के "लम्बे" वक्त रहने की संभावना है: WHO

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी देते हुए कहा है कि कोरोना वायरस महामारी के "लम्बे" वक्त रहने की संभावना है। WHO के मुताबिक देशों को कोरोना वायरस वैक्‍सीन का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि सुरक्षा उपायों का कड़ाई से पालन और अनुपालन पर जोर देना चाहिए। WHO के वेस्‍टर्न पैसिफिक रीजनल डायरेक्‍टर ताकेशी कसई के मुताबिक वैक्‍सीन पर ज्‍यादा निर्भर न रहें, क्‍योंकि शुरुआत में ज्‍यादा डिमांड के चलते उसकी पर्याप्‍त सप्‍लाई नहीं हो पाएगी।

जब तक सारे देश प्रोटेक्‍ट नहीं होते, कोई देश सेफ नहीं है: ताकेशी कसई

जब तक सारे देश प्रोटेक्‍ट नहीं होते, कोई देश सेफ नहीं है: ताकेशी कसई

बकौल कसई, जब तक सारे देश प्रोटेक्‍ट नहीं होते, कोई देश सेफ नहीं है। हमें अपने रेस्‍पांस को बेहतर करने पर ध्‍यान देना चाहिए, सिर्फ वैक्‍सीन से उम्‍मीद मत लगाइए।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+