OI exclusive: बेंगलुरु की सोनिया का 100% Eco-Friendly घर, हैरान कर देगा जीरो वेस्ट, जीरो बिल्स का आइडिया
World environment day 2025: बेंगलुरु की सोनिया शर्मा ने साबित कर दिया है कि शहर में भी पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना आधुनिक और लग्जरी लाइफ जी सकते हैं। इन्होंने ना केवल अपना 100% इको-फ्रेंडली घर (eco friendly House) बनाया है, बल्कि हर उस पहलू का ध्यान रखा है जिससे प्रकृति को नुकसान ना पहुंचे। आपको जानकर ताज्जुब होगा कि सोनिया ना ही सरकार की बिजली पर निर्भर है और ना ही पानी पर। आइए विश्व पर्यावरण दिवस पर सोनिया शर्मा से जानते हैं उनके 100% इको-फ्रेंडली घर की खासियत और जानते हैं शहर में कम खर्च में सस्टेनेबल और हेल्दी लाइफ कैसे संभव है?
बेंगलुरु की सोनिया शर्मा OneIndia से एक्क्लूसिव इंटरव्यू में बताया उन्होंने अपना ये इको-फ्रेंडली घर आज से दस साल पहले बनाया है। प्रकृति प्रेमी सोनिया शर्मा की सोच थी कि वो अपना आशियाना ऐसा बनाएगी जिसमें प्रकृति से इंसान को मिले उपहार का भरपूर इस्तेमाल हो सके।

बस इसी सोच के साथ उन्होंने रिसर्च शुरू की और 100 फीसदी इको फ्रेंडली घर बनाने की ठानी। कुछ ही सालों की मेहनत रंग लाई और सोनिया ने प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग करके अपना 100% इको-फ्रेंडली घर बनाया। जिसमें सोनिया बिजली-पानी सभी चीजों के लिए पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर हैं।
मिट्टी की ईंटों से बना है घर?
सोनिया शर्मा का घर स्टेबलाइजर मड ब्लॉक (मिट्टी के ईट) से बना है। इन ईटों की खासियत ये है कि इन्हें उसी घर बनाने से पहले नींव से निकली हुई मिट्टी से बनाया गया है। घर में मड ब्लॉक (मिट्टी के ईट) के इस्तेमाल किए जाने की वजह से पूरा घर जाड़ों में गरम और गर्मियों में ठंडा रहता है।
घर की छत की खासियत
सोनिया के घर की छत सामान्य घरों की छत की तरह फ्लैट नहीं है, ऊंची गोलाकार है, इस छत को सरिए के फ्रेम में ढालने में कम से कम से कंक्रीट का इस्तेमाल किया गया है। ऐसी छत बनाने के दो फायदे हैं एक तो ये कमरों को जाड़ों में गरम और गर्मियों में ठंडा रखता है और दूसरा गोलाकार छत की वजह से रेनहार्वेस्टिंग के लिए सामान्य छत की अपेक्षा अधिक पानी कलेक्ट होता है।
प्राकृतिक रोशनी और वेंटिलेशन
सोनिया के घर में दिन के समय कोई भी लाइट जलाने के जरूरत नहीं पड़ती है। इसकी वजह है कि घर के बीच छत पर कई टुकड़ों में ग्लॉस लगा है, जिससे घर के तीनों फ्लोर तक नेचुरल लाइट पहुंचती है। इसके अलावा इस घर में बड़ी-बड़ी खिड़कियां हैं जिसकी वजह से घर हवादार है और सूर्य की रोशनी आने से घर के किसी भी कोने में अंधेरा नहीं रहता।
बिजली की आत्मनिर्भरता, जीरो बिजली बिल
सोनिया अपने घर में एक भी यूनिट बिजली सरकार से नहीं करती हैं। घर की छत पर लगे सोलर पैनल्स से पूरी बिजली सौर्य ऊर्जा से उत्पन्न होती है। इस बिजली से सोनिया का पूरा घर रोशन रहता है। फ्रिज, वॉशिंग मशीन समेत अन्य इलेक्ट्रिक सामनों के अलावा, घर में सोलर पैनल से उत्पन्न होने वाली बिजली से इनकी इलेक्ट्रिक कार भी चार्ज होती है। यानी जीरो बिल।
जल संरक्षण और आत्मनिर्भरता
इस घर के आंगन में बने अंडरग्राउंड वॉटर टैंक में बारिश का लगभग 50 हजार लीटर पानी एकत्र होता है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग के जरिए बारिश का पानी जो एकत्र होता है उसे नेचुरल तरीके से फिल्टर किया जाता है और इस पानी को सोनिया के घर में बाकी जरूरतों के साथ पीने तक में भी इस्तेमाल किया जाता है।
ग्रे वॉटर रिसाइकलिंग, जीरो वेस्ट
इस इको फ्रेंडली घर में रहने वाले सदस्यों के द्वारा हर दिन नहाने, वॉशिंग मशीन और किचन में जो पानी यूज किया जाता है, यानी एक बूंद भी पानी वेस्ट नहीं होता है। इस घर में यूज पानी को रिसाइकल कर नेचुरल तरीके से फिल्टर किया जाता है और दोबारा इस्तेमाल में लाया जाता है। ये नेचुरल प्रोसेस से इतना साफ हो जाता है कि इसका इस्तेमाल दोबारा कपड़े धोने, फ्लश के अलावा गार्डनिंग में किया जाता है।
वर्मी कम्पोस्टिंग यूनिट
घर का जैविक कचरा खाद में बदला जाता है, जिससे सोनिया किचन गार्डन में सब्जियां और फल उगाती हैं। इतना ही नही घर में वर्षा के जल से संरक्षित किए गए पानी से सोनिया अपनी सोसाइटी में लगे पेड़ों को भी सींच कर हरा-भरा रखती हैं।












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