World Day for International Justice 2021: सुप्रीम कोर्ट के वो बड़े फैसले, जिनकी विदेश में भी हुई चर्चा
नई दिल्ली, 17 जुलाई। विश्व भर में हर वर्ष 17 जुलाई को अन्तराष्ट्रीय न्याय दिवस मनाया जाता है। ये दिवस आपराधिक कृत्यों से प्रभावित पीड़ितों के मौलिक मानवाधिकारों की वकालत करने के लिए काम करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करके अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्याय दिवस मनाया जाता है। इस तारीख पर रोम संविधि को अपनाने के बाद औपचारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) की स्थापना की गई थी। इस वर्ष की थीम "डिजिटल अर्थव्यवस्था में सामाजिक न्याय" है, जो आधुनिक युग के लिए एक सामयिक विषय है जहां अपराधी पारंपरिक आपराधिक रणनीति के बजाय उन्नत इंटरनेट-आधारित साधनों पर तेजी से भरोसा कर रहे हैं। इस अवसर पर हम आपको भारतीय उच्चतम न्यायालय के वो ऐतिहासिक निर्णयों को याद दिलाने जा रहे हैं जिन फैसलों की तारीफ देश ही नहीं विश्व भर में हुई।
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अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर मामले पर सुप्रीम कोर्ट का द्वारा दिया गया ऐतिहासिक निर्णय
बाबरी मस्जिद विध्वंस मामला सुप्रीम कोर्ट के लिए बेहद अहम और पेंचीदा रहा, 1992 में अयोध्या में हुए बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले के बाद राम मंदिर-बाबरी मस्जिद से जुड़े जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई रोजाना की गई। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली 5 सदस्यीय पीठ ने फैसला सुनाया था। 491 साल पुराना वो केस जिसका इंतजार हर कोई बड़ी बेसब्री से कर रहा था, हर किसी के जेहन में ये सवाल गूंज रहा था कि अयोध्या में उस विवादित जमीन पर क्या बनेगा। इसका जवाब देते तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने राम मंदिर और बाबरी मस्जिद की विवादित जमीन के पर अंतिम फैसला 9 नवंबर 2019 सुनाया। यह गोगोई के करियर का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक फैसला रहा। रिटायरमेंट के 8 दिन पहले वर्षों पुराने अयोध्या विवाद पर राम मंदिर निर्माण का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में रामलला विराजमान के पक्ष में फैसला सुनाया। शीर्ष कोर्ट ने अयोध्या की विवादित जमीन को रामलला विराजमान को देने और मुस्लिम पक्षकार (सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड) को अयोध्या में अलग से 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की चर्चा विदेशों में हुई।
निर्भया केस में चारों हत्यारों को एक साथ फांसी पर लटकाया गया
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर निर्भया के चार हत्यारों को 7 साल के लंबे इंतजार के बाद 20 मार्च 2020 को निर्भया के गुनहगारों को फांसी पर लटका दिया गया था। फांसी से बचने के लिए आखिरी वक्त तक निर्भया के गुनाहगारों ने प्रयास किया। सुप्रीम कोर्ट ने गुनाहगार पवन की याचिका 20 मार्च को भोर में खारित की और सुबह साढ़े पांच बजे चारों दंरिदों को फांसी के तख्त पर चढ़ा दिया गया। मुजरिमों ने गुरुवार को लगातार पटियाला हाउस कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अलग-अलग अर्जियां दाखिल की और एक-एक कर तमाम अर्जियां खारिज होती गई। निर्भया के हत्यारों ने फांसी की सजा से बचने के लिए तमाम तिकड़म और कानूनी दांव पेंच का सहारा लिया लेकिन आखिरकार न्याय की जीत हुई। इस केस में मृतक निर्भया के परिवार को मिले न्याय की तारीफ दुनिया भर में हुई।
सुशांत केस में सीबीआई जांच पर मुहर
बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत केस में सुप्रीम कोर्ट ने 19 अगस्त 2020 को बड़ा फैसला सुनाया और इस केस की की जांच सीबीआई से करवाने का आदेश दिया और महाराष्ट्र सरकार सीबीआी को सहयोग करे। महाराष्ट्र सरकार तमाम जांच संबंधित दस्तावेज में मदद करे। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से कहा है कि वह भविष्य में सुशांत केस से संबंधित मामले को अपने हाथों में ले। कोर्ट ने ये भी कहा सीबीआई न सिर्फ पटना के एफआईआर मामले की जांच के लिए सक्षम है बल्कि आगे भी कोई केस दर्ज होता है इस मामले में तो वह सीबीआई देखेगी। इस फैसले की भी तारीफ भी विदेश तक में हुई। ये निर्भया के बाद 2020 का सबसे चर्चित केस था।












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