क्या महिला आरक्षण से विपक्षी गठबंधन INDIA के मंसूबों को ध्वस्त कर पाएगी बीजेपी ?
Women Reservation Bill: बीजेपी ने महिला सशक्तिकरण को चुनावी मुद्दा बनाने के लिए बड़ा कदम बढ़ा दिया है। केंद्र में सत्ताधारी दल का लक्ष्य स्पष्ट तौर पर आने वाले पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव और 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों के साथ अन्य राज्य विधानसभा चुनावों पर है।
मंगलवार को संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने के लिए सरकार ने जो विधेयक पेश किया है, उसके नाम में ही पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार का बहुत बड़ा संदेश छिप है-' नारी शक्ति वंदन अधिनियम'।

महिला आरक्षण बिल के नाम से ही सरकार का इरादा साफ
महिला वोटर हमेशा से बीजेपी की चुनावी रणनीति की मूल में रही हैं। देश में महिलाओं के लिए जो एक-तिहाई आरक्षण देने का विधेयक पेश किया गया है, उसके शाब्दिक अर्थ पर गौर करें तो इसका अर्थ है- 'नारी या स्त्री शक्ति की पूजा'। औपचारिक तौर पर लोकसभा में यह बिल पेश किए जाने से पहले पीएम मोदी ने जो लाइन कही, वह भी काबिले गौर है।
पीएम मोदी ने कहा, 'शायद भगवान ने इस पवित्र कार्य के लिए मुझे चुना है, ताकि महिलाएं सशक्त हों और उनकी शक्ति का उपयोग हो। एक बार फिर से हमारी सरकार ने इस दिशा में कदम उठाया है।' प्रधानमंत्री ने सर्वसम्मति से बिल पास कराने का अनुरोध करते हुए कहा, 'महिलाएं आगे बढ़ रही हैं और यह महत्वपूर्ण है कि नीति निर्माण में हमारी माताएं, बहनें और महिलाओं को योगदान करना चाहिए।'
'साइलेंट वोटर' को सम्मान देने की पहल
आने वाले विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए बीजेपी 'महिला सम्मान' के नारे के साथ ये बातें लेकर महिला मतदाताओं के बीच पहुंचने वाली है। पार्टी को यकीन है कि पहले एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में 200 रुपए की अप्रत्याशित कमी करने के बाद यह कदम चुनावों में उसके आधार को मजबूत करेगा। पार्टी को लगता है कि इससे 33 करोड़ परिवारों को राहत मिली है। क्योंकि, भाजपा हमेशा से मानकर चली है कि महिला लाभार्थियों ने उसके लिए 'साइलेंट' वोटर बनकर सहारा देने का काम किया है।
जातिगत भावनाओं से ऊपर उठने की उम्मीद
बीजेपी ने इसको लेकर एक शोध भी किया है, जिसमें यह बात सामने आई है कि पिछले कई विधानसभाओं में और 2019 के लोकसभा चुनाव में महिला वोटरों ने जातिगत भावनाओं से ऊपर उठकर अपने पसंदीदा उम्मीदवारों के पक्ष में वोट डाले हैं और पार्टी इस 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' विधेयक से अभी यही उम्मीद करती है। क्योंकि, इसके 2029 से पहले लागू होने की संभावना नहीं दिख रही है।
दरअसल, बीजेपी को मालूम है कि विपक्षी गठबंधन इंडिया में शामिल दलों ने जिस तरह से जातिगत जनगणना के बहाने नई राजनीति शुरू की है और बुधवार को खुद कांग्रेस नेता सोनिया गांधी भी लोकसभा में इसकी पैरवी की है, महिला वोटरों पर फोकस करना उसकी रणनीतिक आवश्यकता बन चुकी है।
महिला वोटर बनीं हैं कुछ नेताओं की कुर्सी की गारंटी
तथ्य यह है कि महिला वोटरों के समर्थन ने कुछ मुख्यमंत्रियों की कुर्सियां सुरक्षित करने में भी बड़ी भूमिका निभाई है। बिहार के सीएम नीतीश कुमार और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक इसके बेहतर उदाहरण हैं। भाजपा सरकारों को भी महिलाओं के लिए शुरू की गई कई योजनाओं से चुनावों में काफी फायदा पहुंचाया है।
'पीएम मोदी के लिए भी साइलेंट वोटर हैं महिलाएं'
मोदी सरकार ने महिलाओं को ध्यान में रखकर ही उज्जवला योजना और शौचालयों के निर्माण की योजनाएं शुरू की थीं। इसी तरह से सरकार मुद्रा योजना, जनधन योजना और प्रधानमंत्री आवास योजनाओं में भी महिलाओं को प्राथमिकता दे रही है। भाजपा के एक सूत्र ने कहा है कि 'सभी योजनाओं के केंद्र में महिलाएं रही हैं और यह साइलेंट वोटरों ने एक के बाद एक चुनावों में पीएम मोदी का साथ दिया है।'
पीएम मोदी ने किया था उनके वफादार वोटर होन का दावा
अप्रैल 2022 में भाजपा की स्थापना दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा था, 'सरकार के कल्याणकारी कदमों ने महिलाओं को आत्मविश्वास दिया है और उन्हें बीजेपी का वफादार वोटर बनाया है।' इस साल लाल किले से स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भी उन्होंने महिला की अगुवाई में विकास पर जोर दिया है। खेती में ड्रोन के इस्लेमाल के लिए 2 करोड़ 'लखपति दीदी' वाली योजना का ऐलान किया है।
भाजपा के लोगों का कहना है कि कई चुनावों में महिला वोटरों ने मतदान में पुरुष मतदाताओं को पीछे छोड़ दिया है और 2024 में यह ट्रेंड और भी आगे बढ़ने वाला है। ऐसे समय में मोदी सरकार महिला आरक्षण बिल लेकर आई है, जिसे संसद से कोई भी प्रधानमंत्री पास नहीं करवा पाया।












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