30 जून को रमजान का पहला रोजा

हालांकि, पारंपरिक तौर-तरीके से शनिवार रात चांद का दीदार किया जाना है। अन्य तमाम मौलाना व धर्मगुरु भी शनिवार को ही चांद का दीदार करने के बाद ईद का एलान करेंगे। मौलाना कल्बे सादिक ने करीब चार साल पहले पारंपरिक तौर-तरीकों को दरकिनार कर वैज्ञानिक गणना के आधार पर ईद के एलान किए जाने की वकालत की थी।
पैगम्बर मोहम्मद साहब ने फरमाया इस मुबारक महीने के बारे में कि पहला अशरा रहमत, दूसरा अशरा मग्फिरत, तीसरा अशरा जहन्नम से आजादी का है। अर्थात यह रहमत, मग्फिरत और दोजख से आजादी का महीना है। इबादतगाहों में रौनक बढ़ गयी है। साफ -सफाई का काम अंतिम पड़ाव पर है। रमजान में तरावीह नमाज का विशेष महत्व है। शहर की हर छोटी बड़ी मस्जिदों व मदरसों में तरावीह की नमाज (रात की ऐशा की नमाज के बाद पढ़ी जाती है) विशेष रूप से अदा की जाती है।
वह भी बा जमात (मिलकर)। जामा मस्जिद उर्दू बाजार, मदीना मस्जिद, खूनीपुर स्थित शेख झाऊं, रहमतनगर जामा मस्जिद, रसूलपुर जामा मस्जिद, मस्जिद गाजी रौजा सहित तमाम मस्जिदों में विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। ताकि नमाजियों को किसी प्रकार की दिक्कत न हो। इसी तरह मदरसा दारूल उलूम हुसैनिया दीवान बाजार में सात दिनों में कुरआन मुक्कमल होता है। यहां पर नमाजियों की भीड़ उमड़ पड़ती है। यहा भी तैयारिया आखिरी मरहले में हैं। खूनीपुर स्थित मदरसा अंजुमन हुसैनिया में भी तरावीह की नमाज अदा की जाएगी।










Click it and Unblock the Notifications