Winter Session cancelled:चौथा मौका जब नहीं होगा संसद का शीतकालीन सत्र, जानिए इससे पहले की वजह

नई दिल्ली- आजादी के बाद यह चौथा मौका है, जब संसद का शीतकालीन सत्र नहीं बुलाया जा रहा है। दरअसल, कोविड-19 की वजह से इस साल संसद का शीतकालीन सत्र रद्द (Winter session cancelled)किया गया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि वह संसद का अगला सत्र जल्द बुलाना चाहती है। गौरतलब है कि इससे पहले मानसून सत्र (monsoon session)आयोजित करने में भी देरी हो चुकी है और अचानक कई सांसदों के संक्रमित होने के चलते उसे भी निर्धारित समय से पहले ही स्थगित करना पड़ा था। यही नहीं इस साल का बजट सत्र (budget session) भी कोरोना के दौरान ही आयोजित की गई थी और उसे भी निर्धारित तारीख से पहले ही समेटना पड़ा था।

36 साल बाद शीतकालीन सत्र रद्द

36 साल बाद शीतकालीन सत्र रद्द

करीब 36 साल बाद ऐसा हो रहा है, जब संसद का शीतकालीन सत्र रद्द (Winter session cancelled)कर दिया गया है। केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी (Parliamentary Affairs Minister Pralhad Joshi) ने कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी को भेजे जवाब में कोरोना महामारी की वजह से शीत सत्र नहीं होने की जानकारी दी है। इससे पहले आखिरी बार 1984 में ऐसा मौका आया था, जब संसद का शीतकालीन सत्र रद्द हो गया था। उससे पहले 1975 और 1979 में भी शीतकालीन सत्र नहीं आयोजित किया गया था। जोशी ने कहा है कि कोविड वैक्सीन (Covid vaccine)जल्द आने की संभावना है और ऐसे में जनवरी में बजट सत्र (budget session) आयोजित किया जा सकता है। गौरतलब है कि संविधान के प्रावधान के तहत संसद के दो सत्रों के बीच में 6 महीने से ज्यादा का अंतर नहीं हो सकता। यही नहीं कैबिनेट की राजनीतिक मामलों की समिति जो सत्र की तारीखों पर फैसला करती है, उसे सदस्यों को सत्र शुरू होने से दो हफ्ते पहले नोटिस देने की आवश्यकता होती है।

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    शीत सत्र में कई बार हो चुकी है देरी

    शीत सत्र में कई बार हो चुकी है देरी

    भले ही चौथी बार संसद का शीतकालीन सत्र नहीं आयोजित किया जा रहा हो, लेकिन इसके देर से शुरू होने के काफी उदाहरण हैं। संसद का रिकॉर्ड बताता है कि 1952 से लेकर 2019 तक राज्यसभा के 65 शीतकालीन सत्र में से 8 दिसंबर में शुरू हुए और कम से कम दो बार 1962 और 1963 में दिसंबर से लेकर जनवरी तक चला। मसलन, 1962-63 में शीत का पहला हिस्सा 19 नवंबर, 1962 से 12 दिसंबर, 1962 तक चला और दूसरा हिस्सा 21 जनवरी से 25 जनवरी, 1963 तक चला। यही बात 2003 में भी दोहराई गई, जब संसद के शीत सत्र का पहला हिस्सा 2 से 23 दिसंबर,2003 तक चला और फिर 30 जनवरी से 5 फरवरी, 2004 तक भी संसद बैठी।

    बजट सत्र में 40 से ज्यादा सांसद हो गए थे पॉजिटिव

    बजट सत्र में 40 से ज्यादा सांसद हो गए थे पॉजिटिव

    गौरतलब है कि इससे पहले संसद का मानसून सत्र भी कोरोना महामारी की वजह से देर से शुरू हुआ था और कई सांसदों और संसद के स्टाफ के संक्रमित होने की वजह से उसे समय से पहले ही स्थगित करना पड़ा था। कोविड-19 के चलते इस साल मानसून सत्र काफी देरी यानि 14 सितंबर से शुरू हुआ था और समय से 8 दिन पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। जबकि, इसे 1 अक्टूबर को समाप्त होना था। ऐसा इसलिए करना पड़ा, क्योंकि 40 से ज्यादा सांसद कोविड-19 पॉजिटिव पाए गए। संसद भवन के कई स्टाफ भी संक्रमित हो गए थे। खुद राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू भी कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। इससे पहले मार्च के बजट सत्र (budget session)को भी इसी कारण से छोटा कर दिया गया था। जिसके बाद नेशनल लॉकडाउन की घोषणा हुई थी।

    अब तक 6 मौजूदा सांसदों की कोविड के चलते हो चुकी है मौत

    अब तक 6 मौजूदा सांसदों की कोविड के चलते हो चुकी है मौत

    गौरतलब है कि अब तक एक केंद्रीय मंत्री समेत कुल 6 मौजूदा सांसद कोरोना वायरस की वजह से दम तोड़ चुके हैं। इनमें 3 लोकसभा और 3 राज्यसभा के सांसद थे। कोविड-19 के चलते सबसे पहले कन्याकुमारी के कांग्रेस सांसद एच वसंत कुमार की मौत हुई थी। वे 70 वर्ष के थे। केंद्रीय मंत्री और कर्नाटक के बेलगाम से सांसद सुरेश अंगड़ी की भी मौत कोरोना के चलते ही हुई थी। वहीं 64 वर्षीय तिरुपति से वाईएसआरसीपी के सांसद एमपी बल्ली दुर्गा प्रसाद राव ने भी इसी बीमारी की चपेट में आकर दम तोड़ दिया। वहीं गुजरात से राज्यसभा सांसद और कांग्रेस के बड़े नेता अहमद पटेल की भी मौत पिछले महीने कोरोना की वजह से हो चुकी है। भाजपा के नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद 55 साल के अशोक गस्ती की मौत का भी कारण कोरोना रहा है। बीजेपी के एक और राज्यसभा सांसद अभय भारद्वाज की भी जान कोविड ने ही ली है। इन 6 सांसदों में 4 पहली बार सांसद बने थे।

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